मंगलवार, 19 अप्रैल 2016

हार्टअटैक (दिल के दौरे) के लक्षण और बचाव.


      हृदय हमारे शरीर में सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है । संपूर्ण शरीर मे रक्त परिभ्रमण हृदय की मांसपेशीयों के द्वारा ही होता है । कोरोनरी धमनी के माध्यम से दिल की मांसपेशियों को रक्त की आपूर्ति होती रहती है और इसी प्रक्रिया से दिल की पेशियां जीवंत रहकर कार्यक्षम बनी रहती हैं । जब इन रक्त वाहिकाओं में खून का थक्का जमने से रक्त परिभ्रमण रूक जाता है तो हार्ट अटैक का दौरा  पड जाता है। हृदय की जिन  मांसपेशियों को रक्त की आपूर्ति नहीं होती हैं वे मरने लगती हैं । हार्ट अटैक महसूस होने के बाद के 1 से 2 घंटे रोगी के जीवन को बचाने की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण होते हैं, ऐसी स्थिति में सीने में दर्द विशेष रुप से बांई ओर लगातार महसूस होने पर बिना देर किये मरीज को तत्काल किसी बडे अस्पताल में पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिये । प्राथमिक चिकित्सा के तौर पर रोगी की जुबान के नीचे सोर्बिट्रेट और एस्प्रिन की गोली रखना चाहिये। समय पर इलाज मिलने से रक्त का थक्का घुल जाता है और प्रभावित मांसपेशी फ़िर से काम करने लगती है।

हार्ट अटैक के प्रमुख लक्षण-

      रोगी को छाती के बांई ओर मध्य भाग में दबाव, बैचेनी, भयंकर दर्द, भारीपन और जकडन महसूस होती है। यह हालत कुछ समय रहकर समाप्त हो जाती है लेकिन कुछ समय बाद ये लक्षण फ़िर उपस्थित हो सकते हैं । अगर यह स्थिति आधा घंटे तक बनी रहती है और सोर्बिट्रेट गोली के इस्तेमाल से भी राहत नहीं मिलती है तो यह  हृदयाघात का पक्का प्रमाण मानना चाहिये। छाती के अलावा शरीर के अन्य भागों में भी बेचैनी मेहसूस होती है। भुजाओं ,कंधों, गर्दन, कमर और जबडे में भी दर्द और भारीपन मेहसूस होता है।

         छाती में दर्द होने से पहले रोगी को सांस में कठिनाई और घुटन के लक्षण हो सकते हैं। अचानक जोरदार पसीना आना, उल्टी होना और चक्कर आने के लक्षण भी देखने को मिलते हैं । कभी-कभी बिना दर्द हुए दम घुटने जैसा मेहसूस होता है।

अतः हार्ट अटैक के लक्षण प्रकट होते ही रोगी को एस्प्रिन की गोली देना चाहिये। घुलनशील एस्प्रिन (डिस्प्रिन) मिल जाए तो आधी गोली पानी में घोलकर पिलानी चाहिये। सोर्बिट्रेट गोली तुरंत जुबान के नीचे रखना चाहिये। एस्प्रिन में रक्त को पतला करने का गुण होता है। रक्त पतला होकर थक्का घुलने लगता है और प्रभावित मांसपेशी को खून मिलने से वह पुन: काम करने लगती है।

                इसके बाद हार्ट-अटैक के रोगी को तत्काल किसी बडे अस्पताल में जहां ई.सी.जी. और रक्त की जांच के साधन उपलब्ध हों, पहुंचाने की व्यवस्था करें । साधन विहीन अस्पताल में समय नष्ट करने से रोगी मौत के मुंह में भी जा सकते हैं। रोगी का उस स्थिति में एक या ज्यादा से ज्यादा डेढ घंटे में किसी बडे अस्पताल में पहुंचाना बेहद जरूरी है । याद रखें जानकारी के अभाव में देर करने से आधे से ज्यादा हृदयाघात के मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड देते हैं ।

           

   यद्यपि महिलाओं में यह बीमारी पुरुषों की तुलना में कम देखने में आती है किन्तु इस दर्द की गिरफ्त में पुरुषों की तुलना में महिलाएँ इसे आसानी से सहन कर लेने की मानसिकता के चलते अक्सर इसे नजरअन्दाज कर देने की कोशिश करते देखी जाती हैं, जिससे उन्हें चिकित्सकीय सहायता मिलने में देरी हो जाती है और इसीलिये इस बीमारी में महिलाओं की मृत्यु का प्रतिशत पुरुषों की तुलना में अधिक पाया जाता है ।

हार्ट-अटैक से बचाव में उपयोगी जानकारी-

        जहाँ तक संभव हो चिकित्सकीय जांच के द्वारा अपने कोलेस्ट्राल का स्तर 130 एम.जी./ डी.एल. तक बनाये रखना,

         अपना ब्लड-प्रेशर 120-130 / 80-90 के आसपास नियंत्रित रखना,

        अगर आप मधुमेह से पीडित हैं तो अपना शुगर लेबल भोजन के पूर्व 100 एम.जी./डी.एल. और भोजन के बाद 140 एम.जी./डी.एल.के नीचे रखना,

        अनिवार्य रुप से प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा इस गति से टहलना जिससे हाँफनी भी नहीं आवे और सीने में दर्द भी न होने पावे,

         15 मिनीट प्रतिदिन हल्का योगाभ्यास, प्राणायाम या ध्यान करना,

         मोटापा नहीं बढने देना, यदि हो तो नियंत्रित करने का प्रयास करना,

         मानसिक तनाव को स्वयं पर हावी न होने देना,

        नमक व खाद्य तेल (आवश्यक मसाले नहीं) का उपयोग अधिकाधिक नियंत्रित कर देना,  और

          धूम्रपान से दूरी बनाये रखना ।

हार्ट-अटैक से बचाव हेतु उपयोगी खान-पान :-

         प्रतिदिन दो कप काॅफी या ग्रीन टी पीना,

         खाली पेट थोडे अखरोट खाना और   

         लगभग 10-12 ग्राम किशमिश का नित्य सेवन करना,

         भोजन में कच्चा सलाद, हरी सब्जियां और मौसमी फलों का सेवन अधिक करना, और

         लहसुन, प्याज, गाजर, टमाटर और लौकी का अपने खान-पान में अधिक उपयोग करना ।


साभार : चित्र गूगल के सौजन्य से, और समस्त जानकारी-  दृष्य, श्रव्य व पाठ्य माध्यमों से संकलित.


     हमारे खाद्यान्न में तले हुए व्यंजन, मिठाईयां, निरन्तर चलन में बढते फास्ट-फूड, शराब-सिगरेट, तम्बाकू के सेवन के साथ ही वायुमंडल में व्याप्त घातक जहरीले रसायनों के कारण हमारे शरीर की रक्त नलिकाओं में ठोस चिकनाई व कोलेस्ट्रॉल की मात्रा सामान्यतः बढती जाती है, जो रक्त परिभ्रमण की अनवरत चलने वाली प्रक्रिया के द्वारा ह्दय तक जाकर फिल्टर नहीं हो पाती और धीरे-धीरे वहाँ जमा होते रहकर उन्हें संकरा करते हुए दिल की सामान्य धडकनों को अनियमित करना प्रारम्भ कर देती है जिसके कारण हम सांस लेने में दिक्कत, कमजोरी, चक्कर आना, तेज पसीना, बैचेनी व पेट से उपर के भाग में कहीं भी और प्रायः सीने या छाती में बांयी ओर दर्द का अहसास करते हैं और यही स्थिति निरन्तर बढते क्रम में होते रहने के बाद आगे जीवित रहने के लिये डॉक्टर बेहद खर्चीली एंजियोप्लास्टी और कभी-कभी जीवन के लिये खतरनाक बाय-पास सर्जरी का अंतिम विकल्प हमारे अथवा हमारे परिजनों के समक्ष रखते हैं जिसका दुष्परिणाम पूरे परिवार के लिये कभी-कभी जिंदगी भर की संचित बचत को उपचार में खर्च कर देने, बडा कर्ज लेने और किस्मत यदि खराब हो तो इसके बाद भी हमारे प्रिय परिजन को सदा-सर्वदा के लिये खो देने के रुप में हमारे सामने आता है ।
    इस स्थिति से बचाव के लिये समय रहते क्या कुछ किया जा सकता है ?  निःसंदेह हाँ...
    अलसी के गुणों से हम अपरिचित नहीं हैं । मानव शरीर के लिये इसका तेल और भी अधिक गुणों का भंडार स्वयं में संजोकर रखता है किंतु उसमें भी घानी की अशुद्धियां, वसा की मौजूदगी और वातावरण के अच्छे-बुरे कारकों का प्रभाव मौजूद रहता ही है । इन अशुद्धियों को दूर करते हुए शरीर के लिये उच्चतम परिष्कृत पद्दतियों से निर्मित 'फ्लेक्स ऑईल जेल केप्सूल' जिसमें ओमेगा 6, ओमेगा 9, अनिवार्य फेटी एसिड, फाईबर, प्रोटीन, जिंक, मेग्निशीयन, विटामिन व 60% तक शुद्ध ओमेगा 3 मौजूद रहता है । ये सभी मित्र घटक हमारे शरीर की रक्त नलिकाओं में मौजूद सभी प्रकार की अशुद्धियों की सफाई करने का कार्य अत्यंत सुचारु रुप से करने में सक्षम होते हैं । 

     यदि हम स्वयं इसका परीक्षण करके देखें तो थर्मोकोल (जो कभी में नष्ट नहीं होता व यदि इसे जलाया भी जावे तो और भी घातक रासायनिक प्रक्रिया के द्वारा वायुमंडल में व्याप्त होकर हमारे शरीर के लिये अधिक नुकसानदायक साबित होता है) इसकी किसी भी शीट का एक चने के बराबर छोटा टुकडा लेकर व इस फ्लेक्स ऑईल जेल केप्सूल के एक केप्सूल को सुई की नोक से पंचर करके इसमें मौजूद उच्चतम गुणवत्ता के तेल को अपनी हथेली अथवा किसी प्लेट में निकालकर उसमें फाईबर के इस छोटे से टुकडे को डाल दें तो हम देखेंगे कि बमुश्किल 4-5 मिनिट में उस केप्सूल में मौजूद शुद्ध परिष्कृत जेल तेल में वह फाईबर का टुकडा गायब हो जाता है ।
    जब इसी फ्लेक्स ऑईल केप्सूल को हम नियमित रुप से अपने आहार में शामिल कर लेते हैं तो इसी प्रकार इसके शक्तिशाली घटक हमारे शरीर की रक्त-नलिकाओं में जमा सारा बे़ड कोलेस्ट्राल व अन्य अशुद्धियों को साफ करते हुए उन अवशिष्ट पदार्थों को मल-मूत्र के माध्यम से आसानी से शरीर से बाहर निकाल देते है और हम इन्हीं खान-पान व वातावरण में निरोगावस्था में अपना सामान्य जीवन जीते रह सकते हैं ।

  
           यदि उपरोक्त समस्याओं से ग्रस्त कोई व्यक्ति इस फ्लेक्स ऑईल जेल केप्सूल को 2 या 3 केप्सूल आवश्यकतानुसार प्रतिदिन चार माह (120 दिन) तक नियमित रुप से ले तो जहाँ वह अपनी शारीरिक समस्याओं से मुक्त हो सकता है वहीं यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति 2 केप्सूल प्रतिदिन 2 से 3 माह (60 से 90 दिन) लगातार ले तो वह कम से कम अगले एक वर्ष तक रक्त नलिकाओं की किसी भी समस्या से स्वयं को मुक्त रख सकता है ।
        90 केप्सूल का 515/- रु. मूल्य का यह केप्सूल पैक यदि आपके क्षेत्र में उपलब्ध हो तो आप इन्हें अपने आसपास से खरीदकर अपने दैनिक आहार में शामिल कर आपके अमूल्य ह्दय की न सिर्फ आज बल्कि आने वाले लम्बे समय तक सुरक्षा बनाये रख सकते हैं और यदि यह आपके क्षेत्र में उपलब्ध न हो पावे तो मात्र 65/- रु. पेकिंग व कोरियर खर्च अतिरिक्त रुप से वहन करते हुए 580/- रु. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की 'इन्दौर साधना नगर ब्रांच' का उल्लेख करते हुए सेविंग A/c No. 53014770506 में सुशील कुमार बाकलीवाल के नाम से जमा करवाकर व मोबाईल नंबर +91 91799 10646 पर हमें Call अथवा WhatsApp मेसेज द्वारा अपना नाम व पूरा पता भेजते हुए घर बैठे प्राप्त कर अपने व अपने परिजनों के लिये इसका लाभ आवश्यक रुप से ले सकते हैं ।

यह भी देखें-

जीवनदायिनी प्राकृतिक अलसी - नया नजरिया... 
   

19 टिप्‍पणियां:

  1. ध्यान देने योग्य उपयोगी जानकारी हेतु आभार 1

    उत्तर देंहटाएं
  2. http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B9%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%98%E0%A4%BE%E0%A4%A4#

    उत्तर देंहटाएं
  3. उपयोगी जानकारी ..
    ध्यान में रखने वाली बाते बताई हैं आपने सभी .... शुक्रिया ..

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही उपयोगी और काम की जानकारी दी आपने :)

    उत्तर देंहटाएं
  5. mujhe aapka yeh blog bahut pasand hai, aksar aisi gyaan ki baaten padhne ko milti hain, jo aaj lagbhag har parivaar ki zarurat hain,

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत ही उपयोगी जानकारी की प्रस्तुति,आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  7. जानकारी बहुत ही फायदेमंद है लेकिन अगर कोई व्यक्ति लहसुन प्याज़ ना खाता हो तो क्या किया जाए

    उत्तर देंहटाएं
  8. जानकारी बहुत ही फायदेमंद है लेकिन अगर कोई व्यक्ति लहसुन प्याज़ ना खाता हो तो क्या किया जाए

    उत्तर देंहटाएं
  9. अति सुन्दर जानकारी के लिए साधुवाद

    उत्तर देंहटाएं
  10. इस जानकारी को पेज पर डालने के लिए बहुत धन्यवाद
    आज इस ज्ञान को हासिल कर के मेने अपनी जान की रक्षा की

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत ही उपयोगी जानकारी की प्रस्तुति,आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  12. इतनी कीमती जानकारी पाठकों को देेने के लिए आपको मेरी ओर से हार्दिक बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  13. मतलब खान , फतेहगढ जिला जैसलमेर, राज्य राजस्थान3 जुलाई 2016 को 7:31 pm

    मानव जीवन अमूलय है इसको बचाने के लिए यह बचाव की जानकारी बहुत ही उपयोगी है इसके लिए आभार

    उत्तर देंहटाएं
  14. मेरी मां को 1महीने पहले हर्ट अटैक आया था;अब सीने मे दर्द रहता और बेचेनी रहती पेट के ऊपर दर्द रहता है;ईलाज बताइऐ

    उत्तर देंहटाएं
  15. हुत अच्छी जानकारी । आपको बहुत बहुत धन्यवाद ।

    उत्तर देंहटाएं

आपकी अमल्य प्रतिक्रियाओं के लिये धन्यवाद...

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...