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रविवार, 26 अप्रैल 2015

सामान्य पानी से रोगोपचार...


            प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में चिकित्सक पानी के द्वारा जिन महारोगों सहित अनेक हठी व व्यापक प्रसार वाले रोगों की आसान चिकित्सा का हवाला देते दिखते हैं उनमें मुख्य हैं-
          लकवा,      बेहोशी,     ब्लड कोलेस्ट्रॉल,    आधे सिर   का   व   सामान्य किन्तु हठी सिरदर्द,  रक्तचार (ब्लड-प्रेशर),     बलगम,     खांसी,     दमा,     टी.बी.,     एसिडिटी,     लिवर व पेशाब की बीमारियाँ,     कब्ज,     डायबिटीज,     बवासीर,     आँखों की बीमारियां,     नाक व गले की बीमारियां और     बच्चेदानी के कैंसर तक पर भी सिर्फ पानी के निम्न तरीके से नियमित सेवन करते रहने पर आसानी से काबू पाया जा सकता है ।
          इन बीमारियों से दूर रहने और यदि हों तो उनका उपचार करने के लिये पानी पीने का प्रचलित तरीका यह है कि प्रातः नींद से उठते ही बिना मुँह धोएं अथवा कुल्ला करे बगैर ही 1250 मि. ली. (लगभग 4 गिलास) पानी नित्य पालथी लगाकर बैठने की मुद्रा में पीने की आदत बनालें और इसके बाद अगले 45 मिनीट बाद ही कुछ भी चाय-दूध या कॉफी का सेवन जो भी आपकी आदत या दिनचर्या में हो वह करें ।
          यदि प्रारम्भ में आपको 4 गिलास पानी पीने में कठिनाई लगे तो दो-गिलास प्रतिदिन पीने की आदत से इस क्रम की शुरुआत करें और इसे 4 गिलास की मात्रा पर लाने तक अपना प्रयास जारी रखें । पुराने जानकार लोग इसे  उषापान के नाम से जानते हैं ।
           इसके चिकित्सकों की राय में इस उषापान के नियमित प्रयोग से -
              कब्ज (2 दिन),                                      गैस व अपच  (2 दिन), 
              डायबिटीज (शुगर) (8 से 10 दिन),           हाई ब्लड प्रेशर (1 महिना), 
              कैंसर (1 से 2 महिना)              और        टी.बी. (3 महिने) 
की समयावधि में ये रोग न सिर्फ पूरी तरह से नियंत्रण में आ सकते हैं  बल्कि कई रोगियों में जड से समाप्त होते भी देखे जा सकते हैं । 
          नित्य प्रातः 4 बडे गिलास पानी एक साथ पीने से हमारे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता । पेट भरपूर भर जाने का आभास अवश्य होता है जो अगले 45 मिनिट बाद फिर सामान्य भूख के जागरण जैसा हो जाता है । शुरुआती 2-3 दिनों तक आपको पेशाब ज्यादा आने की अनुभूति हो सकती है जो इस अवधि के बाद उसके सामान्य क्रम में आ जाती है ।
           अतः बिना पैसे के इस इलाज के द्वारा अपने शरीर को अनावश्यक रोगों व डॉक्टरों व दवाखानों के चक्करों से बचाये रखने के लिये इस उषापान को अपनी आदत में शुमार करें और स्वस्थ व प्रसन्न जीवन जिएँ ।

शुक्रवार, 9 जनवरी 2015

गर्म पानी के शारीरिक लाभ...



        सामान्य पानी शरीर की प्यास दूर करता है तो गर्म पानी शरीर से अनेकों रोगों को बाहर निकालने की सामर्थ्य रखता है । गर्म व कुनकुने पानी का सेहत के साथ बहुत पुराना सम्बन्ध है । गर्म पानी के नित्य नियमबद्ध तरीके से सेवन करने से शरीर को रोगानुसार निम्न प्रकार से लाभ मिलते है-
त्वचा के रुखेपन की समस्या को दूर कर चिकनी व चमकदार त्वचा हासिल करने के लिये एक ग्लास गर्म पानी रोजाना पीएं ।
गर्म पानी पीने से शरीर के सभी विषैले तत्व शरीर से बाहर हो जाते हैं । सुबह खाली पेट और रात्रि भोजन के बाद एक-एक गिलास गर्म पानी पीते कुछ समय लगातार पीने से पाचन सम्बंधी दिक्कतें दूर हो जाती हैं और कब्ज व गैस जैसी समस्याएं परेशान नहीं करती ।
भूख की कमी, भोजन में अरुचि और पेट में भारीपन जैसी समस्या दिखाई दे तो एक गिलास गर्म पानी में एक निंबू का रस, चाय का आधा चम्मच (2ग्राम) काली मिर्च पावडर  और स्वादानुसार थोडा सा नमक डालकर पीने से कुछ ही समय में पेट का भारीपन दूर होकर खुलकर भूख लगना प्रारम्भ हो जाती है ।
खाली पेट गर्म पानी पीने से सीने की जलन दूर होने के साथ मूत्र सम्बन्धी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं ।
वात से उत्पन्न सभी रोगों जैसे जोडों का दर्द, शरीर के किसी भी हिस्से में गैस के कारण उत्पन्न दर्द दूर करनें में गर्म पानी का सेवन अमृत के समान उपयोगी है ।
गर्म पानी के नियमित सेवन से शरीर का तापमान बढता है जिससे पेशाब व पसीने के माध्यम से शरीर के सारे जहरीले तत्व आसानी से शरीर से बाहर निकलते रहते हैं । इसके माध्यम से रक्त संचार (ब्लड सर्क्युलेशन) सुचारु बना रहता है ।
बुखार में प्यास लगने पर रोगी को ठंडा पानी नहीं पीना चाहिये सिर्फ गर्म पानी ही पीना चाहिये । बुखार में गर्म पानी ही शरीर के लिये अधिक उपयोगी होता है ।
पेट की अधिकांश बीमारियां दूषित जल के कारण ही उत्पन्न होती है । यदि पानी को गर्म करने के बाद ठंडा करके पीने की आदत बना ली जावे तो पेट की अधिकांश बीमारियां शरीर में पनपने ही नहीं पाएगी ।
गर्म पानी शरीर में शक्ति का संचार करता है । इसके प्रयोग से कफ व सर्दी से सम्बन्धित सभी रोग दूर हो जाते हैं ।
दमा, हिचकी व खराश जैसे रोगों के समाधान हेतु गर्म पानी का उपयोग करने के साथ ही तले-भुने पदार्थों के सेवन के बाद भी गर्म पानी पी लेना शरीर के लिये उचित रहता है ।
सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस मिलाकर पीने से शरीर को पर्यापत मात्रा में विटामिन सी की पूर्ति होती रहती है । गर्म पानी के साथ नींबू का संयोजन शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है व शरीर का पी. एच. स्तर भी इससे सही बना रहता है ।

रोजाना एक गिलास गर्म पानी सिर के सेल्स के लिये उत्तम टानिक का कार्य करता है ।
वजन घटाने के लिये भी गर्म पानी महुत मददगार होता है । भोजन के एक घंटे बाद गर्म पानी पीने से शरीर का मेटाबालिज्म बढता है । यदि गर्म पानी में थोडा नींबू और शहद मिलाकर इसे मुँह में घुमाते हुए पिया जावे तो इससे वजन संतुलित होकर मोटापा दूर होता है ।
हमेशा जवान दिखते रहने की चाहत रखने वाले लोगों के लिये गर्म पानी का नियमित सेवन सदैव एक बेहतरीन औषधि के रुप में मददगार साबित होता है ।

पानी पीने की सही विधि-
1.     प्रातः उठकर 2-3 गिलास सामान्य तापमान का या गुनगुना पानी पीना चाहिये । इससे मोटापा, कब्ज, त्वचा, रक्तचाप जैसी शारीरिक समस्याओं से मुक्ति पाने में सहायता मिलती है. यही पानी उषापान कहलाता है ।
2.     पानी हमेशा घूंट-घूंट करके व बैठकर पीना चाहिये क्योंकि इससे लार का निर्माण होता है । हमारे पेट में भोजन को पचाने के लिये अम्ल होता है व मुँह में जो लार होती है वह क्षार होती है और अम्ल व क्षार के संयमित संयोग से शरीर  में कब्ज की शिकायत नहीं होती ।
3.     पानी हमेशा शरीर के तापमान के अनुसार पीना चाहिये । न ज्यादा ठंडा और न ही बहुत ज्यादा गर्म क्योंकि ज्यादा ठंडा पानी पीने से पेट को अतिरिक्त कार्य करना पडता है और दिमाग, ह्रदय जैसे महत्वपूर्ण अंगों की कार्यशीलता कम होने लगती है । दिमाग का रक्त गुरुत्वाकर्षण के कारण सबसे पहले कम होने लगता है जिससे आगे चलकर ब्रेन हेमरेज जैसी समस्या की गिरफ्त में हमारा शरीर  आ सकता है ।
4.     ज्यादा ठंडा पानी पीने से पेट की बडी आंत सिकुड जाती है जिससे सभी रोगों की जनक कब्ज की शुरुआत होती है ।
5.     खाना खाने के कम से कम 30 मिनिट पहले और 45 मिनिट बाद तक पानी नहीं पीना चाहिये अन्यथा पाचन सम्ब्नधी समस्याएं होती हैं ।
6.     कोई भी फल अथवा मीठा खाने के तत्काल बाद पानी नहीं पीना चाहिये ।
 

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