मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

एंजियोप्लास्टी आपरेशन से बचें...!


         
            हमारे शरीर संचालन में शरीर का अशुद्ध होते रहने वाला रक्त जो ह्रदय तक पहुँचता है वो ह्रदय में मौजूद वाल्व प्रक्रिया से शुद्ध होकर वापस शरीर में परिभ्रमण करता है और इस प्रकार रक्त परिभ्रमण की ये प्रक्रिया जब तक हमारा जीवन है चलती रहती है । किन्तु जब ह्रदय में मौजूद वाल्व में अशुद्ध रक्त पहुँचता तो है किन्तु वहाँ से फिल्टर होकर वापस शरीरसंचरण हेतु निकल नहीं पाता तब उस अशुद्ध रक्त के ह्रदय में निरन्तर बढते दबाव से उत्पन्न वह दर्दनाक परिस्थिति जो रोगी का जीवन भी समाप्त कर दे उसे हम हार्ट-अटैक के रुप में जानते-समझते हैं, और जिस भी स्त्री-पुरुष के शरीर में हार्ट-अटैक की यह स्थिति बन जाती है डाक्टर उसका प्राथमिक उपचार एंजियोप्लास्टी आपरेशन मरीज का जीवन बचाने के लिये करते हैं जिसका सामान्य खर्च लगभग 3 से 5 लाख रु. तक मरीज के परिजनों को वहन करना पडता है ।
 
          भगवान न करे कि आपको कभी जिंदगी मे हार्ट-अटैक आए लेकिन अगर आ गया तो ? आपको डाक्टर के पास जाना ही पडेगा और आपको मालूम होगा कि इस एंजियोप्लास्टी आपरेशन में डाक्टर दिल की नली मे एक स्प्रिंग (spring) डालते हैं ! जिसे stent (स्टेंट) कहते हैं और ये stent (स्टेंट) अमेरिका से आता है जहाँ इसकी लागत (cost of production)  सिर्फ 3 डालर की होती है जिसके यहाँ काम में लेने पर रोगी या उसके परिजनों को लाखो रुपए का  भुगतान करना पडता है ।

          जबकि इसका आयुर्वेदिक इलाज बहुत बहुत ही सरल है । पहले आप यह समझ लीजिये कि ये (angioplasty) एंजियोप्लास्टी आपरेशन कभी किसी का सफल नहीं होता क्यूंकि डाक्टर जो spring दिल की नली मे डालता है  वो spring बिलकुल pen के spring की तरह होता है और कुछ दिनों बाद उस spring की दोनों side आगे और पीछे फिर blockage जमा होनी शुरू हो जाती है तब फिर दूसरा attack आता है और डाक्टर आपको फिर कहता है angioplasty आपरेशन करवाओ या फिर एंजियोग्राफी आपरेशन करवालो । इस तरह आपके लाखो रूपये लुट जाते है और आपकी ज़िंदगी इसी मे निकल जाती है।

अब समझिये इसका आयुर्वेदिक इलाज-
          हमारे देश भारत मे लगभग 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे उनका नाम महर्षि वागवटजी था । उन्होने अष्टांग-हृदयम नामक पुस्तक लिखी थी और इस पुस्तक मे उन्होने बीमारियो को ठीक करने के हजारों सूत्र लिखे थे । ये भी उनमे से ही एक सूत्र है, इसमें वागवटजी लिखते है कि कभी भी ह्रदय को घात हो रहा हो, मतलब दिल की नलियो मे ब्लाकेज (blockage)  होना शुरू हो रहा हो तो इसका मतलब है कि रक्त (blood) मे acidity (अम्लता) बढ़ी हुई है ।

          अम्लता आप समझते है जिसको अँग्रेजी मे हम एसीडिटी acidity कहते हैं । यह अम्लता दो तरह की होती है जिनमें एक होती है पेट कि अम्लता और दूसरी होती है रक्त (blood) की अम्लता ।

            आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है, खट्टी डकार आ रही है, मुंह तक चरपरा पानी आ रहा है जब यही अम्लता (acidity) और बढ़ जाती है तो ये हायपरएसीडिटी hyperacidity कहलाती है  और पेट की यही अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आ जाती है तो यह स्थिति रक्त-अम्लता (blood acidity)  होती है ।

          जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त (blood) दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता और नलियों मे blockage कर देता है, तभी heart attack होता है । इसके बगैर heart attack हो ही नहीं सकता जिसे प्रायः कोई डाक्टर तफतीस से आपको नहीं बताते, क्यूंकि इसका इलाज अत्यन्त सरल है ।
  
इलाज क्या है ?
          वागबटजी लिखते है कि जब रक्त (blood) मे अम्लता (acidty) बढ़ जावे तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करें जो क्षारीय हैं आप जानते होंगे की हमारी खाद्य सामग्री में दो तरह की चीजे होती है 1. अम्लीय और 2. क्षारीय. (acid and alkaline)

            जब अम्ल और क्षार को मिला दें तो क्या होता है ? neutral होता है ये सब जानते है । तो वागबट जी लिखते है कि रक्त में अम्लता यदि बढ़ी हुई है तो क्षारीय (alkaline) चीजे खाने-पीने से रक्त की अम्लता (acidity) समाप्त हो जाएगी और फिर heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं बचेगी । अब आप जानना चाहेंगे कि ऐसी कौन सी चीजे है जो क्षारीय हैं और इस स्थिति में हमें खाना चाहिये ? 

            आपके रसोई घर मे सुबह से शाम तक ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय होती हैं और जिन्हें यदि आप खाने-पीने के नियमित क्रम में शामिल कर लेंगे तो heart attack की कोई संभावना ही बाकि नहीं बचेगी ।

          सबसे ज्यादा आपके घर मे जो क्षारीय चीज है वह है लकी जिसे हम english मे bottle gourd कहते हैं और इसे आप सब्जी के रूप मे खाते है इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज नहीं है । तो आप रोज लकी का रस निकाल कर पिएँ या कच्ची लोकी खाएँ ।

          आपने स्वामी रामदेवजी को कई बार कहते सुना होगा कि लौकी का जूस पिओ । इस बाबद खबर यहाँ तक है कि लगभग तीन लाख से ज्यादा लोगों को उन्होने लोकी का जूस पिला-पिला कर ठीक कर दिया है और उसमे हजारों ऐसे  डाक्टर भी हैं जिन्हें खुद heart attack होने वाला था । ये डाक्टर भी वहाँ जाते हैं और उनका यही लौकी का रस 3-4 महीने पी-पी कर स्वस्थ होकर आते हैं और फिर उनके clinic पर बैठ जाते हैं । वे किसी को बताते नहीं कि हम कहाँ गए थे ! बल्कि किसी के पूछने पर कहते हैं कि हम न्यूयार्क-जर्मनी गए थे आपरेशन करवाने जबकि वो रामदेवजी के वहाँ गए थे और 3 महीने लौकी का रस पीकर आए हैं ! वो आपको नहीं बताते कि आप भी लोकी का रस पिओ । जबकि रामदेवजी भी लौकी के इस रस को वागवटजी के अध्ययन के आधार पर ही बताते हैं । वागवटजी कहते है कि रक्त की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी में ही है, तो आप लोकी के रस का सेवन करें । 

          अब प्रश्न यह हो सकता है कि कितना करें ? उत्तर है 200 से 300 मिलीग्राम प्रतिदिन पिएँ । कब पिये ? उत्तर है सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते है या नाश्ते के आधे घंटे के बाद भी पी सकते है ।

          इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते है । इसमे 7 से 10 पत्ते तुलसी के डाल लें । तुलसी बहुत क्षारीय है,  इसके साथ आप पुदीने के भी 7 से 10 पत्ते मिला सकते हैं । पुदीना भी बहुत क्षारीय है ! इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक इसमें जरूर डालें, ये भी बहुत क्षारीय हैं ।

          लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले, वो दूसरा आयोडीन युक्त सफेद नमक कभी न डालें क्योंकि ये आयोडीन युक्त सफेद नमक अम्लीय है । तो मित्रों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करें ।  2 से 3 महीने में ये आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा ।  21वें दिन से ही आपको इसका सकारात्मक असर दिखना शुरू हो जाएगा । आपको किसी आपरेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी । घर में ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा और आपका अनमोल शरीर और लाखों रुपए आपरेशन के बच जाएँगे । आप सकुशल ये पैसे बचाने के बाद भले ही किसी गौशाला मे दान कर दें ।

स्व. राजीव दीक्षितजी के संकलन से साभार...

एक और सरल व संक्षिप्त उपचार...
        हमारे खाद्यान्न में तले हुए व्यंजन, मिठाईयां, निरन्तर चलन में बढते फास्ट-फूड, शराब-सिगरेट, तम्बाकू के सेवन के साथ ही वायुमंडल में व्याप्त घातक जहरीले रसायनों के कारण हमारे शरीर की रक्त नलिकाओं में ठोस चिकनाई व कोलेस्ट्रॉल की मात्रा सामान्यतः बढती जाती है, जो रक्त परिभ्रमण की अनवरत चलने वाली प्रक्रिया के द्वारा ह्दय तक जाकर फिल्टर नहीं हो पाती और धीरे-धीरे वहाँ जमा होते रहकर उन्हें संकरा करते हुए दिल की सामान्य धडकनों को अनियमित करना प्रारम्भ कर देती है जिसके कारण हम सांस लेने में दिक्कत, कमजोरी, चक्कर आना, तेज पसीना, बैचेनी व पेट से उपर के भाग में कहीं भी और प्रायः सीने या छाती में बांयी ओर दर्द का अहसास करते हैं और यही स्थिति निरन्तर बढते क्रम में होते रहने के बाद आगे जीवित रहने के लिये डॉक्टर बेहद खर्चीली एंजियोप्लास्टी और कभी-कभी जीवन के लिये खतरनाक बाय-पास सर्जरी का अंतिम विकल्प हमारे अथवा हमारे परिजनों के समक्ष रखते हैं जिसका दुष्परिणाम पूरे परिवार के लिये कभी-कभी जिंदगी भर की संचित बचत को उपचार में खर्च कर देने, बडा कर्ज लेने और किस्मत यदि खराब हो तो इसके बाद भी हमारे प्रिय परिजन को सदा-सर्वदा के लिये खो देने के रुप में हमारे सामने आता है ।
    इस स्थिति से बचाव के लिये समय रहते क्या कुछ किया जा सकता है ?  निःसंदेह हाँ...
    अलसी के गुणों से हम अपरिचित नहीं हैं । मानव शरीर के लिये इसका तेल और भी अधिक गुणों का भंडार स्वयं में संजोकर रखता है किंतु उसमें भी घानी की अशुद्धियां, वसा की मौजूदगी और वातावरण के अच्छे-बुरे कारकों का प्रभाव मौजूद रहता ही है । इन अशुद्धियों को दूर करते हुए शरीर के लिये उच्चतम परिष्कृत पद्दतियों से निर्मित 'फ्लेक्स ऑईल जेल केप्सूल' जिसमें ओमेगा 6, ओमेगा 9, अनिवार्य फेटी एसिड, फाईबर, प्रोटीन, जिंक, मेग्निशीयन, विटामिन व 60% तक शुद्ध ओमेगा 3 मौजूद रहता है । ये सभी मित्र घटक हमारे शरीर की रक्त नलिकाओं में मौजूद सभी प्रकार की अशुद्धियों की सफाई करने का कार्य अत्यंत सुचारु रुप से करने में सक्षम होते हैं ।
    यदि हम स्वयं इसका परीक्षण करके देखें तो थर्मोकोल (जो कभी में नष्ट नहीं होता व यदि इसे जलाया भी जावे तो और भी घातक रासायनिक प्रक्रिया के द्वारा वायुमंडल में व्याप्त होकर हमारे शरीर के लिये अधिक नुकसानदायक साबित होता है) इसकी किसी भी शीट का एक चने के बराबर छोटा टुकडा लेकर व इस फ्लेक्स ऑईल जेल केप्सूल के एक केप्सूल को सुई की नोक से पंचर करके इसमें मौजूद उच्चतम गुणवत्ता के तेल को अपनी हथेली अथवा किसी प्लेट में निकालकर उसमें फाईबर के इस छोटे से टुकडे को डाल दें तो हम देखेंगे कि बमुश्किल 4-5 मिनिट में उस केप्सूल में मौजूद शुद्ध परिष्कृत जेल तेल में वह फाईबर का टुकडा गायब हो जाता है ।
    जब इसी फ्लेक्स ऑईल केप्सूल को हम नियमित रुप से अपने आहार में शामिल कर लेते हैं तो इसी प्रकार इसके शक्तिशाली घटक हमारे शरीर की रक्त-नलिकाओं में जमा सारा बे़ड कोलेस्ट्राल व अन्य अशुद्धियों को साफ करते हुए उन अवशिष्ट पदार्थों को मल-मूत्र के माध्यम से आसानी से शरीर से बाहर निकाल देते है और हम इन्हीं खान-पान व वातावरण में निरोगावस्था में अपना सामान्य जीवन जीते रह सकते हैं ।
             यदि उपरोक्त समस्याओं से ग्रस्त कोई व्यक्ति इस फ्लेक्स ऑईल जेल केप्सूल को 2 या 3 केप्सूल आवश्यकतानुसार प्रतिदिन चार माह (120 दिन) तक नियमित रुप से ले तो जहाँ वह अपनी सभी संबंधित शारीरिक समस्याओं से मुक्त हो सकता है वहीं यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति 2 केप्सूल प्रतिदिन 2 से 3 माह (60 से 90 दिन) लगातार ले तो वह अगले एक वर्ष तक रक्त नलिकाओं की किसी भी समस्या से स्वयं को मुक्त रख सकता है ।
        90 केप्सूल का 515/- रु. मूल्य का यह केप्सूल पैक यदि आपके क्षेत्र में उपलब्ध हो तो आप इन्हें अपने आसपास से खरीदकर अपने दैनिक आहार में शामिल कर आपके अमूल्य ह्दय की न सिर्फ आज बल्कि आने वाले लम्बे समय तक सुरक्षा बनाये रख सकते हैं और यदि यह आपके क्षेत्र में उपलब्ध न हो पावे तो मात्र 65/- रु. पेकिंग व कोरियर खर्च अतिरिक्त रुप से वहन करते हुए 580/- रु. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की 'इन्दौर साधना नगर ब्रांच' का उल्लेख करते हुए सेविंग A/c No. 53014770506 में सुशील कुमार बाकलीवाल के नाम से जमा करवाकर व मोबाईल नंबर +91 91799 10646 पर हमें Call अथवा WhatsApp मेसेज द्वारा अपना नाम व पूरा पता भेजते हुए घर बैठे प्राप्त कर अपने व अपने परिजनों के लिये इसका लाभ आवश्यक रुप से ले सकते हैं । 

    अनुरोध- यदि आपके क्षेत्र में ये केप्सूल उपलब्ध हों तब भी आप इन्हें खरीदने से पूर्व यदि इसके उपलब्धि स्थल की प्रमाणित जानकारी हमें भेजेंगे तो हम आपको यह भी बता पावेंगे कि उस स्थिति में आप इस पर 5%  से 10% तक अतिरिक्त बचत कैसे कर सकते हैं ।

14 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही उपयोगी जानकारी ... प्रॉब्लम यही हा की बस इंसान डरता है ... सोचता है अगर ठीक नहीं हुआ तो ..

    वैसे ये सब आज के विज्ञान के प्रचार का भी नतीजा ज्यादा है .... हम आधुनिक पद्धति पे ज्यादा विश्वास करते हैं ...

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    1. श्री नासवाजी,
      समस्या चाहे जो हो यदि मसला बीमारी से सम्बन्धित है तो प्रायः मृत्यु एकदम से तो नहीं ही आ पाती है ऐसे में यदि प्राथमिक लक्षण दिखते ही उस समस्या के देशी या आयुर्वेदिक पद्धतियों को अपनाकर उपचार गम्भीरतापूर्वक चालू कर दिया जावे तो बगैर किसी चीर-फाड (शरीर की भी व जेब की भी) के समस्या के समाधान तक पहुँचा तो जा सकता है ।

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  2. jaankari achchhi hai ..heart attack ke liye dhamniyon me cholesterol jamne ko jimmedar mana jata hai ..uske liye kya prakaash dalenge..

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  3. शारदाजी,
    यदि हम शब्दों के हेर-फेर की भाषा से बचकर सोचें तो धमनियों का यही कोलेस्ट्राल वह दूषित रक्त हो सकता है जिसे हमारे ह्रदय की धमनियां कुशलतापूर्वक पम्प नहीं कर पाती और जो ह्रदय की रक्त नलिकाओं में जमा रह जाता है, इसे ही डाक्टरी भाषा में हम दूषित कोलेस्ट्राल के रुप में जानते समझते हैं ।

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  4. बाकलीवाल जी, हमने तो सीधे बायपास ही करवा लिया. अब क्या यह प्रयोग काम आयेगा? और लौकी को जूस के बाजये सीधे सलाद की तरह खाने से भी फ़ायदा होगा? कॄपया बयायें.

    रामराम.

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    1. ताऊजी,
      बायपास करवा लेने के बाद भी यदि जीवनशैली खान-पान के नजरिये से बगैर किसी परहेज के पूर्ववत ही चलती रहे तो समस्या तो बाद में भी पैदा हो सकती है इसलिये बचाव के रुप में लौकी का ये प्रयोग करते रहने में नुकसान तो कुछ है ही नहीं अप्रत्यक्षतः फायदा जरुर हो सकता है । अब रही बात सलाद रुप में खाने की तो इस लेख में ही कच्ची लौकी खाने की सलाह भी दी ही गई है ।

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  5. aapka lek padkar accha laga jankari k liye aapka aabhar hamne abhi apne pitaji ki angioplasty karwayi hai aapne ye kehkar to hame dara hi diya ki angioplasty kisi ki safhal nahi hoti loki ke juice se aage k liye hum satark ho sakte hai kya aur hame ab kya karna chahiye

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  6. aapka lek bahut accha laga hamne abhi apne pitaji ki angioplasty karwayi hai aapne ye kaha ki angioplasty kisi ka safhal nahi hota hame dara diya.. loki ka juice pitaji k liye kesa rahega aur hame ab kya karna chahiye jisse aage koi prob na ho

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    1. राहुल देउपा जी.
      प्रायः एन्जियोप्लास्टी समस्या के तात्कालिक समाधान के लिये करते हैं और उसके कुछ समय बाद (दो-चार साल बाद तक भी) फिर ऐसे मरीजों को एन्जियोग्राफी आफरेशन जिसे संभवतः हम बायपास सर्जरी भी कहते हैं वह करवाना ही पडती है । इसी लिये कई रोगियों व उनके परिजनों को मैंने इस स्थिति में सीधे एिन्जयोग्राफी का निर्णय ही लेते देखा है ।
      अलबत्ता आप उपरोक्त लौकी के जूस को एक बार देना प्रारम्भ करें, सूट होने पर तीन माह तक नियमित देते रहें और आगे तो फिर ईश्वर ईच्छा सर्वोपरि है ही.

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  7. Very nice & useful information for Heart.

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  8. sir mere sine main halka dard rahta hai mera ldl colestrol 119 hai kya iski vajah hart ki problam hai

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  9. कपाल भॉति की तरह मेरी श्वास बाहर फीक रही थी.हायपर एसिडीटी बताकर रेफर किया, ढाई घण्टे के अन्दर मेरी angioplasty बिना बताए परीजनो को डराकर 42वर्ष की आयु मे कर दी,ढाई साल बित गए लेकिन अब तक गले मे और निचले जबडे मे खिचाव होता है बेतार हो गया हू क्रोध,बोझ(३किलो),चलना१.५k.m.,इनसे ज्यादा छमता नही है lvef पहले और आज भी 30% ही है क्रपया अपना सुझाव दे,please

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  10. Kapal bhanti ki tarah meri saans bahr thi hyper acidity batakar mujhe refar KAR diya gaya and 3ghante me meri angioplasty KAR di gayi 42year ki ayu me hi meri angioplasty KAR di gayi angioplasty ko 3year ho chuke hai lekin mera Lvef pehle aur aaj bhi 30% hi hai gale me khichav hota hai bekar sa ho gaya hu.krodh,bojh(3kg)and walk(1.5km)se dur rahna padta hai. Please apna amulya samay dekar kuch sujhav de..

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  11. Very nice & amazing article!! It would have been great if we could have cost estimate for Coronary Angioplasy in Delhi NCR from top hospitals.

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आपकी अमल्य प्रतिक्रियाओं के लिये धन्यवाद...

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