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शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

घुटनों के दर्द से बचाव के आसान घरेलू उपाय...

           घुटनों का दर्द बहुत ही पीड़ादायक होता है और यह आपको चलने-फिरने में भी असमर्थ कर देता है ऐसे में यदि आपका वजन भी अधिक हो या आप वृद्धावस्था में हों तो घुटनों का दर्द और भी तकलीफदेह हो जाता है । यह बात कम ही लोग जानते हैं कि कुछ आसान घरेलू उपायों की मदद से घुटनों के दर्द की इस तकलीफ से छुटकारा पाया जा सकता है ।  जी हाँ ! यदि आप निम्नलिखित कारणों से घुटनों के दर्द से पीड़ित है:-

           1. घुटनों की माँसपेशियो में खून का दौरा सही नहीं होना,
           2. घुटनों की माँसपेशियो में खिंचाव या तनाव होना,
           3. माँसपेशियो में किसी भी तरह की चोट का प्रभाव,
           4. वृद्धावस्था ।

   तो नीचे बताये गए ये घरेलू उपाय आपको घुटनों के दर्द से छुटकारा दिला सकते हैं...

घुटनों के दर्द से बचाव के उपाय-

           घुटनों का दर्द – उपाय 1. - एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, एक  छोटा चम्मच पीसी हुई चीनी या बूरा या शहद (कुछ जानकार यहाँ गुड का प्रयोग करने की सलाह भी देते हैं), एक चुटकी चूना (जो पान में लगा कर खाया जाता है) और आवश्यकतानुसार पानी । इन सभी को अच्छी तरह मिला लीजिये, एक लाल रंग का गाढ़ा पेस्ट बन जाएगा । सोने से पहले यह पेस्ट अपने घुटनों पे लगाइए बिछौना गंदा होने से बचाने के लिये इसे ट्रांसपेरेंट पन्नी के साथ किसी साडीफाल से बांध लें, इसे सारी रात घुटनों पर लगा रहने दें और सुबह साधारण पानी से धो लें । कुछ दिनों तक प्रतिदिन इसका इस्तेमाल करने से सूजन, खिंचाव, चोट आदि के कारण होने वाला घुटनों का दर्द पूरी तरह ठीक हो जाएगा ।

           घुटनों का दर्द – उपाय 2. - एक छोटा चम्मच सोंठ का पाउडर लें और इसमें थोडा सरसों का तेल अच्छी तरह से मिलाकर एक गाढा पेस्ट बना लें । इसे अपने घुटनों पर मलिए और कुछ घंटों बाद इसे धो लीजिये । इसका प्रयोग आप दिन या रात कभी भी कर सकते हैं । इससे आपको घुटनों के दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलेगा ।

           घुटनों का दर्द – उपाय 3. - खजूर विटामिन ए, बी, सी, आयरन व फोस्फोरस का एक अच्छा प्राकृतिक स्रोत है इसलिए खजूर घुटनों के दर्द सहित सभी प्रकार के जोड़ों के दर्द के लिए बहुत असरकारक है । आप एक कप पानी में 7-8 खजूर रात भर भिगोयें और सुबह खाली पेट ये खजूर खाएं और जिस पानी में खजूर भिगोये थे, वो पानी भी पियें ऐसा करने से घुटनों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, और घुटनों के दर्द में बहुत लाभ मिलता है ।

           ऐसे ही नारियल भी घुटनों के दर्द के लिए बहुत अच्छी औषधी है । रोजाना सूखा नारियल खाएं, नारियल की गिरी का मिक्सर ग्राईंडर की मदद से दूध बनाकर दिन में दो बार उस दूध का सेवन करें और दिन में दो ही बार घुटनों पर नारियल के तेल की मालिश करें । इससे आपको घुटनों के दर्द में अद्भुत लाभ मिल सकेगा ।

           उपरोक्त उपायों के अलावा हम हेल्थकेअर सर्विस के द्वारा प्रस्तुत घुटनों की आसान एक्सरसाईज का चार्ट भी यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं-


           दिन में कुछ समय यदि आप इसके लिये भी निकाल सकेंगे तो आपको अधिक शीघ्र फायदा मिल सकेगा । यद्यपि आपको लग सकता है कि इतने खटकरम कौन करेगा किंतु यदि आप दीर्घकालीन राहत पाना चाहते हैं तो अपनी सुविधा व सामर्थ्य के मुताबिक इन उपायों का प्रयोग करें और अपने आप को स्वस्थ बनाए रखने का उपाय करें । 

           इसके अलावा भी यदि आप दर्द की अधिकता के कारण कुछ कर ही नहीं पा रहे हैं तो विशेष आयुर्वेदिक पद्धति द्वारा अधिकतम उपयोगी जडी-बूटियों के प्रयोग से निर्मित 100 ग्राम मात्रा में उपलब्ध 200/- रु. मूल्य का शरीर के सभी जोडों के दर्द व जकडन में विशेष राहत दिला सकने वाला शारीरिक दर्द निवारक तेल मंगवाने के लिये मोबाईल फोन नं. +91 91799 10646 पर सम्पर्क कर सकते हैं ।

सोमवार, 8 अगस्त 2016

जीवनदायिनी प्राकृतिक अलसी - नया नजरिया...


            मानव शरीर को स्वस्थ रख सकने में ओमेगा 3 की प्रचुर मात्रा से भरपूर अलसी की गुणवत्ता से हममें से लगभग सभी लोग किसी न किसी रुप में कम या ज्यादा जानकारी के द्वारा लगभग परिचित होंगे । हमारे शरीर का शायद ही कोई अवयव ऐसा होगा जहाँ अलसी अपना गुणकारी प्रभाव न छोड पाती हो । किंतु इसके बाद भी लोग प्रायः इसे अपने आहार में आवश्यक अनुपात में शामिल नहीं कर पाते । यदि यह समझने की कोशिश की जावे कि ऐसा क्यों ? तो जो कुछ जाने-पहचाने कारण समझ में आते हैं, वे ये हो सकते हैं -

            1. अलसी हर जगह बहुतायद से नहीं मिलती, प्रायः इसे ढूंढना पडता है ।

            2. चबाने पर अलसी ऐसा लिसलिसा पदार्थ बनकर मुंह में अरुचिकर व कसैली सी स्थिति बना देती है जो सामान्य तौर पर हम पसन्द नहीं कर पाते ।

            3. अलसी के पूरे स्वास्थ्य-लाभ शरीर को मिल सकें इसके लिये प्रतिदिन लगभग 30 से 60 ग्राम अलसी का सेवन आवश्यक माना जाता है । जहाँ 10-5 ग्राम की मात्रा भी हम नियमित रुप से नहीं ले पाते वहीं 30 से 60 ग्राम तो प्रायः हमारी सोच से भी परे की स्थिति बन जाती है ।

            4. अलसी का तेल भी ढूंढने पर मिल जाता है किंतु प्रायः पेंट इंडस्ट्री (दीवारों का रंग-रोगन, ऑईल पेंट) के काम आने हेतु उपलब्ध यह तेल कच्ची घानियों के अस्वास्थ्यकर माहौल में निकाला जाकर पेंट इंडस्ट्रीयों में सप्लाय कर दिया जाता है । इसे इसी रुप में ग्रहण करने पर शरीर को इसके पूरे लाभ मिलना तो दूर इसमें मौजूद गंदगी व वसा जैसे पदार्थों के कारण इसके वास्तविक लाभों से भी वंचित रह जाना पडता है, और फिर 10-5 ग्राम तेल नित्य लेने पर शरीर को इसके नगण्य से लाभ ही मिल पाते हैं । 

            वर्तमान समय में 'वेस्टीज' नामक कं. ने अपने आधुनिकतम वैज्ञानिक संयत्रों में इसके तेल की गुणवत्ता को अधिकतम शुद्ध रुप में आत्मसात करके इसकी ओमेगा 3 की मात्रा को लगभग 65% सुरक्षित रखते हुए इसे जेल केप्सूल के रुप में मानव समुदाय के लिये इस प्रकार से निर्मित किया है कि सिर्फ दो केप्सूल सामान्य शारीरिक स्वास्थ्य को बरकरार रखने हेतु अथवा तीन केप्सूल रक्त नलिकाओं में ब्लॉकेज की समस्या वाले रोगियों के लिये यदि तीन माह भी आवश्यकतानुसार लगातार ले लिये जावें तो एंजियोप्लास्टी अथवा बायपास सर्जरी की लाखों रुपये खर्चीली त्रासद स्थिति से न सिर्फ रोगग्रस्त व्यक्ति को बल्कि उसके पूरे परिवार को यह फ्लेक्स ऑईल जेल केप्सूल बाहर निकाल लाने में अपनी पावरफूल सक्षमता साबित कर देते हैं. कैसे  ?


             प्रायः रक्त नलिकाओं में घी-तेल में तले जाने वाले मीठे व्यंजन व मसालों से भरपूर वसा व चिकनाईयुक्त आहार के सेवन करने, चौतरफा प्रदूषणयुक्त वातावरण में पेस्टीसाईड व केमिकलयुक्त खाद-बीज व गंदे नाले के पानी में सिंचित सब्जियों के जाने-अनजाने अपने दैनिक आहार में उपयोग में आने जैसे खानपान से व सडकों पर प्रदूषण फैलाती घासलेट, डीजल व पेट्रोल चलित गाडियाों का विषैला धुँआ हमारे शरीर की रक्त नलिकाओं में घातक रुकावट का कारण बनते हुए बेड कोलेस्ट्राल के रुप में जमा होता रहता है और जो ह्रदय में रक्त की पंपिंग प्रक्रिया को निरंतर बढते क्रम में बाधित करता है । इसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव हमारे दिल की उन नलिकाओं पर पडता है जहाँ से खून शुद्ध होकर पुनः पूरे  शरीर में परिभ्रमण करते हुए हमारे स्वस्थ जीवन का आधार बनता है । जब वहाँ रक्त-नलिकाओं में निरन्तर बढते क्रम में यह अशुद्धि लगभग जाम जैसी स्थिति बना देती है तब रोगी व्यक्ति का जीवन बचाने हेतु ये खर्चीले आपरेशन ही एकमात्र सहारे के रुप में नजर आते हैं ।
      
             ये प्लेक्स ऑईल केप्सूल कैसे काम करता है  ?
  
             रक्त में जमा कोलेस्ट्राल की स्थिति कमोबेश थर्मोकोल जैसी होती है । किसी भी इलेक्ट्रकल या मिलते-जुलते उत्पाद को जब आप खरीदकर अपने घर लाते हैं तो वह थर्माकोल की पैकिंग में ही आता है । यह थर्माकोल कभी भी नष्ट नहीं होता । आप इसे जलाएंगे तो और अधिक घातक कार्बन उत्सर्जन की प्रक्रिया द्वारा आपके आसपास के वायुमंडल को यह प्रदूषित कर देगा । इसे जमीन में यदि गाड देंगे तो पचास वर्ष बाद भी यह वैसा का वैसा ही वापस निकलेगा । लेकिन यदि इस फ्लेक्स ऑईल केप्सूल में आप इसे डालेंगें तो देखते ही देखते यह थर्माकोल गायब हो जावेगा, जबकि सिर्फ अलसी के तेल में आप इस थर्माकोल को डालेंगे तब यह वैसा का वैसा ही मौजूद रहेगा । इस फ्लेक्स ऑईल की शरीर के लिये उपयोगिता समझने हेतु आप यह छोटा सा वीडियो क्लीपिंग देखकर इस अन्तर को समझ सकते हैं-
 
video
   

             समस्याओं के प्राथमिक चरण में जब हमें सांस लेने में कम या ज्यादा दिक्कत, चढाव चढने में हाँफनी, कमजोरी, चक्कर आना, सामान्य से अधिक पसीना, बैचेनी व पेट से उपर के भाग में कहीं भी और प्रायः सीने या छाती में बांयी ओर दर्द का अहसास होने लगे तो यह तय मानना चाहिये कि आने वाले किसी भी कल में हमारे समक्ष भी यह खर्चीले ऑपरेशन सहित दुरुह और कष्टसाध्य स्थिति कभी भी बन सकती है । 

            वैसे भी वे शारीरिक कोशिकाएँ जिनकी उत्पत्ति व विखंडन का क्रम हमारे शरीर के गर्भधारण की प्रक्रिया के साथ प्रारम्भ हो जाता है और जो हमारे 5 से 6 फीट के शरीर में अरबों-खरबों की मात्रा में मौजूद रहते हैं उनका गणित यह रहता है कि आज हम जिस भी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं शरीर में उसकी उत्पत्ति का क्रम करीब 12 वर्ष पहले शुरु हो चुका होता है और उन कोशिकाओं को ही स्वस्थ करने व रखने के आधुनिक वैज्ञानिक फार्मूले पर यह कंपनी काम कर रही है । 

            जब भी आप ये फ्लेक्स ऑईल केप्सूल लेते हैं तो इसके गुणों से आपके शरीर में मौजूद जमी हुई वसा को पिघलाकर कुछ शरीर की पौष्टिकता में वृद्धि करने के उपयोग में और शेष अनावश्यक को मल-मूत्र द्वारा शरीर से बाहर निकलवाकर अपनी फेट (मोटापे अथवा बढे हुए वजन) के निदान के साथ ही  घुटनों व अन्य जोडों की बढती उम्र में घटती रहने वाली चिकनाई को व्यवस्थित रखने का एक और अन्य उपयोग शरीर को दिलवाते हैं जिसके कारण शरीर या तो जोडों के दर्द से बचा रहता है या यदि ये समस्या हो तो उसका उपचार भी इसकी मदद से स्वमेव होता रहता है ।

            अतः उपरोक्त किसी भी ऐसी दुसाध्य स्थिति से बचाव के क्रम में शुद्ध प्राकृतिक अलसी के अधिकतम गुणों को स्वयं में संजोये रखने वाले ये फ्लेक्स ऑईल केप्सूल हम निरापद रुप से शारीरिक स्वास्थ्य का अदृश्य बीमा मानते हुए समय-समय पर लेते रह सकते हैं और अपने शरीर का इन विपत्तियों से बचाव करते रह सकते हैं ।

            हमारे शरीर की रक्त नलिकाओं में मौजूद सभी प्रकार की अशुद्धियों की सफाई करने का कार्य अत्यंत सुचारु रुप से करने में सक्षम ये फ्लेक्स ऑईल जेल केप्सूल का 90 केप्सूल का पैक (शीशी) 515/- रु. मूल्य का यदि आपके क्षेत्र में उपलब्ध हो तो आप इन्हें आसपास से खरीदकर अपने दैनिक आहार में शामिल कर आपके अमूल्य ह्दय की न सिर्फ आज बल्कि आने वाले लम्बे समय तक सुरक्षा बनाये रख सकते हैं और यदि यह आपके क्षेत्र में उपलब्ध न हो पावे तो मात्र 65/- रु. पेकिंग व कोरियर खर्च व 25/- रु. बैंक शुल्क के अतिरिक्त रुप से वहन करते हुए 600/- रु. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की 'इन्दौर साधना नगर ब्रांच' का उल्लेख करते हुए सेविंग A/c No. 53014770506 में सुशील कुमार बाकलीवाल के नाम से जमा करवाकर स्लिप की फोटो प्रति मोबाईल नंबर +91 91799 10646 पर हमें WhatsApp मेसेज द्वारा अपना नाम व पूरा पता भेजते हुए घर बैठे प्राप्त कर अपने व अपने परिजनों के लिये इसका लाभ नियमित  रुप से ले सकते हैं । इसी नंबर पर आप कभी भी हमसे सम्पर्क भी कर सकते हैं ।

           यदि आप उच्चतम गुणवत्ता से परिपूर्ण उपरोक्त फ्लेक्स ऑईल केप्सूल मंगवाने के लिये पूरे पैसे एडवांस में नहीं भेजना चाहें तो आपके लिये दूसरा विकल्प यह भी हो सकता है कि आप सिर्फ 100/- रु. का अग्रिम पोस्टल म. ऑ. हमारे नीचे के पते पर पोस्टेज व पैकिंग खर्च हेतु पहले भेजकर शेष 500/- रु. की वी. पी. पार्सल द्वारा इसे पहले प्राप्त करलें और अपने पोस्टमेन को यह रकम जो म. ऑ. खर्च मिलाकर 525/- रु. होगी का भुगतान कर उससे इसे प्राप्त कर लें ।

            कृपया ध्यान दें - यदि आप अग्रिम 100/- रु. भेजकर इसे मंगवाना चाह रहे हैं तो सिर्फ पोस्टल म. ऑ. ही भेजें क्योंकि यदि आप यह 100/- रु. बैंक खाते में जमा करवाएंगे तो बैंक इस पर भी 25/- रु. अपने सेवा शुल्क के काट लेगा और तब आपको 500/- रु. की बनिस्बत 525/- रु. की वी. पी. पार्सल स्वीकार करना होगी । किंतु यदि आप पूरे पैसे पहले जमा करवाना चाहें तो सिर्फ कुल 600/- रु. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की उपरोक्त 'इन्दौर साधना नगर ब्रांच' का उल्लेख करते हुए सेविंग A/c No. 53014770506 में जमा करवाकर मोबाईल नंबर +91 91799 10646 पर हमें सूचित कर रजिस्टर्ड पोस्ट द्वारा शेष बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के घर बैठे फ्लेक्स ऑईल के 90 केप्सूल की यह शीशी प्राप्त कर इसके द्वारा व्यवस्थित स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं ।

           पोस्टल म. ऑ. यदि भेजना चाहें तो निम्न पते पर भेजें-

 Sushil Bakliwal
"Prabhukripa", 586, Kalani Nagar, Aerodrome Road, INDORE-452005. (M. P.)  

सोमवार, 11 जुलाई 2016

जीवन रक्षक पानी - कब पिएं, कब न पिएं...


            हम पानी क्यों ना पीये खाना खाने के बाद  । हमने दाल, सब्जी, रोटी खाई,  दही खाया, लस्सी पी, दूध, दही, छाछ, फल आदि, ये सब भोजन के रूप मे हमने ग्रहण किया । ये सब हमको उर्जा देता है और पेट उसी उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है ।

            पेट मे एक छोटा सा स्थान होता है जिसको हम हिंदी मे कहते है "अमाशय" उसी स्थान का संस्कृत नाम है "जठर"  और उसी स्थान को अंग्रेजी मे कहते है "epigastrium" ये एक थेली की तरह होता है और यह जठर हमारे शरीर मे सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी मे आता है । ये बहुत छोटा सा स्थान हैं । इसमें अधिक से अधिक 350gms खाना आ सकता है.! हम जो कुछ भी खाते हैं वो सब इस अमाशय मे आ जाता है.! आमाशय मे अग्नि प्रदीप्त होती है । उसी को कहते हे "जठराग्नि" ।

            ये जठराग्नि ही है जो अमाशय मे प्रदीप्त होने वाली आग है । जैसे ही आपने खाना खाया, की जठराग्नि प्रदीप्त हो गयी । यह ऑटोमेटिक है । जैसे ही अपने रोटी का पहला टुकड़ा मुँह मे डाला की जठराग्नि प्रदीप्त हो जाती है । फिर ये अग्नि तब तक जलती हे जब तक खाना' पचता है | अब यदि आपने खाते ही गटागट पानी पी लिया और खूब ठंडा पानी पी लिया जैसे कई लोग तो बोतल पे बोतल पी जाते है तो जो आग (जठराग्नि) जल रही थी वो बुझ जाती है । 

            आग अगर बुझ गयी .तो खाने की पचने की जो क्रिया है वो भी रुक जाती है । तब You suffer from IBS, Never CURABLE.

            हमेशा याद रखें - खाना जाने पर हमारे पेट में दो ही क्रिया होती है, एक क्रिया है जिसको हम कहते हे "Digestion" और दूसरी है "fermentation" फर्मेंटेशन जिसका मतलब है सडना, और डायजेशन का मतलब हे पचना । आयुर्वेद के हिसाब से आग जलेगी तो खाना पचेगा, खाना पचेगा तो उससे रस बनेगा.! जो रस बनेगा तो उसी रस से मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डिया, मल, मूत्र और अस्थि बनेगा और सबसे अंत मे मेद बनेगा.! किन्तु ये सब तभी होगा जब खाना पचेगा ।

            ये तो हुई खाना पचने की बात. अब जब खाना सड़ेगा तब क्या होगा ।  खाने के सड़ने पर सबसे पहला जहर जो बनता है वो हे यूरिक एसिड (uric acid), कई बार आप डॉक्टर के पास जाकर कहते है की मुझे घुटने मे दर्द हो रहा है, मुझे कंधे-कमर मे दर्द हो रहा है तो डॉक्टर कहेगा आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है आप ये दवा खाओ, वो दवा खाओ यूरिक एसिड कम करो और एक दूसरा उदाहरण खाना जब खाना सड़ता है, तो यूरिक एसिड जैसा ही एक दूसरा विष बनता है जिसको हम कहते हे LDL (Low Density lipoprotive) माने खराब कोलेस्ट्रोल (cholesterol) ।

              जब आप ब्लड प्रेशर(BP) चेक कराने डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो आपको कहता है (HIGH BP) हाई-बीपी है आप पूछोगे... कारण बताओ.? तो वो कहेगा कोलेस्ट्रोल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है, आप ज्यादा पूछोगे की कोलेस्ट्रोल कौनसा बहुत है ? तो वो आपको कहेगा LDL बहुत है  । इससे भी ज्यादा खतरनाक एक  विष है वो है.... VLDL (Very Low Density Lipoprotive)

             ये भी कोलेस्ट्रॉल जेसा ही विष है, अगर VLDL बहुत बढ़ गया तो आपको भगवान भी नहीं बचा सकता । खाना सड़ने पर और जो जहर बनते है उसमे एक ओर विष है जिसको अंग्रेजी मे हम कहते है triglycerides.! जब भी डॉक्टर आपको कहे की आपका "triglycerides" बढ़ा हुआ हे तो समज लीजिए की आपके शरीर मे विष निर्माण हो रहा है | तो कोई यूरिक एसिड के नाम से कहे, कोई कोलेस्ट्रोल के नाम से कहे, या फिर कोई LDL -VLDL के नाम से कहे समझ लीजिए की ये विष हैं और ऐसे विष 103 हैं, ये सभी विष तब बनते हैं, जब खाना पेट में सड़ता है ।

            मतलब समझ लीजिए किसी का कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे ध्यान आना चाहिए की खाना पच नहीं रहा है ,कोई कहता है मेरा triglycerides बहुत बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे डायग्नोसिस कर लीजिए आप, की आपका खाना पच नहीं रहा है ।

            कोई कहता है मेरा यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट लगना चाहिए समझने मे की खाना पच नहीं रहा है । क्योंकि खाना पचने पर इनमे से कोई भी जहर नहीं बनता.! खाना पचने पर जो बनता है वो है.... मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डिया, मल, मूत्र, अस्थि । और खाना नहीं पचने पर बनता है.... यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रोल, LDL-VLDL.  और यही आपके शरीर को रोगों का घर बनाते है । पेट मे बनने वाला यही जहर जब ज्यादा बढ़कर खून मे आते है ! तो खून दिल की नाड़ियो मे से निकल नहीं पाता और रोज थोड़ा थोड़ा कचरा जो खून मे आया है इकट्ठा होता रहता है और एक दिन नाड़ी को ब्लॉक कर देता है जिसे आप heart attack कहते हैं ।

            तो हमें जिंदगी मे ध्यान इस बात पर देना है की जो हम खा रहे हैं वो शरीर मे ठीक से पचना चाहिए और खाना ठीक से पचे, इसके लिए पेट मे ठीक से आग (जठराग्नि) प्रदीप्त होनी ही चाहिए । क्योंकि बिना आग के खाना पचता नहीं हे और खाना पकता भी नहीं है महत्व की बात खाने को खाना नहीं खाने को पचाना है । आपने क्या खाया कितना खाया वो महत्व नहीं है । महत्व इस बात का है कि खाना अच्छे से पचे ।

            इसके लिए वाग्भट्ट जी ने सूत्र दिया है,  "भोजनान्ते विषं वारी" (मतलब खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है) इसलिए खाने के तुरंत बाद पानी कभी न पिये । अब आपके मन मे सवाल आएगा कितनी देर तक नहीं पीना ? तो 1 घंटे 48 मिनट तक नहीं पीना । अब आप कहेंगे इसका क्या calculation हैं ? तो यह गणित ऐसा है कि जब हम खाना खाते हैं तो जठराग्नि द्वारा सब एक दूसरे मे मिक्स होता है और फिर खाना पेस्ट मे बदलता है । पेस्ट मे बदलने की क्रिया होने तक 1 घंटा 48 मिनट का समय लगता है ! उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है.! (बुझती तो नहीं लेकिन बहुत धीमी हो जाती है) पेस्ट बनने के बाद शरीर मे रस बनने की प्रक्रिया शुरू होती है । तब हमारे शरीर को पानी की जरूरत होती है और तब आप जितनी इच्छा हो उतना पानी पिएं ।

            जो बहुत मेहनती लोग है जैसे (खेत मे हल चलाने वाले, रिक्शा खीचने वाले, पत्थर तोड़ने वाले) उनके जठर में 1 घंटे के बाद ही रस बनने लगता है इसलिये उन्हें  एक घंटे बाद पानी पीना चाहिए ! अब आप कहेंगे खाना खाने के पहले कितने मिनट तक पानी पी सकते हैं । तो खाना खाने के 30 से 45 मिनट पहले तक आप पानी पी सकते हैं ! अब आप पूछेंगे यहाँ के  मिनट का calculation....?

            तो समझें... ऐसे ही जब भी हम पानी पीते हैं तो वो शरीर के प्रत्येक अंग तक जाता है  और अगर बच जाये तो 45 मिनट बाद मूत्र पिंड तक पहुंचता है  तो  पानी  पीने से मूत्र पिंड तक आने का समय 45 मिनट का है ।  तो आप खाना खाने से 30 से 45 मिनट पहले ही पाने पिये । इसका जरूर पालन करें और इस जानकारी को बेहतर स्वास्थ्य हेतु अधिक से अधिक लोगो को बताएं ।

Dr. Komal agrawal Nagpur
 




शुक्रवार, 8 जुलाई 2016

ह्रदयाघात... Sudden Cardiac Arrest !


             
            आज की पोस्ट सिर्फ पोस्ट नहीं, बल्कि एक ऐसी जानकारी है जिसे हम सबको जानना और समझना चाहिए। 

            आपने खबर पढ़ी होगी कि कुछ समय पहले उत्तराखंड के एक आईएएस अधिकारी नोएडा के मॉल में अपनी पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ खाना खा रहे थे, तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनकी मृत्यु हो गई । 39 साल के इस आईएएस अधिकारी का नाम था- अक्षत गुप्ता । ये उधमसिंह नगर में कलेक्टर थे । इनकी पत्नी भी आईपीएस अधिकारी हैं और ये परिवार उत्तराखंड से नोएडा घूमने-फिरने के ख्याल से आया था । यह बताने के लिए आज मैं पोस्ट नहीं लिख रहा कि वो कितने लोकप्रिय अधिकारी थे, कितनी मेहनत करके वो आई.ए.एस. अधिकारी बने थे,  या उनके दोनों बच्चे कितने छोटे हैं ।  मैं आज सिर्फ आगाह करने के लिए पोस्ट लिख रहा हूं कि उस अधिकारी के साथ अचानक जो हुआ,  वो किसी के साथ कभी भी  कहीं भी  हो सकता है । 

            ऐसा जब भी होता है, पहले तो सामने वाले की समझ में नहीं आता कि अचानक हुआ क्या ? फिर अफरा-तफरी में जब हम मरीज़ को अस्पताल ले जाते हैं तो पता चलता है कि उसके प्राण-पखेरू उड़ चुके हैं । डॉक्टर कहता है यह अचानक दिल का दौरा पड़ने का मामला था ।

            तीन साल पहले अप्रैल का महीना था और मेरे छोटे भाई के साथ एकदम ऐसी ही घटना घटी थी । वो दफ्तर में बैठा था, अचानक उसकी तबियत बिगड़ी और उसकी मृत्यु हो गई । मैं पहले भी कई बार इस बारे में आपको बता चुका हूं फिर से बता रहा हूं कि जैसे ही मेरे भाई के साथ ऐसा हुआ, वहां मौजूद लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचा दिया था । पर क्योंकि ऐसा होने में पांच मिनट की देर भी बहुत देर होती है, इसलिए मेरा भाई नहीं बचा था ।

            डॉक्टर ने कह दिया कि अचानक दिल का दौरा पड़ा था । यह गलत रिपोर्ट थी । जब भी किसी के साथ ऐसा होता है, तो उसके साथ वाले अगर चाहें, अगर बीमारी को ठीक से समझें, तो बहुत मुमकिन है कि वो बच जाए । दुनिया में कई लोग बचे भी हैं । एक बार जयपुर से दिल्ली आते हुए मिड-वे पर एक लड़की के साथ बिल्कुल ऐसी ही घटना घटी थी और वहाँ मौजूद लोगों में कोई एक शख्स इस विषय को ठीक से समझा हुआ था, इसलिए वो लड़की उसके प्राथमिक उपचार से बच गई, तो आपको यकीन करना ही पड़ेगा । 

            दरअसल, जब अचानक किसी के साथ ऐसा होता है, तो वह दिल का दौरा नहीं होता । यह हृदयघात कहलाता है । हार्ट अटैक और हार्ट फेल में अंतर होता है । हार्ट अटैक दिल की बीमारी होती है, पर इस मामले में हार्ट फेल हो जाता है । इस बीमारी का नाम होता है ‘सडेन कार्डियक अरेस्ट’ Sudden Cardiac Arrest.

            मुझे नहीं पता कि हमारे देश के स्कूलों में इस तरह की चीजें क्यों नहीं पढ़ाई जातीं, पर विदेशों में इस बारे में लोगों को बचपन से ही खूब अागाह कर दिया जाता है ।

            सडेन कार्डियक अरेस्ट शब्द को आप गूगल पर टाइप करें और इस विषय में और जानकारी जुटाएं । इस जानकारी को सिर्फ अपने पास मत रखिए, उसे लोगों तक पहुंचाएं । इसका असली फायदा ही लोगों तक इस जानकारी का पहुंचने का है । सिर्फ आप इस बारे में जान कर अपना भला नहीं कर सकते ।

            कल्पना कीजिए कि जिस वक्त उस आईएएस अधिकारी के साथ उस रेस्त्रां में ये घटना घटी,  अगर किसी व्यक्ति को इस बीमारी के विषय में पता होता,  अगर खुद उनकी आई.पी.एस. पत्नी इस विषय में जानतीं, तो शायद वो अधिकारी बच जाता ।

            सडेन कार्डियक अरेस्ट कोई बीमारी नहीं है । यह हृदयाघात है । कभी भी किसी का भी दिल पल भर के लिए काम करना बंद कर देता है । ठीक वैसे ही, जैसे बिना किसी वज़ह के कई बार घर की बिजली का फ्यूज़ उड़ जाता है । यह भी शरीर का फ्यूज़ उड़ने की तरह है । 

            जब कभी किसी को हृदयाघात हो,  उसकी छाती पर ज़ोर से मारना चाहिए,  इतनी ज़ोर से कि चाहे पसलियां टूट जाएं, पर दिल की धड़कन दुबारा शुरू हो जाए । याद रहे, जितनी जल्दी आपकी समझ में ये बात आ जाएगी कि यह हृदयाघात है, उतनी संभावना सामने वाले के बचने की होती है । एक मिनट के बाद देर होनी शुरू हो जाती है । आपको बस इसे पहचानना है कि यह सडेन कार्डियक अरेस्ट है । 

            ऐसा जब भी हो,  आप पाएंगे कि मरीज की नब्ज रुक गई है । सांस भी रुक गई है । बस यहीं आपको डॉक्टर बुलाने से पहले प्राथमिक उपचार करने की ज़रूरत है । डॉक्टर को ख़बर करें, अस्पताल भी ले जाने की तैयारी करें, पर पहले उसकी छाती पर दोनों हाथों से जोर-जोर से मारें ताकि उसकी सांस लौट आए । ध्यान रहे, अगर सांस तुरंत लौट आती है, तो मरीज़ बच जाता है, वर्ना पाचं मिनट के बाद तो डॉक्टर भी हाथ खड़े कर लेगा और आप इसे ईश्वर का विधान मान कर मन मसोस कर रह जाएंगे । 

            अमेरिका में बहुत से लोगों के साथ ऐसा होता है । वहां दुकानों, मॉल्स में ऐसी मशीन रखी रहती है, जिससे दिल को जिलाने का काम लिया जाता है । बहुत से मरीज बच जाते हैं । वहां के लोगों को इस मशीन को चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है । हमारे यहां डॉ. के. के. अग्रवाल इस बीमारी को लेकर  लोगों को काफी सतर्क करते हैं । वो बताते हैं कि जब भी ऐसा हो, फटाफट सावित्री आसन के ज़रिए मरीज को पहले बचाने की कोशिश करें । याद है न सावित्री और सत्यवान की कहानी....

            सत्यवान को अचानक ऐसा ही हृदयघात हुआ था और सावित्री उसकी छाती पर सिर पटक-पटक कर यमराज से अपने पति की जान लौटाने की गुहार लगा रही थी । उसने उसकी छाती पर इस कदर सिर पटका कि दिल की धड़कन दुबारा शुरू हो गई, और कहा गया कि सावित्री यमराज से अपने मर चुके पति की जान वापस ले आई । 

            मुझे लगता है कि यह कहानी सच्ची होगी, पर जान लौटी होगी उसके पति के थम चुके दिल पर बार-बार हुए प्रहार से । इसीलिए इसके प्राथमिक उपचार को नाम दिया गया है, सावित्री आसन । यानी जब भी आपके आसपास कहीं ऐसा हो, आपको पहली कोशिश करनी है उसकी छाती के बीच दोनों हाथों से तेज प्रहार करने की । 

            मुझे लगता है कि उस अधिकारी को अस्पताल ले जाने से पहले इस तरह का प्राथमिक उपचार हुआ होता तो वो बच जाता । अगर ऐसा ही फिल्मी कलाकार संजीव कुमार के साथ हुआ होता तो वो भी बच जाते । शफी ईनामदार, अमज़द खान भी हृदयाघात से ही मरे थे । उन्हें भी प्राथमिक उपचार मिला होता तो वो आज ज़िंदा होते । पुणें के अपने दफ्तर में बैठा संजय सिन्हा का भाई भी आज ज़िंदा होता, अगर लोगों ने पहले मुझे दिल्ली फोन करने की जगह प्राथमिक उपचार किया होता । अगर लोग गाड़ी ढूंढ कर अस्पताल ले जाने की जगह पहले सावित्री आसन की विद्या को प्रयोग में लाए होते तो शायद मेरा छोटा भाई मेरे पास होता ।

काश !  काश !  काश ! 

            ज़िंदगी में बहुत से काश से आप बच सकते हैं, अगर आप किसी विषय की तह में जाकर उसे समझने की कोशिश करेंगे, अगर आप बीमारी को ठीक से समझने की कोशिश करेंगे । ईश्वरीय विधान से ऊपर कुछ नहीं ।  पर आदमी को कोशिश तो करनी ही चाहिए । 

            मैं तो इतना ही कह सकता हूं कि हमारी सरकार को शिक्षा पाठ्यक्रम में इन विषयों को शामिल करना चाहिए और इन्हें ज़रूर पढ़ाना चाहिए,  ताकि आदमी जीना सीख सके ।

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मंगलवार, 5 जुलाई 2016

नहाने का वैज्ञानिक तरीका...


            अपने स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन के लिये विशेष ध्यान दें...!

            क्या आपने कभी अपने आस पास ध्यान से देखा या सुना है कि नहाते समय बुजुर्ग को लकवा लग गया ?

            दिमाग की नस फट गई ( ब्रेन हेमरेज)  हार्ट अटैक आ गया ।

            छोटे बच्चे को नहलाते समय वो बहुत कांपता रहता है, डरता है और माता समझती है की नहाने से डर रहा है ।

           लेकिन ऐसा नहीँ है; असल मे ये सब गलत तरीके से नहाने से होता है ।

            दरअसल हमारे शरीर में गुप्त विद्युत् शक्ति रुधिर (खून) के निरंतर प्रवाह के कारण पैदा होते रहती है, जिसकी स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक दिशा ऊपर से आरम्भ होकर नीचे पैरो की तरफ आती है ।

            सर में बहुत महीन रक्त् नालिकाये होती है जो दिमाग को रक्त पहुँचाती है ।

            यदि कोई व्यक्ति निरंतर सीधे सर में ठंडा पानी डालकर नहाता है तो ये नलिकाएं सिकुड़ने या रक्त के थक्के जमने लग जाते हैं और जब शरीर इनको सहन नहीं कर पाता तो ऊपर लिखी घटनाएं वर्षो बीतने के बाद बुजुर्गो के साथ हो जाती हैं ।

            सर पर सीधे पानी डालने से हमारा सर ठंडा होने लगता है, जिससे हृदय को सिर की तरफ ज्यादा तेजी से रक्त भेजना पड़ता है, जिससे या तो बुजुर्ग में हार्ट अटैक या दिमाग की नस फटने की अवस्था हो सकती है ।

            ठीक इसी तरह बच्चे का नियंत्रण तंत्र भी तुरंत प्रतिक्रिया देता है जिससे बच्चे के काम्पने से शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है, और माँ समझती है की बच्चा डर रहा है ।

            गलत तरीके से नहाने से बच्चे की हृदय की धड़कन अत्यधिक बढ़ जाती है स्वयं परीक्षण करिये ।
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            तो आईये हम आपको नहाने का सबसे सही तरीका बताते है ।

            बाथरूम में आराम से बैठकर या खड़े होकर सबसे पहले पैर के पंजो पर पानी डालिये, रगड़िये, फिर पिंडलियों पर, फिर घुटनो पर, फिर जांघो पर पानी डालिये और हाथों से मालिश करिये । फिर हाथो से पानी लेकर पेट को रगड़िये, फिर कंधो पर पानी डालिये, फिर अंजुली में पानी लेकर मुँह पर मलिए ।  हाथों से पानी लेकर सर पर मलिए ।

            इसके बाद शॉवर के नीचे खड़े होकर या बाल्टी सर पर उड़ेलकर नहा सकते हैं ।

            इस प्रक्रिया में केवल 1 मिनट लगता है लेकिन इससे आपके जीवन की रक्षा होती है, और इस 1 मिनट में शरीर की विद्युत प्राकृतिक दिशा में ऊपर से नीचे ही बहती रहती है क्योंकि विद्युत् को आकर्षित करने वाला पानी सबसे पहले पैरो पर डाला गया है ।

            बच्चे को इसी तरीके से नहलाने पर वो बिलकुल कांपता डरता नहीं है।

            कृपया इस जानकारी को आगे भी बढावें, यह छोटे बच्चों ,बुज़ुर्गों के लिये विशेष उपयोगी है ।

सोमवार, 4 जुलाई 2016

R.O. के जल का लगातार सेवन बन सकता है मृत्यु का कारण:--


            चिलचिलाती गर्मी में कुछ मिले  या ना मिले पर शरीर को पानी जरूर मिलना चाहिए ।  अगर पानी RO का हो तो, क्या बात है !  परंतु क्या वास्तव में हम RO  के पानी को शुद्ध पानी मान सकते हैं  ?

            जवाब आता है बिल्कुल नहीं । और यह जवाब विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) की तरफ से दिया गया है ।

            विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि इसके लगातार सेवन से हृदय संबंधी विकार, थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन, सरदर्द आदि दुष्प्रभाव पाए गए हैं । यह कई शोधों के बाद पता चला है कि इसकी वजह से कैल्शियम और  मैग्नीशियम पानी से पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं जो कि शारीरिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है ।

            RO के पानी के लगातार इस्तेमाल से शरीर मे विटामीन B-12 की कमी भी होने लगती है ।

            वैज्ञानिकों के अनुसार मानव शरीर 500 टीडीएस तक सहन करने की क्षमता रखता है परंतु RO में 18 से 25 टीडीएस तक पानी की शुद्धता होती है जो कि नुकसानदायक है । इसके विकल्प में क्लोरीन को रखा जा सकता है जिसमें लागत भी कम होती है एवं पानी के आवश्यक तत्व भी सुरक्षित रहते हैं । जिससे मानव का शारीरिक विकास अवरूद्ध नहीं होता ।

            जहां एक तरफ एशिया और यूरोप के कई देश RO पर प्रतिबंध लगा चुके हैं वहीं भारत में RO की मांग लगातार बढ़ती जा रही है  और कई विदेशी कंपनियों ने यहां पर अपना बड़ा बाजार बना लिया है । स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना और जागरूक करना ज़रूरी हैं । अतः अब शुद्ध पानी के लिए नए अविष्कारों की जरूरत है ।

            याद रखें की लम्बे समय तक RO  का पानी, लगातार पीने से, शरीर कमजोर और बिमारीयों का घर बन जाता है । अत: प्राकृतिक (खनीज युक्त) पानी परंपरागत तरीकों से साफ कर के पीना, हितकर है।
 

रविवार, 3 जुलाई 2016

"प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली"



पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात,
सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात !

धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार,
दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार !

ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर,
कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर !

प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप,
बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप !

ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार,
करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाढार !

भोजन करें धरती पर, अल्थी पल्थी मार,
चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार !

प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस,
सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश !

दही उडद की दाल सँग, पपीता दूध के संग,
जो खाएं इक साथ में, जीवन हो बदरंग !

प्रातः दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार,
तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार ! 

भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार,
डाक्टर, ओझा, वैद्य का, लुट जाए व्यापार  !

देश,भेष,मौसम यथा, हो जैसा परिवेश,
वैसा भोजन कीजिये, कहते सखा सुरेश !

इन बातों को मान कर, जो करता उत्कर्ष,
जीवन में पग-पग मिले, उस प्राणी को हर्ष !

घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर,
एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर !

अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास,
पानी पीजै बैठकर, कभी न आवें पास !

रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय,
सौगंध राम की खाइ के, तुरत छोड दो चाय !

सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश,
भोजन लीजै रात में, जैसे रंक सुरेश !
               
देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल,
अपच,आंख के रोग सँग, तन भी रहे निढाल !

टूथपेस्ट-ब्रश छोडकर, हर दिन दोनो जून,
दांत करें मजबूत यदि, करिएगा दातून !

हल्दी तुरत लगाइए, अगर काट ले श्वान,
खतम करे ये जहर को, कह गए कवि सुजान !

मिश्री, गुड, खांड, ये हैं गुण की खान,
पर सफेद शक्कर सखा, समझो जहर समान !

चुंबक का उपयोग कर, ये है दवा सटीक,
हड्डी टूटी हो अगर, अल्प समय में ठीक !

दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ,
बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ !

हँसना, रोना, छींकना, भूख, प्यास या प्यार,
क्रोध, जम्हाई रोकना, समझो बंटाढार !

सत्तर रोगों को करे, चूना हमसे दूर,
दूर करे ये बाझपन, सुस्ती अपच हुजूर !

यदि सरसों के तेल में, पग नाखून डुबाय,
खुजली, लाली, जलन सब, नैनों से गुमि जाय !

भोजन करके जोहिए, केवल घंटा डेढ,
पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड !

जो भोजन के साथ ही, पीता रहता नीर,
रोग एक सौ तीन हों, फुट जाए तकदीर !

पानी करके गुनगुना, मेथी देव भिगाय,
सुबह चबाकर नीर पी, रक्तचाप सुधराय !

अलसी, तिल, नारियल, घी, सरसों का तेल,
यही खाइए नहीं तो, हार्ट समझिए फेल !

पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सु जान,
श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान !

तेल वनस्पति खाइके, चर्बी लियो बढाइ,
घेरा कोलेस्टरॉल तो, आज रहे चिल्लाय !
  
अल्यूमिन के पात्र का, करता  जो उपयोग,
आमंत्रित करता सदा, वह अडतालीस रोग !

फल या मीठा खाइके, तुरत न पीजै नीर,
ये सब छोटी आंत में, बनते विषधर तीर !

चोकर खाने से सदा, बढती तन की शक्ति,
गेहूँ मोटा पीसिए, दिल में बढे विरक्ति !

नींबू पानी का सदा, करता जो उपयोग,
पास नहीं आते कभी, यकृति-आंत के रोग !

दूषित पानी जो पिए, बिगडे उसका पेट,
ऐसे जल को समझिए, सौ रोगों का गेट !

रोज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय,
बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय !

भोजन करके खाइए, सौंफ,  गुड, अजवान,
पत्थर भी पच जायगा, जानै सकल जहान !

लौकी का रस पीजिए, चोकर युक्त पिसान,
तुलसी, गुड, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान !

हृदय रोग, खांसी और आंव करें बदनाम,
दो अनार खाएं सदा, बनते बिगडे काम !

चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खावे,
ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगावे !

सौ वर्षों तक वह जिए, लेत नाक से सांस,
अल्पकाल जीवें, करें, मुंह से श्वासोच्छ्वास !

सितम, गर्म जल से कभी, करिये मत स्नान,
घट जाता है आत्मबल, नैनन को नुकसान !

हृदय रोग से आपको, बचना है श्रीमान,
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान !

अगर नहावें गरम जल, तन-मन हो कमजोर,
नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुंओर !

तुलसी का पत्ता करें, यदि हरदम उपयोग,
मिट जाते हर उम्र में, तन के सारे रोग !


गुरुवार, 23 जून 2016

असहायों का एक सहारा...


            राजस्थान मे उदयपुर शहर से 20 कि.मी. दूर उमरड़ा एक गांव है वहां पर एक पैसिफिक नाम का हॉस्पिटल है । यहां हर तरह की बिमारी का निःशुल्क ईलाज व आपरेशन किया जा रहा है, चाहे इलाज दस लाख रूपये तक का ही क्यों ना हो, पुर्णतः निःशुल्क है । वहां मरीज के साथ मरीज कि देखभाल करने वालों के रहने व खाने-पीने की व्यवस्था भी निःशुल्क है ।

            कृपया आपके पास जितने भी माध्यम हों उनके द्वारा इस जानकारी को शेअर कर प्रसारित करें जिससे की सभी बिमार भाई-बहनों को  सही व निःशुल्क इलाज का भरपुर फायदा मिल सके । अधिक जानकारी के लिये इस 8384969595 वाटसप नम्बर पर श्री महेश्वर सुखवाल से सम्पर्क करें । 

            सभी को जानकारी देना ये भी एक बहुत बड़ा धर्म का कार्य है कृपया इस धर्म के कार्य को करके पुण्य कमाये ।

            राजस्थान के उदयपुर शहर के इस पेसिफिक हॉस्पिटल मे हर  तरह कि बिमारी का निःशुल्क इलाज व आपरेशन किया जा रहा है । अधिक से अधिक बिमार भाई बहन इस सुविधा का लाभ लेवें । वहां एक रूपये से एक करोड़ रूपये तक का इलाज व सभी प्रकार के आपरेशन भी पूर्णतः निःशुल्क हैं ।

            पेसिफिक इंस्टीट्युट आफ मेडिकल सांईसेज

            {मेडिकल काउन्सिल आफ इण्डिया के द्वारा मान्यता प्राप्त}

            विश्व प्रसिद्ध चिकित्सकों द्वारा अन्तराष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा सेवाएँ

            अम्बुआ रोड़, गांव उमरड़ा, तहसील गिर्वा, उदयपुर 313015 (राजस्थान)

            भर्ती, जांच, चिकित्सा, आपरेशन, जेनेरिक दवाईंयाँ निशुल्क उपलब्ध हैं ।

            *आधुनिकतम उपकरण *विश्वनिय जाँच *दवाईंया निशुल्क *सभी आपरेशन निशुल्क *सभी तरह कि जाँचे निशुल्क ।

            निशुल्क सुविधाएँ:
            *ओपीडी   *चिकित्सा सुविधा   *वार्ड/आंतरिक सुविधा   *माईनर /मेजर ओटी   *फिजियोथेरेपी   *प्रयोगशालाएं   *ईसिजी सेवाएँ व   *फार्मेसी सेवाएँ ।

            24 घण्टे इमरजेन्सी सेवाएँ,  प्रतिदिन 8 से 10 आपरेशन  (रविवार छोड़कर)

            हॉस्पिटल के सम्पर्क नम्बर
            09352054115,  09352011351,  09352011352

            इस जानकारी का अधिकतम प्रसार करके भी असिम पुण्यों की प्राप्ति करें ।


सोर्स : जानकारी - WhatsApp.      चित्र सौजन्य : Google  

    

शनिवार, 18 जून 2016

फल, मेवे, सब्जियां व अनाज और उनके गुणधर्म.

1.   केला:
       ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है, हड्डियों को मजबूत बनाता है,  हृदय की सुरक्षा करता है, अतिसार में लाभदायक है, खांसी में हितकारी है।
2.  जामुन: 
        केन्सर की रोक थाम, हृदय की सुरक्षा,कब्ज मिटाता है, स्मरण शक्ति बढाता है, रक्त शर्करा नियंत्रित करता है । डायबिटीज में अति लाभदायक ।
3.  सेवफ़ल:
      हृदय की सुरक्षा करता है, दस्त रोकता है, कब्ज में फ़ायदेमंद है, फ़ेफ़डों की शक्ति बढाता है.
4.  चुकंदर:
       वजन घटाता है, ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है, अस्थिक्षरण रोकता है, केंसर के विरुद्ध लडता है, हृदय की सुरक्षा करता है ।
5.  पत्ता गोभी:
        बवासीर में हितकारी है, हृदय रोगों में लाभदायक है, कब्ज मिटाता है, वजन घटाने  में सहायक है ।  केंसर में फ़ायदेमंद है।
6.  गाजर:
        नेत्र ज्योति वर्धक,  केंसर प्रतिरोधक,  वजन घटाने मेँ सहायक है, कब्ज मिटाता है,  हृदय की सुरक्षा करता है ।
 7. फ़ूल गोभी:
        हड्डियों को मजबूत बनाता है, स्तन केंसर से बचाव करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के केंसर में भी उपयोगी है, चोंट-खरोंच ठीक करता है ।
8.  लहसुन:
        कोलेस्टरॉल घटाती है,  रक्तचाप घटाती है, कीटाणुनाशक है, केंसर से लडती  है  ।
9.  नींबू:
        त्वचा को मुलायम बनाता है,  केंसर अवरोधक है,  हृदय की सुरक्षा करता  है,  ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है,  स्कर्वी रोग नाशक है ।
10.अंगूर:
        रक्त प्रवाह वर्धक है,  हृदय की सुरक्षा करता है,  केंसर से लडता है,  गुर्दे की पथरी नष्ट करता है,  नेत्र ज्योति वर्धक है ।
11.  आम:
        केंसर से बचाव करता है, थायराईड रोग में हितकारी है, पाचन शक्ति बढाता है, याददाश्त की कमजोरी में हितकर है ।
12.  प्याज:
        फ़ंगस रोधी गुण हैं,  हार्ट अटेक की रिस्क को कम करता है । जीवाणु नाशक है, केंसर विरोधी है और खराब कोलेस्टरोल को घटाता है।
14.  अलसी के बीज:
        मानसिक शक्ति वर्धक है,  रोग प्रतिकारक शक्ति को ताकत देता है, डायबिटीज में उपकारी है,  हृदय की सुरक्षा करता है,  पाचन शक्ति को ठीक करता है।
15.  संतरा:
        हृदय की सुरक्षा करता है,  रोग प्रतिकारक शक्ति उन्नत करता है, श्वसन पथ के विकारों में लाभकारी है, केंसर में हितकारी है ।

 16.  टमाटर:
        कोलेस्टरॉल कम करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के स्वास्थ्य के लिये उपकारी है, केंसर से बचाव करता है,  हृदय की सुरक्षा   ।
17.  पानी:
        गुर्दे की पथरी नाशक है,  वजन  घटाने में सहायक है,  केंसर के विरुद्ध लडता है,  त्वचा के चमक बढाता है ।
18.  अखरोट:
        मूड उन्नत करन में सहायक है,  मेमोरी  पावर बढाता है, केंसर से लड सकता है,  हृदय रोगों से बचाव करता है,  कोलेस्टरोल घटाने मं मददगार है।
19.  तरबूज:
        स्ट्रोक रोकने में उपयोगी है, प्रोस्टेट के स्वास्थ्य के लिये हितकारी है, रक्तचाप घटाता है,  वजन कम करने में सहायक है ।
20.  अंकुरित गेहूं:
        बडी आंत के केंसर से लडता है, कब्ज प्रतिकारक है, स्ट्रोक से रक्षा करता है,  कोलेस्टरोल कम करता है,  पाचन सुधारता है।
21.  चावल:
        किडनी स्टोन में हितकारी है,  डायबीटीज में लाभदायक है, स्ट्रोक से बचाव करता है, केंसर से लडता है,  हृदय की सुरक्षा करता है ।
22.  आलू बुखारा:
        हृदय रोगों से बचाव करता है,  बुढापा जल्द आने से रोकता है, याददाश्त बढाता है, कोलेस्टरोल घटाता है, कब्ज प्रतिकारक है।
23.  पाईनएपल:
        अतिसार (दस्त) रोकता है,  वार्ट्स (मस्से)  ठीक करता है,  सर्दी,ठंड से बचाव करता है, अस्थिक्षरण रोकता है ।  पाचन सुधारता है ।

24.  जौ, जई:
        कोलेस्टरोल घटाता है, केंसर से लडता है,  डायबिटीज में उपकारी है, कब्ज प्रतिकारक्  है,  त्वचा पर शाईनिंग लाता है।
25.  अंजीर:
        रक्तचाप नियंत्रित करता है, स्ट्रोक्स से बचाता है,  कोलेस्टरोल कम करता है,  केंसर से लडता है, वजन घटाने में सहायक है।
26.  शकरकंद:
        आंखों की रोशनी बढाता है, मूड उन्नत करता है,  हड्डिया बलवान बनाता है,  केंसर से लडता है ।




एक श्रेष्ठ ऊर्जा संवाहक - कोलेस्ट्रम


              स्तनधारी जीवों में माँ के पहले दूध को कोलस्ट्रम कहते हैं । कोलस्ट्रम को जीवन का पहला 'सुपर फ़ूड' भी कहा जाता है । हम सब जानते हैं कि माँ का पहला दूध बच्चे के लिए कितना जरुरी होता है । यह जीवन भर उस बच्चे को रोगों से लड़ने की ताकत देता है, और  उसके शारीरिक और मानसिक विकास की पहली सीढ़ी होता है ।

           शायद यह किसी चमत्कार से कम नहीं की एक जीव का कोलस्ट्रम अन्य प्रजाति के जीव भी ग्रहण कर सकते हैं ।  भारत में सालों से गाय से प्राप्त किये कोलस्ट्रम को ग्रहण किया जाता रहा है । गाय के कोलस्ट्रम को सभी जीव ग्रहण कर सकते हैं ।  इसे गौ पियूष भी कहा जाता है ।  गौ पियूष की संरचना मानव कोलस्ट्रम के सर्वाधिक करीब है ।  

            कोलस्ट्रम में यह सब पाए जाते हैं :- सभी जरुरी फैट्स, सभी जरुरी एमिनो एसिड्स, ८० से ज्यादा विकास के लिए जरुरी तत्व,  ९० से ज्यादा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तत्व.

           हमारे देश में उपलब्ध वेस्टिज कोलस्ट्रम गौ पियूष  बछड़े के जन्म के ६ घंटे के भीतर इकट्टा किया जाता है ।  इसके कुछ फायदे :-

            यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है ।

          रोगप्रतिरोधक क्षमता : कैंसर, डायबिटीज, एलर्जी, इंफेक्शन्स, ऑटो इम्यून रोग, त्वचा के रोग और बढ़ती उम्र के लक्षण यह सभी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण हो सकते हैं ।  जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है, वह इन रोगों से मुक्त रहते हैं । कोलोस्ट्रम रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपलब्ध आहार पूरकों में सर्वश्रेष्ठ श्रेणी में आता है । 

            ज्यादातर सुक्ष्म जीवों पर अब एंटीबायोटिक्स का असर नहीं होता है । समय के साथ इन जीवाणुओं ने उपलब्ध एंटीबायोटिक्स के खिलाफ रेजिस्टेंस डेवेलोप कर लिया है ।  ऐसी स्थिति में कोलोस्ट्रम शरीर को प्राकृतिक रूप से सशक्त बनाता है ।  कई शोधों में कोलोस्ट्रम को वैक्सीन से ३ गुना ज्यादा प्रभावी पाया गया है ।  कुछ समय पहले स्वाइन फ्लू के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी कोलेस्ट्रम के इस्तेमाल की ख़बरों को आपने सुना होगा ।

          गाय से प्राप्त कोलोस्ट्रम इकलौता ऐसा पदार्थ है जो सूक्ष्म जीवी वायरस को भी समाप्त कर सकता है । 

            यह दांतों और हड्डियों की सेहत में बहुत लाभकारी है ।

           खिलाडियों और बॉडी बिल्डिंग में रूचि रखने वालों के लिए इससे अच्छा आहार पूरक नहीं हो सकता । इसे स्टेरॉइड्स से ज्यादा कारगर पाया गया है ।  यह मांसपेशियों के विकास में सहायक है और खेलों में होने वाली छोटी-मोटी चोटों का तेजी से समाधान कर देता है । धावकों और खिलाडियों द्वारा विश्वभर में इसका इस्तेमाल किया जाता है । यह उत्तकों की मरम्मत करता है, फैट को बर्न करता है, मेटाबोलिज्म को बढ़ता है और इसके साथ ही यह शारीरिक ताकत को बढाने का एक अभूतपूर्व स्त्रोत है।   (ऑस्ट्रेलियान शोध ) 

          एंटी एजिंग :- हमारा शरीर एक उम्र तक ही  'ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन' का उत्पादन करता है । बढ़ती उम्र के साथ इसका उत्पादन कम होता जाता है ।  यह हार्मोन एक एंटी एजिंग हार्मोन है ।  कोलोस्ट्रम प्राकृतिक तरीके से  'ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन'  के उत्पादन को बनाए रखता है ।

             नीचे शारीरिक रोगों की वह सूचि दी गई है, जिनमे कोलोस्ट्रम उपयोगी सिद्ध हुआ है  :- 

            कैंसर, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर लेवल, बोन डेंसिटी, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, शारीरिक क्षमता,  फ्लू की रोकथाम, हृदय की सेहत, लिकी गट सिंड्रोम,  जोड़ों का दर्द, मोटापा कम करना, आर्थराइटिस, अस्थमा, एच आई वी, अलसर, वायरल इन्फेक्शन, आँतों से जुडी समस्याओं आदि ।

            अतिरिक्त आहार पूरक के रुप में इसे लेने और इसकी मदद से अपनी शारीरिक कमजोरी व उपर वर्णित इन सभी रोगों से बचाव की ईच्छा रखने वाले सभी पाठक उपर वर्णित वेस्टीज कोलेस्ट्रम केप्सूल के रुप में इसे खरीदकर अपनी इन शारीरिक कमजोरी व रोगमुक्ति की दिशा में सकारात्मक पहल कर सकते हैं । अधिक आसान उपलब्धि के लिये ब्लाग लेखक - सुशील बाकलीवाल से मोबाईल संपर्क नंबर +91 91799 10646 पर भी सम्पर्क कर सकते हैं ।

 

फ्रीज़ किए गए नींबू के आश्चर्यजनक परिणाम


            सबसे पहले नींबू को धोकर फ्रीज़र में रखिए । ८ से १० घंटे बाद वह बर्फ़ जैसा ठंडा तथा कड़ा हो जाएगा । अब उपयोग मे लाने के लिए उसे कद्दूकस कर लें ।

            इसे आप जो भी खाएँ उस पर डाल कर इसे खा सकते हैं ।

            इससे खाद्य पदार्थ में एक अलग ही टेस्ट आऐगा ।

            नीबू के रस में विटामिन सी होता है। ये आप जानते हैं

            आइये देखें इसके और क्या-क्या फायदे हैं ।

            नीबू के छिलके में ५ से १० गुना अधिक विटामिन सी होता है और वही हम फेंक देते हैं ।

            नींबू के छिलके में शरीर कॆ सभी विषेले द्रव्यों को बाहर निकालने कि क्षमता होती है ।

            नींबू का छिलका कैंसर का नाश करता है । इसका छिलका कैमोथेरेपी से १०,००० गुना ज्यादा प्रभावी है ।

            यह बैक्टेरियल इन्फेक्शन, फंगस आदि पर भी प्रभावी है ।

            नींबू का रस विशेषत: छिलका,  रक्तदाब तथा मानसिक दबाव को नियंत्रित करता है ।

            नींबू का छिलका १२ से ज्यादा प्रकार के कैंसर में पूर्ण प्रभावी है और वो भी बिना किसी साईड इफेक्ट के । 

            इसलिये आप अच्छे पके हुए तथा स्वच्छ नींबू फ्रीज़र में रखें और कद्दूकस कर प्रतिदिन अपने आहार के साथ प्रयोग करें ।    
                         
-डॉ विकास बाबा आमटे
आनंदवन, वरोरा, महाराष्ट्र


रविवार, 12 जून 2016

कामशक्ति वर्द्धक योग -


            पिछले कुछ समय में कुछ जानकारी इस ब्लॉग पर इसके नियमित पाठकों ने प्रतिस्पर्धा व तनावों से बढते जीवनक्रम में यौनेच्छा में कमी और उसके कारण संतानोत्पत्ति के मार्ग में आ रही बाधाओं को दूर कर सकने योग्य जानकारी व्यक्तिगत अथवा ब्लॉग माध्यम से जानने की ईच्छा जाहिर करते हुए हमारे ई-मेल पर मांगी है । चूंकि यह स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों का ब्लॉग है और ऐसी जानकारी भी स्वास्थ्य के एक अनिवार्य स्तंभ के रुप में ही आती है, अतः इस पोस्ट के माध्यम से हम अपने पास उपलब्ध संबंधित जानकारी को इस माध्यम पर प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं । उम्मीद है कि ऐसे सभी पाठक जो इससे मिलती-जुलती समस्याओं की गिरफ्त में रहे हैं वे इसके द्वारा लाभ लेते हुए स्वयं को अथवा अपने निकटतम परिजन को समस्यामुक्त करवा सकने का प्रयास कर सकेंगे ।

            वैसे तो गुणवान संतान और कामसुख की कामना से वाजीकरण हेतु प्रयुक्त आयुर्वेदिक नुस्खों का प्रयोग कुशल चिकित्सक के निर्देशन में किया जाना ही उपयुक्त होता है । किंतु कुछ जानी-पहचानी आयुर्वेदिक औषधियां जिनके प्रयोग से शरीर को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान हुए बगैर न सिर्फ वाजीकारक बल्कि अन्य प्रकार के स्वास्थ्यलाभ भी प्राप्त होते हैं उनका उल्लेख हम यहाँ करने का प्रयास कर रहे हैं ।  व्यवहारिक तौर पर भी ये औषधियां वाजीकारक (शरीर को अश्वशक्ति प्रदान करने वाली) होने के साथ ही शरीर में मेधा, ओज, बल को बढाते हुए तनाव को कम कर सकने का गुण स्वयं में संजोये रखती हैं ।

            काम की प्रबल और सम्मोहक शक्ति को देखकर ही इसे देवता भी कहा गया है । आज की व्यस्ततम जीवनशैली, तनावभरी दिनचर्या और भौतिक सुख सुविधायें जुटाने की लालसा ने इस पवित्र कर्म के मूल में निहित भाव एवं उद्देश्य को समाप्त कर दिया है । काम आज दाम्पत्य जीवन की औपचारिकता भर रह गया है, इन्ही कारणों से यौन संबंधों को लेकर असंतुष्ट युगलों की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है, ऐसी स्थिति में आयुर्वेद एवं आयुर्वेदिक औषधियां मददगार हो सकती है जिनका प्रयोग वैद्यकीय निरीक्षण में अथवा प्रायोगिक तौर पर अल्प मात्रा से शुरु होते हुए नियंत्रित अनुपात में होना चाहिए-

            1.  असगंध, विधारा, शतावर, सफ़ेद मूसली, तालमखाना बीज व  कौंच बीज प्रत्येक 50-50 ग्राम की मात्रा में लेकर दरदरा कर कपडे से छान लें तथा इसमे 350 ग्राम मिश्री भी पीसकर मिला लें, इस नुस्खे को 5-10 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम ठन्डे दूध से लें, लगातार एक माह तक लेने से यौन सामर्थ्य में पर्याप्त वृद्धि अवश्य होगी ।

          2.  दालचीनी, अकरकरा, मुनक्का और श्वेतगुंजा को एक साथ पीसकर इन्द्रिय पर लेप करें तथा मिलाप के समय कपडे से इसे पोछ दें, यह योग इन्द्रियों में रक्त के संचरण को बढाकर स्तंभन व उत्तेजना दोनों ही स्थितियों को अधिक बेहतर बनाता है ।

            3. शुद्ध शिलाजीत 500 मिलीग्राम की मात्रा में ठन्डे दूध में घोलकर सुबह शाम पीने से भी लाभ मिलता है ।

             4. यदि किसी पुरुष को शीघ्रपतन की शिकायत हो तो धाय के फूल, मुलेठी, नागकेशर व बबूलफली इनको बराबर मात्रा में लेकर इसमें आधी मात्रा में मिश्री मिलाकर, इस योग को 5-5 ग्राम की मात्रा में लगातार एक माह तक सेवन करने पर शीघ्रपतन की लज्जाजनक स्थिति से छुटकारा पाने में पर्याप्त लाभ मिलता है ।

           5.  कामोत्तेजना को बढाने के लिए कौंचबीज चूर्ण, सफ़ेद मूसली, तालमखाना व अश्वगंधा चूर्ण को बराबर मात्रा में तैयार कर 10-10 ग्राम की मात्रा में ठन्डे दूध से सेवन करने पर शरीरबल में पर्याप्त वृद्धि का लाभ मिलता है ।

            ये चंद ऐसे नुस्खें हैं, जिनका प्रयोग यौनशक्ति, ऊर्जा एवं पुरुषार्थ को बढाने में सदैव मददगार सबित होता है । 

            मनुष्य के मस्तिष्क में सदैव दो तरह की बातें चलती रहती है, एक सकारात्मक तो दूसरी नकारात्मक । नकारात्मक सोच व्यक्ति के मन-मस्तिष्क पर हमेशा बुरा असर डालती हैं, जिसके कारण उसके उत्साह में कमी आती है । वहीं सकारात्मक सोच किसी भी कठिन कार्य को करने में उसे साहस प्रदान करती है, जिसके कारण उस व्यक्ति के मन-मस्तिष्क पर कोई प्रतिकूल प्रभाव प्रायः नहीं पड़ता ।

            हालांकि यदि अनुभवी बुजुर्गों के ज्ञान और आयुर्विज्ञान के अनुसार अपनी सेक्सुल पॉवर को बढ़ाने की बजाये
आप अपने को मानसिक रूप से तैयार कर अपनी शारीरिक ताकत के विकास की ओर ध्यान दें तो वैसे ही आपकी सेक्सुअल पॉवर अपने आप भी बढ़ जाएगी ।

            शारीरिक ताकत बढ़ाने के लिए आप नियमित रूप से लोकी, आंवला और एलोविरा जूस का सेवेन करें जो न सिर्फ आपकी इस ताकत को बल्कि आपके सर्वांग स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के श्रेष्ठ माध्यम साबित होंगे । 

            वैसे अकेला लौकी का जूस भी आपकी सेक्सुअल पॉवर को बढ़ाने में आपकी मदद करेगा, और उस पर यदि आप सामान्य शारीरिक कसरत यदि सप्ताह में चार-पांच दिन भी करते रह पाये तो यह स्थिति भी आपके लिये सोने पे सुहागे का काम करेगी ।
  


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