शनिवार, 14 मई 2011

एक गम्भीर मानसिक समस्या - डिप्रेशन (अवसाद)

          इसी ब्लाग की पिछली पोस्ट एक चमत्कारिक पुष्प औषधि - रेस्क्यू रेमेडी की टिप्पणियों में सुश्री Roshi ji का एक प्रश्न डिप्रेशन के संदर्भ में-
 
     mujko bhi thora dipression rehta hai med ki poori jankari de

          हममें से अधिकांश व्यक्तियों का वास्ता अपने घर-परिवार से लगाकर अपने नाते रिश्तेदारों व अपने परिचितों के दायरे में किसी न किसी डिप्रेशन के रोगी को देखने या उसके बारे में सुनने-जानने का अवश्य रहा होगा । इसे हम ऐसी मानसिक बीमारी भी कह सकते हैं जिसके लिये कहा जा सके कि- देखन में छोटी लगे, घाव करे गंभीर. 
 
        मेरी भतीजी जो अपनी स्वभावगत जिन्दादिली से उपजी हँसी-खुशी से अपने सम्पर्क में आने वाले हर शख्स को चिन्तामुक्त व प्रसन्न कर देती थी उसे भी इस डिप्रेशन (अवसाद) के रोग की चपेट में आकर दुनिया से रुखसत होते मैंने देखा है । वैसे तो किसी भी समस्या को शरीर में जन्म ले सकने के अनेकों कारण हो सकते हैं किन्तु प्रायः इस रोग की शुरुआत हम रोगी की उस मानसिक स्थिति से जोडकर देख सकते हैं जहाँ दुनियावी व्यवहार में व्यक्ति को लगातार ये लगता रहे कि मेरे साथ न्याय नहीं हो रहा है और यह भावना जैसे-जैसे गहरी होती जाती है वैसे-वैसे रोग का मानसिक व शारीरिक वेग भी बढता जाता है । कुछ महिलाओं में प्रसव के बाद भी अवसाद की यह समस्या देखने में आती है ।

          इसके रोगियों को सबसे पहले तो मानसिक रुप से हँसमुख व चिन्तामुक्त रहने की अनिवार्य कोशिश करना चाहिये जिसमें योग व प्राणायाम इनके सिये सर्वाधिक मददगार साबित होते है । जब भी फुरसत में या एकान्त में रहें तब अपने मन-मस्तिष्क को निरर्थक व अनावश्यक विचारों से बचाने के लिये अपने मनपसन्द संगीत को सुनना प्रारम्भ कर देने की आदत अनिवार्य रुप से बनालें यह आपके लिये पूरी तरह से मददगार साबित होगी और इनके अलावा- 
 
          अपने किसी भी प्रियजन से अपने मन की उहापोह के बारे में खुलकर चर्चा
अवश्य करें । अपने आप में अन्दर ही अन्दर घुटते न रहें ।
 
      
*   15-20 ग्राम गुलाब की पत्तियों को 250 मि. ली. उबलते पानी में डालकर गुलाब आसव के रुप में शक्कर व इलायची मिलाकर चाय-काफी की जगह इस पेय का उपयोग करें । सामान्य चाय बनाते वक्त भी इलायची को पीसकर चाय में मिलाकर अवश्य पीयें । अवसाद की स्थिति में इलायची का प्रयोग दवाई का काम करता है ।

   *   अवसाद और नाडी तंत्रिका की कमजोरी को दूर करने में काजू भी अत्यन्त उपयोगी होते हैं । यह विटामिन बी काम्प्लेक्स विशेषकर थायमिन से भरपूर होते हैं । काजू से राइबोफ्लेविन भी मिलता है जिससे उर्जा बनी रहती है और हम सक्रिय व प्रसन्न बने रह सकते हैं ।

     *     इसके अतिरिक्त अवसाद से उबरने के लिये सेवफल का सेवन अत्यन्त उपयोगी साबित होता है । इसमें विटामिन-बी, पोटेशियम और फास्फोरस जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो 'ग्लुटामिक एसिड' के बनने में सहायक होते हैं । ग्लुटामिक एसिड तंत्रिका कोशिकाओं में होने वाली क्षति को नियंत्रित करता है । सेवफल का प्रयोग एक गिलास कुनकुने दूध में 2 चम्मच शहद मिलाकर उसके साथ करने पर अधिक शीघ्रता से सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं ।
 
          यदि आपके परिवार में कोई भी सदस्य कभी इस रोग की गिरफ्त में आता दिखे तो अविलम्ब उस पर विशेष ध्यान दें । हरसंभव प्रयास के द्वारा उसका मन बहलाए और रोग को उस सीमा तक बने जहाँ तक न बढने दें जहाँ आधुनिक एलोपेथिक उपचार आवश्यक हो जावे, क्योंकि इस रोग में डाक्टरी उपचार में प्रयुक्त होने वाली एलोपैथिक दवाइयां बहुत अधिक साईड इफेक्ट भी पैदा करती हैं जो इससे प्रभावित रोगी के हित में नहीं होती ।

8 टिप्‍पणियां:

  1. अवसाद के बारे में सुन्दर जानकारी देने के लिए बहुत बहुत आभार.

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  2. एक उपयोगी रचना के लिए आभार आपका !

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  3. बाबा रामदेव से तो आपका ब्लाग ज्यादा फ़यदे मंद लगता है ।

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  4. प्रिय दोस्तों! क्षमा करें.कुछ निजी कारणों से आपकी पोस्ट/सारी पोस्टों का पढने का फ़िलहाल समय नहीं हैं,क्योंकि 20 मई से मेरी तपस्या शुरू हो रही है.तब कुछ समय मिला तो आपकी पोस्ट जरुर पढूंगा.फ़िलहाल आपके पास समय हो तो नीचे भेजे लिंकों को पढ़कर मेरी विचारधारा समझने की कोशिश करें.
    दोस्तों,क्या सबसे बकवास पोस्ट पर टिप्पणी करोंगे. मत करना,वरना......... भारत देश के किसी थाने में आपके खिलाफ फर्जी देशद्रोह या किसी अन्य धारा के तहत केस दर्ज हो जायेगा. क्या कहा आपको डर नहीं लगता? फिर दिखाओ सब अपनी-अपनी हिम्मत का नमूना और यह रहा उसका लिंक प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से
    श्रीमान जी, हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु सुझाव :-आप भी अपने ब्लोगों पर "अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट" लगाए. मैंने भी लगाये है.इससे हिंदी प्रेमियों को सुविधा और लाभ होगा.क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है.मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.
    क्या ब्लॉगर मेरी थोड़ी मदद कर सकते हैं अगर मुझे थोडा-सा साथ(धर्म और जाति से ऊपर उठकर"इंसानियत" के फर्ज के चलते ब्लॉगर भाइयों का ही)और तकनीकी जानकारी मिल जाए तो मैं इन भ्रष्टाचारियों को बेनकाब करने के साथ ही अपने प्राणों की आहुति देने को भी तैयार हूँ.
    अगर आप चाहे तो मेरे इस संकल्प को पूरा करने में अपना सहयोग कर सकते हैं. आप द्वारा दी दो आँखों से दो व्यक्तियों को रोशनी मिलती हैं. क्या आप किन्ही दो व्यक्तियों को रोशनी देना चाहेंगे? नेत्रदान आप करें और दूसरों को भी प्रेरित करें क्या है आपकी नेत्रदान पर विचारधारा?
    यह टी.आर.पी जो संस्थाएं तय करती हैं, वे उन्हीं व्यावसायिक घरानों के दिमाग की उपज हैं. जो प्रत्यक्ष तौर पर मनुष्य का शोषण करती हैं. इस लिहाज से टी.वी. चैनल भी परोक्ष रूप से जनता के शोषण के हथियार हैं, वैसे ही जैसे ज्यादातर बड़े अखबार. ये प्रसार माध्यम हैं जो विकृत होकर कंपनियों और रसूखवाले लोगों की गतिविधियों को समाचार बनाकर परोस रहे हैं.? कोशिश करें-तब ब्लाग भी "मीडिया" बन सकता है क्या है आपकी विचारधारा?

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  5. एक बहुत अच्छी ओर सुंदर जानकारी, धन्यवाद

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  6. डिप्रेशन में परिवार एवं मित्रगणों का साथ एवं सहयोग बहुत जल्दी हमें अपने जीवन में वापस लाता है.......इतनी अच्छी जानकारी के लिए धन्यवाद

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  7. @ जाट देवता (संदीप पँवार)
    हर कोई चाहता है ऐसे ब्लाग मिलें - फायदा हो । आभार...

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आपकी अमल्य प्रतिक्रियाओं के लिये धन्यवाद...

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