This is default featured slide 1 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 2 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 3 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 4 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 5 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

सोमवार, 11 जुलाई 2016

जीवन रक्षक पानी - कब पिएं, कब न पिएं...


            हम पानी क्यों ना पीये खाना खाने के बाद  । हमने दाल, सब्जी, रोटी खाई,  दही खाया, लस्सी पी, दूध, दही, छाछ, फल आदि, ये सब भोजन के रूप मे हमने ग्रहण किया । ये सब हमको उर्जा देता है और पेट उसी उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है ।

            पेट मे एक छोटा सा स्थान होता है जिसको हम हिंदी मे कहते है "अमाशय" उसी स्थान का संस्कृत नाम है "जठर"  और उसी स्थान को अंग्रेजी मे कहते है "epigastrium" ये एक थेली की तरह होता है और यह जठर हमारे शरीर मे सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी मे आता है । ये बहुत छोटा सा स्थान हैं । इसमें अधिक से अधिक 350gms खाना आ सकता है.! हम जो कुछ भी खाते हैं वो सब इस अमाशय मे आ जाता है.! आमाशय मे अग्नि प्रदीप्त होती है । उसी को कहते हे "जठराग्नि" ।

            ये जठराग्नि ही है जो अमाशय मे प्रदीप्त होने वाली आग है । जैसे ही आपने खाना खाया, की जठराग्नि प्रदीप्त हो गयी । यह ऑटोमेटिक है । जैसे ही अपने रोटी का पहला टुकड़ा मुँह मे डाला की जठराग्नि प्रदीप्त हो जाती है । फिर ये अग्नि तब तक जलती हे जब तक खाना' पचता है | अब यदि आपने खाते ही गटागट पानी पी लिया और खूब ठंडा पानी पी लिया जैसे कई लोग तो बोतल पे बोतल पी जाते है तो जो आग (जठराग्नि) जल रही थी वो बुझ जाती है । 

            आग अगर बुझ गयी .तो खाने की पचने की जो क्रिया है वो भी रुक जाती है । तब You suffer from IBS, Never CURABLE.

            हमेशा याद रखें - खाना जाने पर हमारे पेट में दो ही क्रिया होती है, एक क्रिया है जिसको हम कहते हे "Digestion" और दूसरी है "fermentation" फर्मेंटेशन जिसका मतलब है सडना, और डायजेशन का मतलब हे पचना । आयुर्वेद के हिसाब से आग जलेगी तो खाना पचेगा, खाना पचेगा तो उससे रस बनेगा.! जो रस बनेगा तो उसी रस से मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डिया, मल, मूत्र और अस्थि बनेगा और सबसे अंत मे मेद बनेगा.! किन्तु ये सब तभी होगा जब खाना पचेगा ।

            ये तो हुई खाना पचने की बात. अब जब खाना सड़ेगा तब क्या होगा ।  खाने के सड़ने पर सबसे पहला जहर जो बनता है वो हे यूरिक एसिड (uric acid), कई बार आप डॉक्टर के पास जाकर कहते है की मुझे घुटने मे दर्द हो रहा है, मुझे कंधे-कमर मे दर्द हो रहा है तो डॉक्टर कहेगा आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है आप ये दवा खाओ, वो दवा खाओ यूरिक एसिड कम करो और एक दूसरा उदाहरण खाना जब खाना सड़ता है, तो यूरिक एसिड जैसा ही एक दूसरा विष बनता है जिसको हम कहते हे LDL (Low Density lipoprotive) माने खराब कोलेस्ट्रोल (cholesterol) ।

              जब आप ब्लड प्रेशर(BP) चेक कराने डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो आपको कहता है (HIGH BP) हाई-बीपी है आप पूछोगे... कारण बताओ.? तो वो कहेगा कोलेस्ट्रोल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है, आप ज्यादा पूछोगे की कोलेस्ट्रोल कौनसा बहुत है ? तो वो आपको कहेगा LDL बहुत है  । इससे भी ज्यादा खतरनाक एक  विष है वो है.... VLDL (Very Low Density Lipoprotive)

             ये भी कोलेस्ट्रॉल जेसा ही विष है, अगर VLDL बहुत बढ़ गया तो आपको भगवान भी नहीं बचा सकता । खाना सड़ने पर और जो जहर बनते है उसमे एक ओर विष है जिसको अंग्रेजी मे हम कहते है triglycerides.! जब भी डॉक्टर आपको कहे की आपका "triglycerides" बढ़ा हुआ हे तो समज लीजिए की आपके शरीर मे विष निर्माण हो रहा है | तो कोई यूरिक एसिड के नाम से कहे, कोई कोलेस्ट्रोल के नाम से कहे, या फिर कोई LDL -VLDL के नाम से कहे समझ लीजिए की ये विष हैं और ऐसे विष 103 हैं, ये सभी विष तब बनते हैं, जब खाना पेट में सड़ता है ।

            मतलब समझ लीजिए किसी का कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे ध्यान आना चाहिए की खाना पच नहीं रहा है ,कोई कहता है मेरा triglycerides बहुत बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे डायग्नोसिस कर लीजिए आप, की आपका खाना पच नहीं रहा है ।

            कोई कहता है मेरा यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट लगना चाहिए समझने मे की खाना पच नहीं रहा है । क्योंकि खाना पचने पर इनमे से कोई भी जहर नहीं बनता.! खाना पचने पर जो बनता है वो है.... मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डिया, मल, मूत्र, अस्थि । और खाना नहीं पचने पर बनता है.... यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रोल, LDL-VLDL.  और यही आपके शरीर को रोगों का घर बनाते है । पेट मे बनने वाला यही जहर जब ज्यादा बढ़कर खून मे आते है ! तो खून दिल की नाड़ियो मे से निकल नहीं पाता और रोज थोड़ा थोड़ा कचरा जो खून मे आया है इकट्ठा होता रहता है और एक दिन नाड़ी को ब्लॉक कर देता है जिसे आप heart attack कहते हैं ।

            तो हमें जिंदगी मे ध्यान इस बात पर देना है की जो हम खा रहे हैं वो शरीर मे ठीक से पचना चाहिए और खाना ठीक से पचे, इसके लिए पेट मे ठीक से आग (जठराग्नि) प्रदीप्त होनी ही चाहिए । क्योंकि बिना आग के खाना पचता नहीं हे और खाना पकता भी नहीं है महत्व की बात खाने को खाना नहीं खाने को पचाना है । आपने क्या खाया कितना खाया वो महत्व नहीं है । महत्व इस बात का है कि खाना अच्छे से पचे ।

            इसके लिए वाग्भट्ट जी ने सूत्र दिया है,  "भोजनान्ते विषं वारी" (मतलब खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है) इसलिए खाने के तुरंत बाद पानी कभी न पिये । अब आपके मन मे सवाल आएगा कितनी देर तक नहीं पीना ? तो 1 घंटे 48 मिनट तक नहीं पीना । अब आप कहेंगे इसका क्या calculation हैं ? तो यह गणित ऐसा है कि जब हम खाना खाते हैं तो जठराग्नि द्वारा सब एक दूसरे मे मिक्स होता है और फिर खाना पेस्ट मे बदलता है । पेस्ट मे बदलने की क्रिया होने तक 1 घंटा 48 मिनट का समय लगता है ! उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है.! (बुझती तो नहीं लेकिन बहुत धीमी हो जाती है) पेस्ट बनने के बाद शरीर मे रस बनने की प्रक्रिया शुरू होती है । तब हमारे शरीर को पानी की जरूरत होती है और तब आप जितनी इच्छा हो उतना पानी पिएं ।

            जो बहुत मेहनती लोग है जैसे (खेत मे हल चलाने वाले, रिक्शा खीचने वाले, पत्थर तोड़ने वाले) उनके जठर में 1 घंटे के बाद ही रस बनने लगता है इसलिये उन्हें  एक घंटे बाद पानी पीना चाहिए ! अब आप कहेंगे खाना खाने के पहले कितने मिनट तक पानी पी सकते हैं । तो खाना खाने के 30 से 45 मिनट पहले तक आप पानी पी सकते हैं ! अब आप पूछेंगे यहाँ के  मिनट का calculation....?

            तो समझें... ऐसे ही जब भी हम पानी पीते हैं तो वो शरीर के प्रत्येक अंग तक जाता है  और अगर बच जाये तो 45 मिनट बाद मूत्र पिंड तक पहुंचता है  तो  पानी  पीने से मूत्र पिंड तक आने का समय 45 मिनट का है ।  तो आप खाना खाने से 30 से 45 मिनट पहले ही पाने पिये । इसका जरूर पालन करें और इस जानकारी को बेहतर स्वास्थ्य हेतु अधिक से अधिक लोगो को बताएं ।

Dr. Komal agrawal Nagpur
 




शुक्रवार, 8 जुलाई 2016

ह्रदयाघात... Sudden Cardiac Arrest !


             
            आज की पोस्ट सिर्फ पोस्ट नहीं, बल्कि एक ऐसी जानकारी है जिसे हम सबको जानना और समझना चाहिए। 

            आपने खबर पढ़ी होगी कि कुछ समय पहले उत्तराखंड के एक आईएएस अधिकारी नोएडा के मॉल में अपनी पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ खाना खा रहे थे, तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनकी मृत्यु हो गई । 39 साल के इस आईएएस अधिकारी का नाम था- अक्षत गुप्ता । ये उधमसिंह नगर में कलेक्टर थे । इनकी पत्नी भी आईपीएस अधिकारी हैं और ये परिवार उत्तराखंड से नोएडा घूमने-फिरने के ख्याल से आया था । यह बताने के लिए आज मैं पोस्ट नहीं लिख रहा कि वो कितने लोकप्रिय अधिकारी थे, कितनी मेहनत करके वो आई.ए.एस. अधिकारी बने थे,  या उनके दोनों बच्चे कितने छोटे हैं ।  मैं आज सिर्फ आगाह करने के लिए पोस्ट लिख रहा हूं कि उस अधिकारी के साथ अचानक जो हुआ,  वो किसी के साथ कभी भी  कहीं भी  हो सकता है । 

            ऐसा जब भी होता है, पहले तो सामने वाले की समझ में नहीं आता कि अचानक हुआ क्या ? फिर अफरा-तफरी में जब हम मरीज़ को अस्पताल ले जाते हैं तो पता चलता है कि उसके प्राण-पखेरू उड़ चुके हैं । डॉक्टर कहता है यह अचानक दिल का दौरा पड़ने का मामला था ।

            तीन साल पहले अप्रैल का महीना था और मेरे छोटे भाई के साथ एकदम ऐसी ही घटना घटी थी । वो दफ्तर में बैठा था, अचानक उसकी तबियत बिगड़ी और उसकी मृत्यु हो गई । मैं पहले भी कई बार इस बारे में आपको बता चुका हूं फिर से बता रहा हूं कि जैसे ही मेरे भाई के साथ ऐसा हुआ, वहां मौजूद लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचा दिया था । पर क्योंकि ऐसा होने में पांच मिनट की देर भी बहुत देर होती है, इसलिए मेरा भाई नहीं बचा था ।

            डॉक्टर ने कह दिया कि अचानक दिल का दौरा पड़ा था । यह गलत रिपोर्ट थी । जब भी किसी के साथ ऐसा होता है, तो उसके साथ वाले अगर चाहें, अगर बीमारी को ठीक से समझें, तो बहुत मुमकिन है कि वो बच जाए । दुनिया में कई लोग बचे भी हैं । एक बार जयपुर से दिल्ली आते हुए मिड-वे पर एक लड़की के साथ बिल्कुल ऐसी ही घटना घटी थी और वहाँ मौजूद लोगों में कोई एक शख्स इस विषय को ठीक से समझा हुआ था, इसलिए वो लड़की उसके प्राथमिक उपचार से बच गई, तो आपको यकीन करना ही पड़ेगा । 

            दरअसल, जब अचानक किसी के साथ ऐसा होता है, तो वह दिल का दौरा नहीं होता । यह हृदयघात कहलाता है । हार्ट अटैक और हार्ट फेल में अंतर होता है । हार्ट अटैक दिल की बीमारी होती है, पर इस मामले में हार्ट फेल हो जाता है । इस बीमारी का नाम होता है ‘सडेन कार्डियक अरेस्ट’ Sudden Cardiac Arrest.

            मुझे नहीं पता कि हमारे देश के स्कूलों में इस तरह की चीजें क्यों नहीं पढ़ाई जातीं, पर विदेशों में इस बारे में लोगों को बचपन से ही खूब अागाह कर दिया जाता है ।

            सडेन कार्डियक अरेस्ट शब्द को आप गूगल पर टाइप करें और इस विषय में और जानकारी जुटाएं । इस जानकारी को सिर्फ अपने पास मत रखिए, उसे लोगों तक पहुंचाएं । इसका असली फायदा ही लोगों तक इस जानकारी का पहुंचने का है । सिर्फ आप इस बारे में जान कर अपना भला नहीं कर सकते ।

            कल्पना कीजिए कि जिस वक्त उस आईएएस अधिकारी के साथ उस रेस्त्रां में ये घटना घटी,  अगर किसी व्यक्ति को इस बीमारी के विषय में पता होता,  अगर खुद उनकी आई.पी.एस. पत्नी इस विषय में जानतीं, तो शायद वो अधिकारी बच जाता ।

            सडेन कार्डियक अरेस्ट कोई बीमारी नहीं है । यह हृदयाघात है । कभी भी किसी का भी दिल पल भर के लिए काम करना बंद कर देता है । ठीक वैसे ही, जैसे बिना किसी वज़ह के कई बार घर की बिजली का फ्यूज़ उड़ जाता है । यह भी शरीर का फ्यूज़ उड़ने की तरह है । 

            जब कभी किसी को हृदयाघात हो,  उसकी छाती पर ज़ोर से मारना चाहिए,  इतनी ज़ोर से कि चाहे पसलियां टूट जाएं, पर दिल की धड़कन दुबारा शुरू हो जाए । याद रहे, जितनी जल्दी आपकी समझ में ये बात आ जाएगी कि यह हृदयाघात है, उतनी संभावना सामने वाले के बचने की होती है । एक मिनट के बाद देर होनी शुरू हो जाती है । आपको बस इसे पहचानना है कि यह सडेन कार्डियक अरेस्ट है । 

            ऐसा जब भी हो,  आप पाएंगे कि मरीज की नब्ज रुक गई है । सांस भी रुक गई है । बस यहीं आपको डॉक्टर बुलाने से पहले प्राथमिक उपचार करने की ज़रूरत है । डॉक्टर को ख़बर करें, अस्पताल भी ले जाने की तैयारी करें, पर पहले उसकी छाती पर दोनों हाथों से जोर-जोर से मारें ताकि उसकी सांस लौट आए । ध्यान रहे, अगर सांस तुरंत लौट आती है, तो मरीज़ बच जाता है, वर्ना पाचं मिनट के बाद तो डॉक्टर भी हाथ खड़े कर लेगा और आप इसे ईश्वर का विधान मान कर मन मसोस कर रह जाएंगे । 

            अमेरिका में बहुत से लोगों के साथ ऐसा होता है । वहां दुकानों, मॉल्स में ऐसी मशीन रखी रहती है, जिससे दिल को जिलाने का काम लिया जाता है । बहुत से मरीज बच जाते हैं । वहां के लोगों को इस मशीन को चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है । हमारे यहां डॉ. के. के. अग्रवाल इस बीमारी को लेकर  लोगों को काफी सतर्क करते हैं । वो बताते हैं कि जब भी ऐसा हो, फटाफट सावित्री आसन के ज़रिए मरीज को पहले बचाने की कोशिश करें । याद है न सावित्री और सत्यवान की कहानी....

            सत्यवान को अचानक ऐसा ही हृदयघात हुआ था और सावित्री उसकी छाती पर सिर पटक-पटक कर यमराज से अपने पति की जान लौटाने की गुहार लगा रही थी । उसने उसकी छाती पर इस कदर सिर पटका कि दिल की धड़कन दुबारा शुरू हो गई, और कहा गया कि सावित्री यमराज से अपने मर चुके पति की जान वापस ले आई । 

            मुझे लगता है कि यह कहानी सच्ची होगी, पर जान लौटी होगी उसके पति के थम चुके दिल पर बार-बार हुए प्रहार से । इसीलिए इसके प्राथमिक उपचार को नाम दिया गया है, सावित्री आसन । यानी जब भी आपके आसपास कहीं ऐसा हो, आपको पहली कोशिश करनी है उसकी छाती के बीच दोनों हाथों से तेज प्रहार करने की । 

            मुझे लगता है कि उस अधिकारी को अस्पताल ले जाने से पहले इस तरह का प्राथमिक उपचार हुआ होता तो वो बच जाता । अगर ऐसा ही फिल्मी कलाकार संजीव कुमार के साथ हुआ होता तो वो भी बच जाते । शफी ईनामदार, अमज़द खान भी हृदयाघात से ही मरे थे । उन्हें भी प्राथमिक उपचार मिला होता तो वो आज ज़िंदा होते । पुणें के अपने दफ्तर में बैठा संजय सिन्हा का भाई भी आज ज़िंदा होता, अगर लोगों ने पहले मुझे दिल्ली फोन करने की जगह प्राथमिक उपचार किया होता । अगर लोग गाड़ी ढूंढ कर अस्पताल ले जाने की जगह पहले सावित्री आसन की विद्या को प्रयोग में लाए होते तो शायद मेरा छोटा भाई मेरे पास होता ।

काश !  काश !  काश ! 

            ज़िंदगी में बहुत से काश से आप बच सकते हैं, अगर आप किसी विषय की तह में जाकर उसे समझने की कोशिश करेंगे, अगर आप बीमारी को ठीक से समझने की कोशिश करेंगे । ईश्वरीय विधान से ऊपर कुछ नहीं ।  पर आदमी को कोशिश तो करनी ही चाहिए । 

            मैं तो इतना ही कह सकता हूं कि हमारी सरकार को शिक्षा पाठ्यक्रम में इन विषयों को शामिल करना चाहिए और इन्हें ज़रूर पढ़ाना चाहिए,  ताकि आदमी जीना सीख सके ।

video


मंगलवार, 5 जुलाई 2016

नहाने का वैज्ञानिक तरीका...


            अपने स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन के लिये विशेष ध्यान दें...!

            क्या आपने कभी अपने आस पास ध्यान से देखा या सुना है कि नहाते समय बुजुर्ग को लकवा लग गया ?

            दिमाग की नस फट गई ( ब्रेन हेमरेज)  हार्ट अटैक आ गया ।

            छोटे बच्चे को नहलाते समय वो बहुत कांपता रहता है, डरता है और माता समझती है की नहाने से डर रहा है ।

           लेकिन ऐसा नहीँ है; असल मे ये सब गलत तरीके से नहाने से होता है ।

            दरअसल हमारे शरीर में गुप्त विद्युत् शक्ति रुधिर (खून) के निरंतर प्रवाह के कारण पैदा होते रहती है, जिसकी स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक दिशा ऊपर से आरम्भ होकर नीचे पैरो की तरफ आती है ।

            सर में बहुत महीन रक्त् नालिकाये होती है जो दिमाग को रक्त पहुँचाती है ।

            यदि कोई व्यक्ति निरंतर सीधे सर में ठंडा पानी डालकर नहाता है तो ये नलिकाएं सिकुड़ने या रक्त के थक्के जमने लग जाते हैं और जब शरीर इनको सहन नहीं कर पाता तो ऊपर लिखी घटनाएं वर्षो बीतने के बाद बुजुर्गो के साथ हो जाती हैं ।

            सर पर सीधे पानी डालने से हमारा सर ठंडा होने लगता है, जिससे हृदय को सिर की तरफ ज्यादा तेजी से रक्त भेजना पड़ता है, जिससे या तो बुजुर्ग में हार्ट अटैक या दिमाग की नस फटने की अवस्था हो सकती है ।

            ठीक इसी तरह बच्चे का नियंत्रण तंत्र भी तुरंत प्रतिक्रिया देता है जिससे बच्चे के काम्पने से शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है, और माँ समझती है की बच्चा डर रहा है ।

            गलत तरीके से नहाने से बच्चे की हृदय की धड़कन अत्यधिक बढ़ जाती है स्वयं परीक्षण करिये ।
.
            तो आईये हम आपको नहाने का सबसे सही तरीका बताते है ।

            बाथरूम में आराम से बैठकर या खड़े होकर सबसे पहले पैर के पंजो पर पानी डालिये, रगड़िये, फिर पिंडलियों पर, फिर घुटनो पर, फिर जांघो पर पानी डालिये और हाथों से मालिश करिये । फिर हाथो से पानी लेकर पेट को रगड़िये, फिर कंधो पर पानी डालिये, फिर अंजुली में पानी लेकर मुँह पर मलिए ।  हाथों से पानी लेकर सर पर मलिए ।

            इसके बाद शॉवर के नीचे खड़े होकर या बाल्टी सर पर उड़ेलकर नहा सकते हैं ।

            इस प्रक्रिया में केवल 1 मिनट लगता है लेकिन इससे आपके जीवन की रक्षा होती है, और इस 1 मिनट में शरीर की विद्युत प्राकृतिक दिशा में ऊपर से नीचे ही बहती रहती है क्योंकि विद्युत् को आकर्षित करने वाला पानी सबसे पहले पैरो पर डाला गया है ।

            बच्चे को इसी तरीके से नहलाने पर वो बिलकुल कांपता डरता नहीं है।

            कृपया इस जानकारी को आगे भी बढावें, यह छोटे बच्चों ,बुज़ुर्गों के लिये विशेष उपयोगी है ।

सोमवार, 4 जुलाई 2016

R.O. के जल का लगातार सेवन बन सकता है मृत्यु का कारण:--


            चिलचिलाती गर्मी में कुछ मिले  या ना मिले पर शरीर को पानी जरूर मिलना चाहिए ।  अगर पानी RO का हो तो, क्या बात है !  परंतु क्या वास्तव में हम RO  के पानी को शुद्ध पानी मान सकते हैं  ?

            जवाब आता है बिल्कुल नहीं । और यह जवाब विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) की तरफ से दिया गया है ।

            विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि इसके लगातार सेवन से हृदय संबंधी विकार, थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन, सरदर्द आदि दुष्प्रभाव पाए गए हैं । यह कई शोधों के बाद पता चला है कि इसकी वजह से कैल्शियम और  मैग्नीशियम पानी से पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं जो कि शारीरिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है ।

            RO के पानी के लगातार इस्तेमाल से शरीर मे विटामीन B-12 की कमी भी होने लगती है ।

            वैज्ञानिकों के अनुसार मानव शरीर 500 टीडीएस तक सहन करने की क्षमता रखता है परंतु RO में 18 से 25 टीडीएस तक पानी की शुद्धता होती है जो कि नुकसानदायक है । इसके विकल्प में क्लोरीन को रखा जा सकता है जिसमें लागत भी कम होती है एवं पानी के आवश्यक तत्व भी सुरक्षित रहते हैं । जिससे मानव का शारीरिक विकास अवरूद्ध नहीं होता ।

            जहां एक तरफ एशिया और यूरोप के कई देश RO पर प्रतिबंध लगा चुके हैं वहीं भारत में RO की मांग लगातार बढ़ती जा रही है  और कई विदेशी कंपनियों ने यहां पर अपना बड़ा बाजार बना लिया है । स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना और जागरूक करना ज़रूरी हैं । अतः अब शुद्ध पानी के लिए नए अविष्कारों की जरूरत है ।

            याद रखें की लम्बे समय तक RO  का पानी, लगातार पीने से, शरीर कमजोर और बिमारीयों का घर बन जाता है । अत: प्राकृतिक (खनीज युक्त) पानी परंपरागत तरीकों से साफ कर के पीना, हितकर है।
 

रविवार, 3 जुलाई 2016

"प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली"



पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात,
सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात !

धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार,
दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार !

ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर,
कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर !

प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप,
बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप !

ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार,
करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाढार !

भोजन करें धरती पर, अल्थी पल्थी मार,
चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार !

प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस,
सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश !

दही उडद की दाल सँग, पपीता दूध के संग,
जो खाएं इक साथ में, जीवन हो बदरंग !

प्रातः दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार,
तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार ! 

भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार,
डाक्टर, ओझा, वैद्य का, लुट जाए व्यापार  !

देश,भेष,मौसम यथा, हो जैसा परिवेश,
वैसा भोजन कीजिये, कहते सखा सुरेश !

इन बातों को मान कर, जो करता उत्कर्ष,
जीवन में पग-पग मिले, उस प्राणी को हर्ष !

घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर,
एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर !

अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास,
पानी पीजै बैठकर, कभी न आवें पास !

रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय,
सौगंध राम की खाइ के, तुरत छोड दो चाय !

सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश,
भोजन लीजै रात में, जैसे रंक सुरेश !
               
देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल,
अपच,आंख के रोग सँग, तन भी रहे निढाल !

टूथपेस्ट-ब्रश छोडकर, हर दिन दोनो जून,
दांत करें मजबूत यदि, करिएगा दातून !

हल्दी तुरत लगाइए, अगर काट ले श्वान,
खतम करे ये जहर को, कह गए कवि सुजान !

मिश्री, गुड, खांड, ये हैं गुण की खान,
पर सफेद शक्कर सखा, समझो जहर समान !

चुंबक का उपयोग कर, ये है दवा सटीक,
हड्डी टूटी हो अगर, अल्प समय में ठीक !

दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ,
बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ !

हँसना, रोना, छींकना, भूख, प्यास या प्यार,
क्रोध, जम्हाई रोकना, समझो बंटाढार !

सत्तर रोगों को करे, चूना हमसे दूर,
दूर करे ये बाझपन, सुस्ती अपच हुजूर !

यदि सरसों के तेल में, पग नाखून डुबाय,
खुजली, लाली, जलन सब, नैनों से गुमि जाय !

भोजन करके जोहिए, केवल घंटा डेढ,
पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड !

जो भोजन के साथ ही, पीता रहता नीर,
रोग एक सौ तीन हों, फुट जाए तकदीर !

पानी करके गुनगुना, मेथी देव भिगाय,
सुबह चबाकर नीर पी, रक्तचाप सुधराय !

अलसी, तिल, नारियल, घी, सरसों का तेल,
यही खाइए नहीं तो, हार्ट समझिए फेल !

पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सु जान,
श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान !

तेल वनस्पति खाइके, चर्बी लियो बढाइ,
घेरा कोलेस्टरॉल तो, आज रहे चिल्लाय !
  
अल्यूमिन के पात्र का, करता  जो उपयोग,
आमंत्रित करता सदा, वह अडतालीस रोग !

फल या मीठा खाइके, तुरत न पीजै नीर,
ये सब छोटी आंत में, बनते विषधर तीर !

चोकर खाने से सदा, बढती तन की शक्ति,
गेहूँ मोटा पीसिए, दिल में बढे विरक्ति !

नींबू पानी का सदा, करता जो उपयोग,
पास नहीं आते कभी, यकृति-आंत के रोग !

दूषित पानी जो पिए, बिगडे उसका पेट,
ऐसे जल को समझिए, सौ रोगों का गेट !

रोज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय,
बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय !

भोजन करके खाइए, सौंफ,  गुड, अजवान,
पत्थर भी पच जायगा, जानै सकल जहान !

लौकी का रस पीजिए, चोकर युक्त पिसान,
तुलसी, गुड, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान !

हृदय रोग, खांसी और आंव करें बदनाम,
दो अनार खाएं सदा, बनते बिगडे काम !

चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खावे,
ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगावे !

सौ वर्षों तक वह जिए, लेत नाक से सांस,
अल्पकाल जीवें, करें, मुंह से श्वासोच्छ्वास !

सितम, गर्म जल से कभी, करिये मत स्नान,
घट जाता है आत्मबल, नैनन को नुकसान !

हृदय रोग से आपको, बचना है श्रीमान,
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान !

अगर नहावें गरम जल, तन-मन हो कमजोर,
नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुंओर !

तुलसी का पत्ता करें, यदि हरदम उपयोग,
मिट जाते हर उम्र में, तन के सारे रोग !


Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...