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सोमवार, 16 अप्रैल 2018

सभी के लिये सदैव उपयोगी "चूना "


          जी हाँ ! सामान्य चूना जो हम-आप पान में खाते हैं, उसमें शरीर की अनेकों  बिमारियों को ठीक कर सकने की सामर्थ्य होती है...!  हम अपने दैनंदिनी के उपयोग में इसका लाभ इस प्रकार से ले सकते हैं-

          चूने की डली का लगभग 100 ग्राम का एक टुकडा किसी मिट्टी के बर्तन मे डालकर चार गुना अधिक पानी से भर दें और उसे 24 घंटे रखा रहने दें, चूना गलकर नीचे और पानी ऊपर आ जायेगा ! यही चूना हमारे सामान्य उपयोग का होता है । आप इसे पनवाडी या किराना दुकान से बना-बनाया भी तलाश कर ला सकते हैं ।

          50 वर्ष की उम्र के बाद  कैल्शियम की कोई दवा शरीर मे जल्दी नही घुलती, किन्तु चूना तुरन्त घुल व पच जाता है ।

          यदि किसी को पीलिया रोग (जॉन्डिस) हो जाये तो  उसकी सबसे अच्छी दवा चूना ही है, गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से बहुत जल्दी पीलिया ठीक हो जाता है ।

          चूना नपुंसकता की भी सबसे निरापद दवा है - अगर किसी के शुक्राणु नही बनते तो उसको भी गन्ने के रस के साथ चूना लगातार पिलाया जाये तो  धीरे-धीरे शरीर में भरपूर शुक्राणु बनने लगेंगे और जिन माताओं के शरीर में अन्डे नही बनते उनकी भी बहुत अच्छी दवा है  इसी प्रकार से प्रयोग में लिया जाने वाला ये चूना ।

          विद्यार्थियों के लिए चूना बहुत अच्छा है जो न सिर्फ उनकी स्मरणशक्ति बल्कि लम्बाई भी बढाता है । गेहूँ के दाने के बराबर चूना रोज दही, दाल अथवा पानी में मिला कर लेते रहने से लम्बाई बढने के साथ-साथ उनकी स्मरण शक्ति भी बहुत अच्छी होती है ।

          जिन बच्चों की बुद्धि कम काम करती है, ऐसे मतिमंद बच्चों की भी सबसे अच्छी दवा है चूना,  जो बच्चे बुद्धि से कम है, जिनके दिमाग देर में काम करते है, देर में सोचते है, हर चीज जिनकी स्लो है उन सभी बच्चों को चूना खिलाने से उनकी बुद्धि का विकास निरन्तर सुधरता चला जायेगा ।

          बहनों को अपने मासिक धर्म के समय अगर कुछ भी तकलीफ होती हो तो उसकी सबसे अच्छी दवा है चूना । हमारे घर में जो माताएं है जिनकी उम्र पचास वर्ष हो गयी और उनका मासिक धर्म बंद हुआ उनकी सबसे अच्छी दवा है चूना । गेहूँ के दाने के बराबर चूना हर दिन खाना दाल में, लस्सी में,  नही तो पानी में घोल के पीना ।  जब कोई माँ गर्भावस्था में हो तो चूना रोज खाना चाहिए क्योंकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा केल्शियम की जरुरत होती है और चूना केल्शियम का सबसे बड़ा भंडार है । गर्भवती माँ को चूना खिलाना चाहिए ..अनार के रस में - एक कप रस में चूना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाके रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिये..तो चार फायदे होंगे -

          पहला फायदा - माँ को बच्चे के जन्म के समय कोई तकलीफ नही होगी और नॉर्मल डीलिवरी होगी ।

            दूसरा फायदा - बच्चा जो पैदा होगा वो बहुत हृष्ट-पुष्ट और तंदुरुस्त होगा ।

          तीसरा फ़ायदा - वह बच्चा शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होते रहने के कारण जल्दी बीमार नही पड़ेगा ।

          चौथा सबसे बड़ा लाभ -  बच्चा बहुत होशियार होता है, बहुत Intelligent और Brilliant होता है, उसका IQ बहुत अच्छा रहता है ।

          चूना घुटने, कमर व कंधे का दर्द ठीक करता है । 

          एक खतरनाक बीमारी है Spondylitis वो चूने से ठीक होती है ।

          कई बार हमारे रीढ़की हड्डी में जो मनके होते हैं उसमे दुरी बढ़ जाती है Gap आ जाता है - ये चूना ही ठीक करता है । अगर आपकी हड्डी टूट जाये तो टूटी हुई हड्डी को जोड़ने की ताकत सबसे ज्यादा चूने में है । चूना खाइए सुबह को खाली पेट ।

          मुंह में ठंडा गरम पानी लगता है तो चूना खाओ बिलकुल ठीक हो जाता है,

          मुंह में अगर छाले हो गए है तो चूने का पानी पियो तुरन्त ठीक हो जाता है ।

          शरीर में जब खून कम हो जाये तो चूना जरुर लेना चाहिए, एनीमिया है खून की कमी है उसकी सबसे अच्छी दवा है ये चूना, चूना पीते रहो गन्ने के रस में, या संतरे के रस में नही तो सबसे अच्छा है अनार के रस में - अनार के रस में चूना पिए खून बहुत बढता है , बहुत जल्दी खून बनता है - एक कप अनार का रस गेहूँ के दाने के बराबर चूना सुबह खाली पेट ।

          घुटने में घिसाव आ गया और डॉक्टर कहे के घुटना बदल दो तो भी जरुरत नही चूना खाते रहिये और हरसिंगार के पत्ते का काढ़ा पीते रहिये, घुटने बहुत अच्छे से काम करते रहेंगे । 

          ये कुछ महत्वपूर्ण लाभ हैं जो चूने का नियमित सेवन करने वालों को मिलते रहते हैं किंतु इसके अलावा भी ऐसे अनेकों छोटे-बडे लाभ शरीर को मिलते हैं जिनमें केल्शियम की कमी के कारण हमारा शरीर किसी न किसी रोग की उत्पत्ति के द्वारा हमें चिकित्सकों के चक्कर लगवाकर परेशान करता रहता है । 

          चूने के प्रयोग में सावधानी मात्र इतनी रखना आवश्यक होती है कि किसी भी परिस्थिति में चूने का प्रयोग प्रतिदिन गेहूँ के दाने से अधिक मात्रा में नहीं हो एवं यदि किसी महिला-पुरुष को शरीर में किसी भी प्रकार की पथरी की समस्या यदि बनी हुई हो तो उन्हें चूने का प्रयोग नहीं करना चाहिये ।



गुरुवार, 5 अप्रैल 2018

एसिडिटी से बचाव


            क्या आप जानते हैं, एसिडिटी की अवस्था में एलोपैथी की अधिक दवाईयों के सेवन से आपकी किडनी भी खराब हो सकती है ?

           जब हम खाना खाते हैं तो इस को पचाने के लिए शरीर में एसिड बनता है, जिसकी मदद से ही ये भोजन आसानी से पचता है इसलिये ये ज़रूरी भी है । मगर कभी-कभी ये एसिड इतना ज़्यादा मात्रा में बनता है कि इसकी वजह से सिरदर्द, सीने में जलन, पेट में अलसर और अलसर के बाद कैंसर तक होने की सम्भावना भी बन जाती है ।

          ऐसे में हम नियमित ही प्राय: घर में इनो या पीपीआई (प्रोटॉन पंप इनहिबिटर्स) दवा का सेवन करते रहते हैं । मगर आपको जान कर आश्चर्य होगा के ये दवायें सेहत के लिए बहुत खतरनाक हैं । पीपीआई ब्लड में मैग्नीशियम की कमी कर देता है । अगर खून पर असर पड़ रहा है तो किडनी पर असर पड़ना लाज़मी है । जिसका सीधा सा अर्थ ये है कि ये दवायें हमारी दूरगामी सेहत के लिए खतरनाक है ।

           कुछ ऐसे नासमझ लोग भी देखे जाते हैं जो एसिडिटी होने पर कोल्डड्रिंक पेप्सी या कोका कोला ये सोच कर
पीते हैं के इस से एसिडिटी कंट्रोल होगी । आगे चलकर ऐसे लोगो को फिर भगवान ही बचा सकता है ।

तो ऐसी स्थिति में कैसे करे इस एसिडिटी का इलाज-
 
           आज हम आपको बता रहे हैं भयंकर से भयंकर एसिडिटी का चुटकी बजाते आसान सा इलाज । ये इलाज आपकी सोच से कई गुना ज़्यादा कारगार है । और ये उपचार हर घर की रसोई की अनिवार्य आवश्यकता है ।  हर नमकीन पकवान इसके बिना अधूरा है और ये है आपकी रसोई में मौजूद जीरा ।  जी हाँ जीरा...

कैसे करे इसका उपयोग-
          जब भी आपको एसिडिटी हो जाए कितने भी भयंकर से भयंकर एसिडिटी हो आपको बस जीरा कच्चा ही चबा चबाकर या पीस कर खा लेना है । एसिडिटी के हिसाब से आधे से एक चम्मच (ढाई से पांच ग्राम) जीरा खाएं और इसके 10 मिनट बाद गुनगुना पानी पी लें । आप देखेंगे के आपकी समस्या ऐसे गायब हो जाएगी जैसे गधे के सर से सींग । 

           तो आप इस उपाय को अपने मस्तिष्क में सुरक्षित रखलें और जब भी आपको या आपके परिवार के किसी भी सदस्य को एसीडिटी के कारण सीने में जलन या खट्टी डकार जैसी समस्या सामने आवे तब इस आसान सी विधि से इसका उपचार कर अपने शरीर को अन्य बीमारियों से सुरक्षित रखें ।
 

रविवार, 12 फ़रवरी 2017

गुड़ खाने के स्वास्थ लाभ...


          खाना खाने के बाद अक्सर मीठा खाने का मन करता है, इसके लिए सबसे बेहतर है कि आप गुड़ खाएं ।  गुड़ का सेवन करने से आप हेल्दी बने रह सकते हैं । जानिये गुड आपको कौन-कौनसे स्वास्थ लाभ देता है-
 
पाचन क्रिया को सही रखना-
  
          गुड़ शरीर का रक्त साफ करता है और मेटाबॉल्जिम ठीक करता है । रोज एक गिलास पानी या दूध के साथ थोडे से गुड़ का सेवन पेट को ठंडक देता है ।
 
इससे गैस की दिक्कत नहीं होती-
 
          जिन लोगों को गैस की परेशानी है, वो रोज़ लंच या डिनर के बाद थोड़ा गुड़ ज़रुर खाएं ।
 
गुड़ आयरन का मुख्य स्रोत है- 
 
          इसलिए यह एनीमिया के मरीज़ों के लिए बहुत फायदेमंद है । खासतौर पर महिलाओं के लिए इसका सेवन बहुत अधिक उपयोगी  है ।
 
त्वचा के लिए- 
 
          गुड़ रक्त को शुद्ध करता है, जिससे त्वचा दमकती है और मुहांसे की समस्या नहीं होती है ।
 
गुड़ की तासीर-
  
          गुड़ की तासीर गर्म है, इसलिए इसका सेवन जुकाम और कफ से आराम दिलाता है। जुकाम के दौरान अगर आप कच्चा गुड़ नहीं खाना चाहते हैं तो चाय या लड्डू में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं ।
 
उर्जा व एनर्जी के लिए-
 
          बहुत ज़्यादा थकान और कमजोरी महसूस करने पर गुड़ का सेवन करने से आपका एनर्जी लेवल बढ़ जाता है । गुड़ जल्दी पच जाता है,  इससे शुगर का स्तर भी नहीं बढ़ता । दिनभर काम करने के बाद जब भी आपको थकान हो तुरंत गुड़ खाकर राहत पाएं ।
 
जोड़ों के दर्द में आराम- 
 
          रोज़ गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक का सेवन करें, इससे जोड़ों के दर्द की दिक्कत नहीं होगी ।
और इसके साथ ही-
 
          गुड़ के साथ पके चावल खाने से बैठा हुआ गला व आवाज खुल जाती है ।
 
          गुड़ और काले तिल के लड्डू खानेसे सर्दी में अस्थमा की परेशानी नहीं होती है ।
 
          जुकाम जम गया हो, तो गुड़ पिघलाकर उसकी पपड़ी बनाकर खिलाएं ।
 
          गुड़ और घी मिलाकर खाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है ।
 
          पांच ग्राम सौंठ दस ग्राम गुड़ के साथ लेने से पीलिया रोग में लाभ होता है ।
 
          गुड़ का हलवा खाने से स्मरण शक्ति बढती है ।
 
          पांच ग्राम गुड़ को इतने ही सरसों के तेल में मिलाकर खानेसे श्वास रोग से छुटकारा मिलता है ।
 
          गुड़ शरीर के टेंपरेचर को नियंत्रित रखता है। इसमें एंटी एलर्जिक तत्व हैं, इसलिए दमा के मरीज़ों के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद होता है ।
          इसलिये नियमित रुप से अपने खाद्य पदार्थों में गुड का सेवन बनाये रखें और अपने स्वास्थ्य व सेहत को गुड रखें । 



गुरुवार, 9 फ़रवरी 2017

अन्न का मन से समबन्ध



          अन्न/भोजन का मन  पर क्या असर होता है । इसे हम इस उदाहरण से समझ सकते है -
 
          "तीन महीने का प्रयोग करके देखें कि सात्विक अन्न खाने से अपने आप में आपको एक बदलाव महसूस होने लगेगा - क्योंकि  जैसा अन्न वैसा मन।"सात्विक अन्न सिर्फ शाकाहारी भोजन नही बल्कि परम आत्मा को ध्यान में रखकर बनाया गया भोजन होता है ।
 
          गुस्से से अगर खाना बनाया गया है उसे सात्विक अन्न नही कहेंगे, इसलिए खाना बनाने वालों को कभी भी नाराज,  परेशान स्थिति में खाना नही बनाना चाहिए, और घर के जिम्मेदार सदस्यों को कभी भी माँ बहनों को (या जो खाना बनाते हैं उनको) डांटना या उनसे लड़ना-झगडना नहीं चाहिये, क्योंकि वो रसोई में जाकर आपके ही खाने में उस गुस्से वाली Vibrations को मिला कर.....अगले ही घंटे में आपको ही खिलाने वाले हैं....अतः ये ध्यान में रखने वाली अत्यन्त ही महत्वपूर्ण बात है ।
 
           आप किसी को डांट दो, गुस्सा कर लो और बोलो जाओ जाकर खाना बनाओ.....अब....?
 
          खाना तो हाथ बना रहा है किंतु मन क्या कर रहा है, मन तो अन्दर से लगतार खिन्न है,  तो वो सारे नेगेटिव Vibration उस खाने के अंदर ही तो जा रहे हैं...
 
           भोजन तीन प्रकार का होता है-
 
          1. जो हम होटल में खाते हैं,

           2. जो घर में माँ बनाती है और,
 
          3. जो हम मंदिर और गुरूद्वारे में खाते हैं ।

          तीनो के Vibration अलग अलग होते हैं ।

          1. जो खाना होटल वाले बनाते हैं उनके Vibration कैसे होते हैं,  आप खाओ और हम कमायें, तो जो व्यक्ति ज्यादातर बाहर होटल में खाना खाता है उसकी वृति धन कमाने के अलावा कुछ और सोच ही नहीं सकती, क्यूंकि वो खाना ही वही खा रहा है ।
 
          2.  घर में माँ जो  खाना बनाती है, वो बड़े प्यार से खाना बनाती है । चूंकि घरों में जब धन ज्यादा आ जाता है तो घर में Cook (नौकर) रख लिए जाते हैं खाना बनाने के लिए और वो जो खाना बना रहे है वो भी इसी सोच से कि आप खाओ हम कमाएं ।

          जबकि एक बच्चा जब अपनी माँ को बोले कि एक रोटी और खानी है तो माँ का चेहरा ही खिल जाता है । कितनी प्यार से वो एक और रोटी बनाएगी कि मेरे बच्चे ने रोटी तो और मांगी और वो उस रोटी में बहुत ज्यादा प्यार भी भर देती है । जबकि अगर आप अपने Cook (नौकर) को बोलो एक रोटी और खानी है तो वो सोचेगा रोज तो तीन रोटी खाते है, आज एक और चाहिए, आज ज्यादा भूख लगी है तो अब मेरे लिए एक रोटी कम पड जाएगी या आटा भी ख़त्म हो गया तो अब और आटा गुंथना पड़ेगा एक रोटी के लिए... मुसीबत...! ऐसी रोटी नही खानी है । ऐसी रोटी खाने से ना खाना ही भला ।

          3.  जो मंदिर और गुरूद्वारे में खाना बनता है,  प्रसाद बनता है वो किस भावना से बनता है - वो परमात्मा को याद करके खाना बनाया जाता है क्यों न हम भी अपने घर में परमात्मा की याद में प्रसाद बनाना शुरू कर दें । इसके लिये करना क्या है- 
 
          घर, रसोई साफ़, मन शांत, रसोई में अच्छे गीत (भजन-कीर्तन) चलाएं और परमात्मा को याद करते हुए खाना बनाएं ।  घर में जो भी समस्याएं हैं उसके लिए जो समाधान है उसके बारे में परमात्मा को याद करते हुए खाना बनाएं...

          परमात्मा को कहें - मेरे बच्चे के कल exam हैं,  इस खाने में वो ताकत और शांति भर दो  ताकि मेरे बच्चे का मन एकदम शांत हो, और उसकी सारी टेंशन ख़तम हो जाए । हे परमात्मा, मेरे पति को Business में बहुत टेंशन है और वो बहुत गुस्सा करते हैं, इस खाने में ऐसी शक्ति भरो, कि उनका मन शांत हो जाये । फिर देखिये - जैसा अन्न वैसा मन । जादू है खाने में और असर है पकाने में ।
 


मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

स्वास्थ्य के प्रति सजगता


          1.   कृपया APPY FIZZ का सेवन न करें, क्योंकि इसमें कैंसर पैदा करने वाले रसायन है ।
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          2.   कोक या पेप्सी सेवन करने से पहले व बाद में मेन्टोस का सेवन न करें क्योंकि इसका सेवन करने से मिश्रण साईनाइड में बदल जाता है, जिससे सेवन करने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है ।
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          3.  कुरकुरे का सेवन न करें क्योंकि इसमें प्लास्टिक की काफ़ी मात्रा होती है । इसकी पुष्टी के लिये कुरकुरे को जलायें तो देखेंगे कि प्लास्टिक पिघलने लगा है ।
 
टाइम्स आफ़ इण्डिया की रिपोर्ट
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          4.  इन गोलियों का सेवन तुरन्त बन्द करें क्योंकि ये बहुत ख़तरनाक है:-
* डी-कोल्ड /D-cold
*   Vicks Action-500
* एक्टिफाइड/Actified
* कोल्डारिन/Coldarin
* कोसोम/Cosome
* नाईस/Nice
* निमुलिड़/Nimulid
* सैट्रीजैट-डी/Cetrizet-D
          इन गोलियों में फिनाईल प्रोपेनोल- एमाइड पीपीए होता है जिससे ह्रदयाघात् होता है । इसलिये यह दवा अमेरिका में प्रतिबन्धित है ।
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          वाट्सएप/फेसबुक जैसे माध्यमों पर आप मुफ़्त में महत्वपूर्ण सूचनाओं से सभी को अवगत करा सकते हैं, अत: इसे पढ़ें और दूसरों को भी सूचित करें ।
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          अमेरिका के डाक्टरों को व्यक्तियों में हो रहे नये क़िस्म के कैंसर का पता चला है जोकि "सिल्वर नाइट्रो आक्साइड"के कारण पनप रहा है ।
          मोबाइल चार्ज करने के लिये रीचार्ज कार्ड ख़रीदें तो कोड नम्बर के लिये कोड लाइन को नाख़ून से न खुर्चें, क्योंकि कोड को छुपाने में
"सिल्वर नाइट्रो आक्साइड" नाम के रसायन की परत होती है, जिससे त्वचा का कैंसर होता है ।
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महत्वपूर्ण स्वास्थ्य बातें:-
           सेलफ़ोन पर बातें करते समय मोबाईल बायें कान की तरफ़ रखें ।
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जब भी बैटरी अंतिम बार पर हो, सैलफ़ोन से बात न करें,क्योंकि तब ध्वनी तरेंगे एक हज़ार गुणा शक्तिशाली हो जाती है ।
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          सांय पाँच बजे के बाद भारी भोजन का सेवन न करें ।
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           हमेशा सुबह ज़्यादा पानी पिएं व रात के समय कम ।
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         सोने का सबसे अच्छा समय रात दस बजे से सुबह चार बजे तक होता है ।
 

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          दवाईयां खाना खाने के बाद तुरन्त न लेवें।
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ठण्डे पानी के साथ गोलियां न लेवें ।
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अमेरीकी रसायन अनुसंधान केन्द्र के जांच परिणाम के अनुसार-
           चाय को न तो प्लास्टिक के कपों में पिएं और न ही प्लास्टिक पेपर पर भोजन करें, क्योंकि प्लास्टिक गरम होने पर इसमें रासायनिक परिवर्तन होने लगते हैं जिनसे 52 प्रकार के कैंसर होने का ख़तरा है ।

          यह संदेश भारत में कार्यरत डाक्टरों के समूह से है, जिसको आम जनता के हित में भेजा जा रहा है ।
डा० हार्दिक शाह !
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO)
सामान्य अस्पताल ( Civil Hospital ) मुम्बई


 

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017

एक्यूप्रेशर - हाथ की पांचों उंगलियां.


            हमारे हाथ की पांचो उंगलियां शरीर के अलग-अलग अंगों से जुडी होती है ।  इसका मतलब आप को दर्दनाशक दवाइयां खाने के पहले इस आसान और प्रभावशाली  तरीके का इस्तेमाल करना करना चाहिए ।  आईये जानते हैं कि शरीर के किस हिस्से के दर्द को हाथ की कौनसी उंगली को रगड़ने से कैसे आराम पाया जा सकता है ।

            हमारे हाथ की अलग-अलग उंगलियां अलग-अलग बिमारियों और भावनाओं से जुडी होती है ।  शायद आप को पता न हो हमारे हाथ की उंगलियां चिंता, डर और चिड़चिड़ापन दूर करने की क्षमता रखती है | उंगलियों पर धीरे से दबाव डालने से शरीर के कई अंगो पर प्रभाव पड़ेगा |

1. अंगूठा – The Thumb
            हाथ का अंगूठा हमारे फेफड़ों से जुड़ा होता है ।  अगर आप के दिल की धड़कन तेज है तो हलके हाथो से अंगूठे पर मसाज करे और हल्का सा खिचे ।  इससे आप को आराम मिलेगा ।

2. तर्जनी – The Index Finger
            ये उंगली आंतों  gastro intestinal tract से जुडी होती है ।  अगर आप के पेट में दर्द है तो इस उंगली को हल्का सा रगड़े, दर्द गायब हो जायेगा ।

3. बीच की उंगली – The Middle Finger
            ये उंगली परिसंचरण तंत्र तथा circulation system से जुडी होती है ।  अगर आप को चक्कर आवें या जी घबरा रहा है तो इस उंगली पर मालिश करने से तुरंत रहत मिलेगी ।

4. तीसरी उंगली – The Ring Finger
            ये उंगली आपकी मनोदशा से जुडी होती है ।  अगर किसी कारण आपकी मनोदशा अच्छी नहीं है या शांति चाहते हों तो इस उंगली को हल्का सा मसाज करें और खिचे, आपको जल्द ही इस के अच्छे नतीजे प्राप्त हो जयेगे, आप का मूड ठीक हो जावेगा ।

5. छोटी उंगली – The Little Finger
            छोटी उंगली का किडनी और सिर के साथ सम्बन्ध होता है ।  अगर आप को सिर में दर्द है तो इस उंगली को हल्का सा दबाये और मसाज करे, आप का सिर दर्द दूर हो सकेगा ।  इसे मसाज करने से किडनी भी तंदरुस्त रहती  है ।

 

रविवार, 29 जनवरी 2017

सर्दी में उपयोगी बाजरा.

 

            बाजरे की रोटी और इसका खिचडा जो प्रायः सर्दी के मौसम में बहुतायद से खाया जाता है इसका स्वाद जितना अच्छा है, उतने ही अधिक उसमें गुण भी रहते हैं ।
 
            बाजरे की रोटी खाने वाले को हड्डियों में कैल्शियम की कमी से पैदा होने वाला रोग आस्टियोपोरोसिस और खून की कमी यानी एनीमिया नहीं होता ।
 
            बाजरा लीवर से संबंधित रोगों को भी कम करता है ।
 
            गेहूं और चावल के मुकाबले बाजरे में ऊर्जा कई गुना है ।
 
          बाजरे में भरपूर कैल्शियम होता है जो हड्डियों के लिए रामबाण औषधि है । उधर आयरन भी बाजरे में इतना अधिक होता है कि इसका सेवन करते रहने वाले लोगों को खून की कमी से होने वाले रोग नहीं हो सकते ।
 
            खासतौर पर गर्भवती महिलाओं ने कैल्शियम की गोलियां खाने के स्थान पर रोज बाजरे की दो रोटी खाना चाहिए ।
 
           वरिष्ठ चिकित्साधिकारी मेजर डा. बी.पी. सिंह की सिक्किम में सेना में तैनाती के दौरान गर्भवती स्त्रियों को कैल्शियम और आयरन की जगह बाजरे की रोटी और खिचड़ी दी जाती थी । इससे उनके बच्चों को जन्म से लेकर पांच साल की उम्र तक कैल्शियम और आयरन की कमी से होने वाले रोग नहीं होते थे । इतना ही नहीं बाजरे का सेवन करने वाली स्त्रियों में प्रसव में असामान्य पीड़ा के मामले भी न के बराबर पाए गए ।
 
            इसीलिये डाक्टर बाजरे के गुणों से इतने प्रभावित है कि इसे अनाजों में वज्र की उपाधि देने में जुट गए हैं । 
             
            लीवर की सुरक्षा के लिए भी बाजरा खाना लाभकारी है । उच्च रक्तचाप, हृदय की कमजोरी, अस्थमा से ग्रस्त लोगों तथा दूध पिलाने वाली माताओं में दूध की कमी को दूर करने के लिये यह टॉनिक का कार्य करता है ।
 
            यदि बाजरे का नियमित रूप से सेवन किया जाय तो यह कुपोषण, क्षरण सम्बन्धी रोग और असमय वृद्ध होने की प्रक्रियाओं को दूर करता है ।
 
           बाजरे की खपत से शरीर प्राकृतिक रूप से शान्त होता है । यह एंग्जायटी, डिप्रेशन और नींद न आने की बीमारियों में फायदेमन्द होता है । यह माइग्रेन के लिये भी लाभदायक है । इसमें लेसिथिन और मिथियोनिन नामक अमीनो अम्ल होते हैं जो अतिरिक्त वसा को हटा कर बेड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करते हैं ।
 
            बाजरे में उपस्थित रसायन पाचन की प्रक्रिया को संतुलित करते हैं । डायबिटीज़ में यह रक्त में शक्कर की मात्रा को नियन्त्रित करने में सहायक होता है । 

            इसलिये बाजरे का किसी भी रूप में सेवन न सिर्फ सर्दियों के मौसम में बल्कि सिमित मत्रा में सभी ऋतुओं में लाभकारी है ।
 

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