रविवार, 29 जनवरी 2017

सर्दी में उपयोगी बाजरा.

 

            बाजरे की रोटी और इसका खिचडा जो प्रायः सर्दी के मौसम में बहुतायद से खाया जाता है इसका स्वाद जितना अच्छा है, उतने ही अधिक उसमें गुण भी रहते हैं ।
 
            बाजरे की रोटी खाने वाले को हड्डियों में कैल्शियम की कमी से पैदा होने वाला रोग आस्टियोपोरोसिस और खून की कमी यानी एनीमिया नहीं होता ।
 
            बाजरा लीवर से संबंधित रोगों को भी कम करता है ।
 
            गेहूं और चावल के मुकाबले बाजरे में ऊर्जा कई गुना है ।
 
          बाजरे में भरपूर कैल्शियम होता है जो हड्डियों के लिए रामबाण औषधि है । उधर आयरन भी बाजरे में इतना अधिक होता है कि इसका सेवन करते रहने वाले लोगों को खून की कमी से होने वाले रोग नहीं हो सकते ।
 
            खासतौर पर गर्भवती महिलाओं ने कैल्शियम की गोलियां खाने के स्थान पर रोज बाजरे की दो रोटी खाना चाहिए ।
 
           वरिष्ठ चिकित्साधिकारी मेजर डा. बी.पी. सिंह की सिक्किम में सेना में तैनाती के दौरान गर्भवती स्त्रियों को कैल्शियम और आयरन की जगह बाजरे की रोटी और खिचड़ी दी जाती थी । इससे उनके बच्चों को जन्म से लेकर पांच साल की उम्र तक कैल्शियम और आयरन की कमी से होने वाले रोग नहीं होते थे । इतना ही नहीं बाजरे का सेवन करने वाली स्त्रियों में प्रसव में असामान्य पीड़ा के मामले भी न के बराबर पाए गए ।
 
            इसीलिये डाक्टर बाजरे के गुणों से इतने प्रभावित है कि इसे अनाजों में वज्र की उपाधि देने में जुट गए हैं । 
             
            लीवर की सुरक्षा के लिए भी बाजरा खाना लाभकारी है । उच्च रक्तचाप, हृदय की कमजोरी, अस्थमा से ग्रस्त लोगों तथा दूध पिलाने वाली माताओं में दूध की कमी को दूर करने के लिये यह टॉनिक का कार्य करता है ।
 
            यदि बाजरे का नियमित रूप से सेवन किया जाय तो यह कुपोषण, क्षरण सम्बन्धी रोग और असमय वृद्ध होने की प्रक्रियाओं को दूर करता है ।
 
           बाजरे की खपत से शरीर प्राकृतिक रूप से शान्त होता है । यह एंग्जायटी, डिप्रेशन और नींद न आने की बीमारियों में फायदेमन्द होता है । यह माइग्रेन के लिये भी लाभदायक है । इसमें लेसिथिन और मिथियोनिन नामक अमीनो अम्ल होते हैं जो अतिरिक्त वसा को हटा कर बेड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करते हैं ।
 
            बाजरे में उपस्थित रसायन पाचन की प्रक्रिया को संतुलित करते हैं । डायबिटीज़ में यह रक्त में शक्कर की मात्रा को नियन्त्रित करने में सहायक होता है । 

            इसलिये बाजरे का किसी भी रूप में सेवन न सिर्फ सर्दियों के मौसम में बल्कि सिमित मत्रा में सभी ऋतुओं में लाभकारी है ।
 

1 टिप्पणी:

आपकी अमल्य प्रतिक्रियाओं के लिये धन्यवाद...

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...