रविवार, 3 जुलाई 2016

"प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली"



पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात,
सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात !

धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार,
दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार !

ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर,
कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर !

प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप,
बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप !

ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार,
करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाढार !

भोजन करें धरती पर, अल्थी पल्थी मार,
चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार !

प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस,
सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश !

दही उडद की दाल सँग, पपीता दूध के संग,
जो खाएं इक साथ में, जीवन हो बदरंग !

प्रातः दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार,
तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार ! 

भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार,
डाक्टर, ओझा, वैद्य का, लुट जाए व्यापार  !

देश,भेष,मौसम यथा, हो जैसा परिवेश,
वैसा भोजन कीजिये, कहते सखा सुरेश !

इन बातों को मान कर, जो करता उत्कर्ष,
जीवन में पग-पग मिले, उस प्राणी को हर्ष !

घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर,
एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर !

अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास,
पानी पीजै बैठकर, कभी न आवें पास !

रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय,
सौगंध राम की खाइ के, तुरत छोड दो चाय !

सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश,
भोजन लीजै रात में, जैसे रंक सुरेश !
               
देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल,
अपच,आंख के रोग सँग, तन भी रहे निढाल !

टूथपेस्ट-ब्रश छोडकर, हर दिन दोनो जून,
दांत करें मजबूत यदि, करिएगा दातून !

हल्दी तुरत लगाइए, अगर काट ले श्वान,
खतम करे ये जहर को, कह गए कवि सुजान !

मिश्री, गुड, खांड, ये हैं गुण की खान,
पर सफेद शक्कर सखा, समझो जहर समान !

चुंबक का उपयोग कर, ये है दवा सटीक,
हड्डी टूटी हो अगर, अल्प समय में ठीक !

दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ,
बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ !

हँसना, रोना, छींकना, भूख, प्यास या प्यार,
क्रोध, जम्हाई रोकना, समझो बंटाढार !

सत्तर रोगों को करे, चूना हमसे दूर,
दूर करे ये बाझपन, सुस्ती अपच हुजूर !

यदि सरसों के तेल में, पग नाखून डुबाय,
खुजली, लाली, जलन सब, नैनों से गुमि जाय !

भोजन करके जोहिए, केवल घंटा डेढ,
पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड !

जो भोजन के साथ ही, पीता रहता नीर,
रोग एक सौ तीन हों, फुट जाए तकदीर !

पानी करके गुनगुना, मेथी देव भिगाय,
सुबह चबाकर नीर पी, रक्तचाप सुधराय !

अलसी, तिल, नारियल, घी, सरसों का तेल,
यही खाइए नहीं तो, हार्ट समझिए फेल !

पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सु जान,
श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान !

तेल वनस्पति खाइके, चर्बी लियो बढाइ,
घेरा कोलेस्टरॉल तो, आज रहे चिल्लाय !
  
अल्यूमिन के पात्र का, करता  जो उपयोग,
आमंत्रित करता सदा, वह अडतालीस रोग !

फल या मीठा खाइके, तुरत न पीजै नीर,
ये सब छोटी आंत में, बनते विषधर तीर !

चोकर खाने से सदा, बढती तन की शक्ति,
गेहूँ मोटा पीसिए, दिल में बढे विरक्ति !

नींबू पानी का सदा, करता जो उपयोग,
पास नहीं आते कभी, यकृति-आंत के रोग !

दूषित पानी जो पिए, बिगडे उसका पेट,
ऐसे जल को समझिए, सौ रोगों का गेट !

रोज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय,
बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय !

भोजन करके खाइए, सौंफ,  गुड, अजवान,
पत्थर भी पच जायगा, जानै सकल जहान !

लौकी का रस पीजिए, चोकर युक्त पिसान,
तुलसी, गुड, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान !

हृदय रोग, खांसी और आंव करें बदनाम,
दो अनार खाएं सदा, बनते बिगडे काम !

चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खावे,
ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगावे !

सौ वर्षों तक वह जिए, लेत नाक से सांस,
अल्पकाल जीवें, करें, मुंह से श्वासोच्छ्वास !

सितम, गर्म जल से कभी, करिये मत स्नान,
घट जाता है आत्मबल, नैनन को नुकसान !

हृदय रोग से आपको, बचना है श्रीमान,
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान !

अगर नहावें गरम जल, तन-मन हो कमजोर,
नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुंओर !

तुलसी का पत्ता करें, यदि हरदम उपयोग,
मिट जाते हर उम्र में, तन के सारे रोग !


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