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सोमवार, 23 मई 2016

एक चमत्कारिक उपचार फल - नोनी.



           बेशक नोनी (मोरिंडा सिट्रोफोलिया) नामक यह फल किसी बीमारी का इलाज़ तो नहीं मगर इसके सेवन से कोई भी बीमारी नही बच सकती, चाहे वो एड्स हो या कैंसर ।

           आज नोनी फल आम लोगों के लिए जितना गुमनाम है, सेहत के लिए उतना ही फायदेमंद। इसके रूप में वैज्ञानिकों को एक ऐसी संजीवनी हाथ लगी है जो स्वास्थ्य के लिए अमृत समान है ।

           अस्थमा, गठिया, मधुमेह, दिल की बीमारी, नपुंसकता, स्त्रियों की बीमारियां एवम् बांझपन सहित कई बीमारियों के इलाज में यह रामबाण साबित हो रहा है ।

           मात्र यही नही बल्कि पान-मसाला, गुटखा, तंबाकू की जिन्हें आदत है वे भी अगर नोनी फल खायेंगे या उसका जूस पिएंगे तो उनकी इस तरह की तरह आदतें छूट जाएँगी और कैंसर भी नही होगा । इस फल से प्रतिरोधक क्षमता इतनी अद्भुत  तरीके से बढ़ती है की फिर एड्स ही क्यों न हो यह उसको भी यह क्योर करने का दम रखता है ।

            एक ताजा शोध के मुताबिक नोनी फल कैंसर व लाइलाज एड्स जैसी खतरनाक बीमारियों में भी कारगर साबित हो रहा है । वहीं भारत में वर्ल्ड नोनी रिसर्च फाउंडेशन सहित कई शोध संस्थान शोध कर रहे हैं ।

           हाल ही में नोनी के इन रहस्यमयी गुणों का खुलासा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के एक सेमिनार में हुआ। कृषि वैज्ञानिक नोनी को मानव स्वास्थ्य के लिए प्रकृति की अनमोल देन बता रहे हैं ।

           इन वैज्ञानिकों के अनुसार समुद्र तटीय इलाकों में तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, गुजरात, अंडमान निकोबार, मध्यप्रदेश सहित नौ राज्यों में 653 एकड़ में इसकी खेती हो रही है ।

           वहीं कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व चेयरमैन व वर्ल्ड नोनी रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. कीर्ति सिंह ने कहा – “इस फल में दस तरह के विटामिन, खनिज पदार्थ, प्रोटीन, फोलिक एसिड सहित 160+ पोषक तत्व हैं ।”

           उन्होंने कहा कि – “इसके इतने पोषक तत्वों की मौजूदगी के चलते उच्च रक्तचाप, हृदयरोग, थायराईड, मधुमेह, गठिया, सर्दी जुकाम सहित अनेक बीमारियों में औषधि के रूप में काम आता है ।”

           उन्होंने यह भी बताया कि, “यह फल एक बेहतरीन एंटी ऑक्सिडेंट है, यदि शुरू से इसका सेवन किया जाए तो कैंसर सहित कोई भी रोग शरीर में सामान्यतः नहीं होगा, ये फाउंडेशन कैंसर व एड्स पर नोनी के प्रभाव के शोध कर रहे  हैं ।”


          शहर में लगभग 25 एड्स मरीजों को नियमित नोनी का जूस पीने को दिया गया और लगातार उन पर ध्यान रखा गया जिसके पश्चात सकारात्मक परिणाम देखने को मिले और अब ज्यादातर मरीज बेहतर महसूस करते हैं।

          वहीं इसके अलावा मुंबई, बेंगलुर, हैदराबाद, चेन्नई सहित कई मेट्रो शहरों में दर्जनों ऐसे कैंसर पीड़ितों को यह दिया जा रहा है, जिन्हें अस्पतालों ने लाईलाज बताकर डिस्चार्ज कर दिया था ।


          ये भी देखा जा रहा है कि जिन मरीजों को नोनी दिया जा रहा है, उनकी उम्र भी बढ़ गई है । मगर अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि नोनी के सेवन से कैंसर व एड्स पूरी तरह ठीक ही हो जाएगा, शोध जारी है ।

           वहीं नोनी के बारे में जागरूकता फैलने पर अब इस फल को लेकर दूसरे देशों में भी इस पर शोध चल रहे हैं । इस फल के उन गुणों और तत्वों के बारे में परीक्षण चल रहे हैं, जिस कारण ये महत्त्वपूर्ण हो जाता है ।


           इस समय नोनी की उपयोगिता को ध्यान रखकर ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने कृषि स्नातक पाठ्यक्रम में दो साल से नोनी को शामिल कर लिया है । वस्तुत: नोनी हमारी सांकृतिक धरोहर है और हमें यह जिस रुप में भी मिले,  इसका उपयोग करते हुए इससे मिलने वाले शारीरिक लाभ अवश्य उठाना चाहिये ।



नोनी के प्रयोग में एक आवश्यक सावधानी भी -

           चूंकि नोनी हमारे शरीर से टॉक्सिंस (देहविष) बाहर निकालने का कार्य प्रथमतः करता है और इसी लिये उपरोक्त बीमारियों में कारगर तरीके से सक्षम माना गया है किंतु ये टॉक्सिंस जो नोनी की मदद से शरीर से बाहर आने की स्थिति में आ चुके होंगे वे अंततः मूत्रमार्ग से ही हमारे शरीर से पूरी तरह से बाहर हो पाएंगे और यदि किसी भी कारण से किसी भी व्यक्ति को किडनी से सम्बन्धित कोई भी समस्या शरीर में बनी रहती हो तो नोनी उनके काम का इसलिये नहीं है कि मूत्रमार्ग में एकत्र वो विषॉक्तता यदि इसे लेने वाले की किडनी बाहर नहीं निकाल पाई तो उसकी यही एक बढी हुई समस्या चेहरे पर सूजन के साथ ही दूसरी अनेक समस्याओं को शरीर में बढा सकती है अतः वे सभी लोग जो पेशाब अथवा किडनी की किसी भी समस्या से ग्रसित हों वे नोनी का प्रयोग पूरी तरह से सावधान रहकर ही करें अन्यथा बिल्कुल न करें । 
  

रविवार, 22 मई 2016

भीषण गर्मी में ऐसे करें अपना बचावः-



          इस समय देश भर में सूरज आग उगलते हुए अपनी प्रखर तेज किरणों से वायुमंडल में तापमान व रुखापन बढाकर मनुष्यों के शरीर के ताप की भी निरन्तर वृद्धि कर रहा है जिसके कारण थोडी भी लापरवाही से शरीर में निर्जलीकरण, लू लगना, चक्कर आना, घबराहट, नकसीर फूटना, उल्टी-दस्त जैसी कई समस्याएँ और बीमारियाँ आम तौर पर बढ रही हैं-

इन बीमारियों के होने के प्रमुख कारण-

          1.  गर्मी के मौसम में खुले शरीर,  नंगे सर,  नंगे पांव धूप में चलना ।

          2.  तेज गर्मी में घर से खाली पेट अथवा प्यासी अवस्था में घर से निकलना । 

          3.  कूलर या एअर-कंडीशनर से निकलकर तुरंत धूप में निकल जाना ।

          4.  धूप से आते ही तुरंत ठंडा पानी पीना या तत्काल एअर-कंडीशनर अथवा कूलर में बैठ जाना । 

          5.  तेज मिर्च-मसाले, बहुत गर्म खाना और अधिक चाय पीना । 

          6.  सूती ढीले कपडों के स्थान पर सिंथेटीक व कसे हुए कपडे पहनना । 

          कुछ छोटी-छोटी किंतु महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखकर हम इन समस्याओं से बचते हुए इस मौसम का भी आनंद ले सकते हैं-

          गर्मी में मधुर, शीतल व ठंडे द्रव के खान-पान को अधिक प्राथमिकता दें । घर से जब भी निकलें कुछ खाकर व पानी पीकर ही निकलें . भूखे पेट घर से नहीं निकलें । इस मौसम में ज्यादा भारी व बासी भोजन न करें क्योंकि हमारी जठराग्नि इस समय मंद रहती है इसलिये भारी खाना पूरी तरह से पचा नहीं पाती और जरुरत से ज्यादा भारी खाना खाने पर उल्टी-दस्त की समस्या हो सकती हैं । इस मौसम में सूती व हल्के रंग के कपडों को ही प्राथमिकता देना चाहिये । सिर व चेहरे को रुमाल, केप अथवा टोपी से ढंककर ही निकलना चाहिये । प्याज का सेवन करना चाहिये । ठंडा मतलब आम, केरी का पना, खस, चंदन, गुलाब, संतरे का शर्बत, दही की लस्सी, मट्ठा, छाछ आदि का सेवन अधिक मात्रा में करते रहना चाहिये । 

वैसे हमारे मजाकिया भाईयों की नजर में यह मौसम भी 
इस रुप में परिभाषित है- 




चित्र सौजन्य - WhatsApp

शनिवार, 21 मई 2016

CFL - लापरवाही के खतरनाक परिणाम...


           यह तस्वीर कनाडा के रहने वाले स्मिथ की है जिनका पैर अब काटा जाना है। इन्हें CFL बल्ब का इस्तेमाल या यूँ कहें कि इस्तेमाल में की गई लापरवाही बहुत भारी पड़ी।

          यह तो हम सब जानते हैं कि CFL बल्ब कितनी बिजली बचाते हैं लेकिन ज़्यादातर लोग यह नहीं जानते कि इन बल्बों में पारा पाया जाता है जो कि शरीर में चले जाने पर बहुत ही घातक साबित होता है। स्मिथ ने ऐसे ही एक बल्ब के ठन्डे होने का इंतज़ार नहीं किया और उसे होल्डर से निकालकर बदलने की कोशिश करते हुए उसे ज़मीन पर गिरा दिया। ज़मीन पर गिरते ही बल्ब टूट गया और कांच के टुकड़े बिखर गए। स्मिथ नंगे पैर थे और अंधेरे में उनका पैर कांच के एक टुकड़े पर पड़ गया और बल्ब में उपस्थित पारा घाव के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर गया । उन्हें 2 महीने  ICU में रखा गया और अब उन्हें अपने पैर को खो देने का डर है ।
          CFL के संबंध में पारा ही एक ख़तरा नहीं है, कई और भी मसले हैं, लेकिन उसके बारे में स्वास्थ्य संजीवनी पर फ़िर कभी चर्चा करेंगे, आज जानना ज़रूरी है कि CFL के टूट जाने पर क्या करें-

         1.  कभी भी तुरंत CFL ना बदलें । उसके ठन्डे होने का इंतज़ार करें ।

         2.  CFL  टूट जाने पर तुरंत कमरे से निकल जाएं,  ध्यान रखें कि पैर कांच के टुकड़े पर ना पड़ जाए ।

          3.  पंखे एसी इत्यादि बंद कर दें जिससे पारा फैल ना सके ।

          4. कम से कम 15-20 मिनट बाद कमरे में प्रवेश करके टूटे हुए कांच को साफ़ करें । पंखा बंद रखें और मुंह को ढक कर रखें, दस्ताने पहने और कार्डबोर्ड की मदद से कांच समेटें, झाड़ू का इस्तेमाल ना करें क्यूंकि इससे पारे के फ़ैलने का डर रहता है। कांच के बारीक कण टेप की मदद से चिपका कर साफ़ करें।

           5.  कचरा फेंकने के बाद साबुन से हाथ धोना ना भूलें ।

          6.  यदि किसी कारणवश चोट लग जाए तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं और उसे चोट के बारे में सारी जानकारी दें।
          सीसे और आर्सेनिक से भी कहीं अधिक ज़हरीला और घातक पारा होता है। इसलिए CFL का प्रयोग करते समय बहुत सावधानी रखें।

          इस जानकारी को अधिक से अधिक शेयर करें तथा अपने परिचितों को भी बताएं ताकि कोई अन्य ऐसी दुर्घटना के चपेट में ना आए ।


सोर्स - WhatsApp.

शुक्रवार, 20 मई 2016

सॉफ्टड्रिंक्स में समाई हुई डायबटीज -




           अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार पूरी दुनिया में हर वर्ष एक लाख अस्सी हजार मौतें सॉफ्टड्रिंक्स की वजह से होती हैं, जो कि केंसर और एड्स से होने वाली कुल मौतों से भी ज्यादा है ।

          आज विश्व के नवजवानों में डायबटीज की बीमारी बहुत तेजी से फ़ैल रही है. हर साल कम से कम एक करोड़ लोग इसके शिकार हो रहे हैं. पहले यह बीमारी इस तरह नहीं फैलती थी और इस रोग को पीढ़ीगत रोग माना जाता था. आखिर क्या कारण है कि आज डायबटीज एक महामारी से भी बड़ी बीमारी बनती जा रही है ?

          इसका एक मात्र कारण सॉफ्टड्रिंक्स पीने और पिलाने का चलन हो गया है. एक छोटी सी 350 मि.ली. की बाटल पीने के बाद उसके कारण हमारे शरीर के अति महत्वपूर्ण अंगो जैसे कि लीवर, किडनी और हार्ट पर क्या असर पड़ता है; आइये इसकी हम एक झलक देखते हैं –

          1.  10 मिनिट में हमारे शरीर की कुल दैनिक जरूरत से ज्यादा 10 चम्मच शक्कर हमारे अंदर पहुँच जाती है. सॉफ्टड्रिंक में मौजूद फास्फोरिक एसिड इस मिठास को हमे महसूस नहीं होने देता, वर्ना हमे उल्टी हो जाती और यह शुगर बाहर निकल जाती.

          2.  20 मिनिट बाद हमारा शरीर बहुत सारा इन्सुलिन तेजी से बनाता है और ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है; फिर इतनी शुगर को पचाने के लिये हमारे लीवर को ओवरलोडिंग में काम कर इस शुगर को फेट में परिवर्तित करना पड़ता है, जिससे हमारा मोटापा बढ़ने लगता है.

          3.  40 मिनिट बाद सॉफ्टड्रिंक में मौजूद कैफीन शरीर में समा जाती है. इस कारण हमारी आखों की पुतलियाँ ज्यादा खुल जाती हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जिसके कारण ह्रदय की भी ओवरलोडिंग होने लगती है. हार्ट को और ज्यादा एनर्जी देने के लिये लीवर को बहुत ज्यादा शुगर ब्लड में पंप कर ह्रदय की तीव्र गतिशीलता बनाये रखने की कोशिश की जाती है.

          4.  45 मिनिट बाद शरीर में डोपमाइन नामक केमिकल बनता है, जिससे मन को आनंद का एहसास होता है. इस तरह वह मनुष्य इस सॉफ्टड्रिंक का आदी बन जाता है. यह क्रिया ऐसी ही होती है जैसे कि हेरोइन आदि नशीली वस्तुओं को लेने के बाद होती है.

          5.  60 मिनिट बाद सॉफ्टड्रिंक में मौजूद फास्फोरिक एसिड हमारे शरीर के पोषण के लिये जरूरी केल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक को हमारी आँतों में ही रोक लेता है. फिर केफीन इनसे क्रिया कर इन्हें मल-मूत्र के साथ शरीर से बाहर कर देता है. इस तरह हमारे शरीर के पोषण व विकास के लिये जरूरी केल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक बिना किसी फायदे के निष्फल हो जाते हैं.

          6.  इम्पीरियल कॉलेज लंदन की रिसर्च के अनुसार सॉफ्टड्रिंक की हर बोतल के साथ टाइप-2 डायबटीज का खतरा 20% ज्यादा बढ़ जाता है. इसका कारण यह है कि सॉफ्टड्रिंक में मौजूद कैरेमल नामक रसायन हमारे शरीर में इन्सुलिन बनने की प्रक्रिया को धीमे कर देता है. फिर एक दिन ऐसा आता है, जब हमारा शरीर इन्सुलिन बनाना पूरी तरह बंद कर देता है और हमें भी डायबटीज हो जाती है.

          7.  प्रो. निक वेअरहेम लंदन के अनुसार अब वक़्त आ गया है, जब हमें चाहिये कि सॉफ्टड्रिंक की बोतलों के प्रयोग पर भी तम्बाकू उत्पादों की तरह ही स्वास्थ्य चेतावनी रहे.

शनिवार, 14 मई 2016

आयुर्वेदिक दोहे


दही मथें माखन मिले,  केसर संग मिलाय,
होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय.
.

बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल,
नीलगिरी का तेल लें, सूंघें डाल रुमाल.

अजवाइन को पीसिये, गाढ़ा लेप लगाय,
चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय.

अजवाइन को पीस लें,  नीबू संग मिलाय,
फोड़ा-फुंसी दूर हों,  सभी बला टल जाय.

अजवाइन-गुड़ खाइए, तभी बने कुछ काम,
पित्त रोग में लाभ हो, पायेंगे आराम.

ठण्ड लगे जब आपको, सर्दी से बेहाल,
नीबू मधु के साथ में, अदरक पियें उबाल.

अदरक का रस लीजिये. मधु लेवें समभाग,
नियमित सेवन जब करें, सर्दी जाए भाग.


रोटी मक्के की भली, खा लें यदि भरपूर,
बेहतर लीवर आपका, टी० बी० भी हो दूर.

गाजर रस संग आँवला, बीस औ चालिस ग्राम,
रक्तचाप हिरदय सही, पायें सब आराम.


शहद आंवला जूस हो, मिश्री सब दस ग्राम,
बीस ग्राम घी साथ में, यौवन स्थिर काम.

चिंतित होता क्यों भला, देख बुढ़ापा रोय,
चौलाई पालक भली, यौवन स्थिर होय.


लाल टमाटर लीजिए, खीरा सहित सनेह,
जूस करेला साथ हो, दूर रहे मधुमेह.

प्रातः संध्या पीजिए, खाली पेट सनेह,
जामुन-गुठली पीसिये, नहीं रहे मधुमेह.


सात पत्र लें नीम के, खाली पेट चबाय,
दूर करे मधुमेह को, सब कुछ मन को भाय.

सात फूल ले लीजिए, सुन्दर सदाबहार,
दूर करे मधुमेह को, जीवन में हो प्यार.


तुलसीदल दस लीजिए, उठकर प्रातःकाल,
सेहत सुधरे आपकी, तन-मन मालामाल.

थोड़ा सा गुड़ लीजिए, दूर रहें सब रोग,
अधिक कभी मत खाइए, चाहे मोहनभोग.


अजवाइन और हींग लें, लहसुन तेल पकाय,
मालिश जोड़ों की करें, दर्द दूर हो जाय.

ऐलोवेरा-आँवला, करे खून में वृद्धि,
उदर व्याधियाँ दूर हों, जीवन में हो सिद्धि.


दस्त अगर आने लगें, चिंतित दीखे माथ,
दालचीनी का पाउडर, लें पानी के साथ.

मुँह में बदबू हो अगर, दालचीनि मुख डाल,
बने सुगन्धित मुख महक, दूर होय तत्काल.


कंचन काया को कभी, पित्त अगर दे कष्ट,
घृतकुमारि संग आँवला, करे उसे भी नष्ट.

बीस मिली रस आँवला, पांच ग्राम मधु संग,
सुबह शाम में चाटिये, बढ़े ज्योति सब दंग.


बीस मिली रस आँवला, हल्दी हो एक ग्राम,
सर्दी कफ तकलीफ में, फ़ौरन हो आराम.

नीबू बेसन जल शहद, मिश्रित लेप लगाय,
चेहरा सुन्दर तब बने, बेहतर यही उपाय.


मधु का सेवन जो करे, सुख पावेगा सोय,
कंठ सुरीला साथ में, वाणी मधुरिम होय.

पीता थोड़ी छाछ जो, भोजन करके रोज,
नहीं जरूरत वैद्य की, चेहरे पर हो ओज.


ठण्ड अगर लग जाय जो, नहीं बने कुछ काम,
नियमित पी लें गुनगुना, पानी दे आराम.

कफ से पीड़ित हो अगर, खाँसी बहुत सताय,
अजवाइन की भाप लें, कफ तब बाहर आय.


अजवाइन लें छाछ संग, मात्रा पाँच गिराम,
कीट पेट के नष्ट हों, जल्दी हो आराम.

छाछ हींग सेंधा नमक, दूर करे सब रोग, 

जीरा उसमें डालकर, पियें सदा यह भोग ।

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