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गुरुवार, 23 जून 2016

असहायों का एक सहारा...


            राजस्थान मे उदयपुर शहर से 20 कि.मी. दूर उमरड़ा एक गांव है वहां पर एक पैसिफिक नाम का हॉस्पिटल है । यहां हर तरह की बिमारी का निःशुल्क ईलाज व आपरेशन किया जा रहा है, चाहे इलाज दस लाख रूपये तक का ही क्यों ना हो, पुर्णतः निःशुल्क है । वहां मरीज के साथ मरीज कि देखभाल करने वालों के रहने व खाने-पीने की व्यवस्था भी निःशुल्क है ।

            कृपया आपके पास जितने भी माध्यम हों उनके द्वारा इस जानकारी को शेअर कर प्रसारित करें जिससे की सभी बिमार भाई-बहनों को  सही व निःशुल्क इलाज का भरपुर फायदा मिल सके । अधिक जानकारी के लिये इस 8384969595 वाटसप नम्बर पर श्री महेश्वर सुखवाल से सम्पर्क करें । 

            सभी को जानकारी देना ये भी एक बहुत बड़ा धर्म का कार्य है कृपया इस धर्म के कार्य को करके पुण्य कमाये ।

            राजस्थान के उदयपुर शहर के इस पेसिफिक हॉस्पिटल मे हर  तरह कि बिमारी का निःशुल्क इलाज व आपरेशन किया जा रहा है । अधिक से अधिक बिमार भाई बहन इस सुविधा का लाभ लेवें । वहां एक रूपये से एक करोड़ रूपये तक का इलाज व सभी प्रकार के आपरेशन भी पूर्णतः निःशुल्क हैं ।

            पेसिफिक इंस्टीट्युट आफ मेडिकल सांईसेज

            {मेडिकल काउन्सिल आफ इण्डिया के द्वारा मान्यता प्राप्त}

            विश्व प्रसिद्ध चिकित्सकों द्वारा अन्तराष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा सेवाएँ

            अम्बुआ रोड़, गांव उमरड़ा, तहसील गिर्वा, उदयपुर 313015 (राजस्थान)

            भर्ती, जांच, चिकित्सा, आपरेशन, जेनेरिक दवाईंयाँ निशुल्क उपलब्ध हैं ।

            *आधुनिकतम उपकरण *विश्वनिय जाँच *दवाईंया निशुल्क *सभी आपरेशन निशुल्क *सभी तरह कि जाँचे निशुल्क ।

            निशुल्क सुविधाएँ:
            *ओपीडी   *चिकित्सा सुविधा   *वार्ड/आंतरिक सुविधा   *माईनर /मेजर ओटी   *फिजियोथेरेपी   *प्रयोगशालाएं   *ईसिजी सेवाएँ व   *फार्मेसी सेवाएँ ।

            24 घण्टे इमरजेन्सी सेवाएँ,  प्रतिदिन 8 से 10 आपरेशन  (रविवार छोड़कर)

            हॉस्पिटल के सम्पर्क नम्बर
            09352054115,  09352011351,  09352011352

            इस जानकारी का अधिकतम प्रसार करके भी असिम पुण्यों की प्राप्ति करें ।


सोर्स : जानकारी - WhatsApp.      चित्र सौजन्य : Google  

    

शनिवार, 18 जून 2016

फल, मेवे, सब्जियां व अनाज और उनके गुणधर्म.

1.   केला:
       ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है, हड्डियों को मजबूत बनाता है,  हृदय की सुरक्षा करता है, अतिसार में लाभदायक है, खांसी में हितकारी है।
2.  जामुन: 
        केन्सर की रोक थाम, हृदय की सुरक्षा,कब्ज मिटाता है, स्मरण शक्ति बढाता है, रक्त शर्करा नियंत्रित करता है । डायबिटीज में अति लाभदायक ।
3.  सेवफ़ल:
      हृदय की सुरक्षा करता है, दस्त रोकता है, कब्ज में फ़ायदेमंद है, फ़ेफ़डों की शक्ति बढाता है.
4.  चुकंदर:
       वजन घटाता है, ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है, अस्थिक्षरण रोकता है, केंसर के विरुद्ध लडता है, हृदय की सुरक्षा करता है ।
5.  पत्ता गोभी:
        बवासीर में हितकारी है, हृदय रोगों में लाभदायक है, कब्ज मिटाता है, वजन घटाने  में सहायक है ।  केंसर में फ़ायदेमंद है।
6.  गाजर:
        नेत्र ज्योति वर्धक,  केंसर प्रतिरोधक,  वजन घटाने मेँ सहायक है, कब्ज मिटाता है,  हृदय की सुरक्षा करता है ।
 7. फ़ूल गोभी:
        हड्डियों को मजबूत बनाता है, स्तन केंसर से बचाव करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के केंसर में भी उपयोगी है, चोंट-खरोंच ठीक करता है ।
8.  लहसुन:
        कोलेस्टरॉल घटाती है,  रक्तचाप घटाती है, कीटाणुनाशक है, केंसर से लडती  है  ।
9.  नींबू:
        त्वचा को मुलायम बनाता है,  केंसर अवरोधक है,  हृदय की सुरक्षा करता  है,  ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है,  स्कर्वी रोग नाशक है ।
10.अंगूर:
        रक्त प्रवाह वर्धक है,  हृदय की सुरक्षा करता है,  केंसर से लडता है,  गुर्दे की पथरी नष्ट करता है,  नेत्र ज्योति वर्धक है ।
11.  आम:
        केंसर से बचाव करता है, थायराईड रोग में हितकारी है, पाचन शक्ति बढाता है, याददाश्त की कमजोरी में हितकर है ।
12.  प्याज:
        फ़ंगस रोधी गुण हैं,  हार्ट अटेक की रिस्क को कम करता है । जीवाणु नाशक है, केंसर विरोधी है और खराब कोलेस्टरोल को घटाता है।
14.  अलसी के बीज:
        मानसिक शक्ति वर्धक है,  रोग प्रतिकारक शक्ति को ताकत देता है, डायबिटीज में उपकारी है,  हृदय की सुरक्षा करता है,  पाचन शक्ति को ठीक करता है।
15.  संतरा:
        हृदय की सुरक्षा करता है,  रोग प्रतिकारक शक्ति उन्नत करता है, श्वसन पथ के विकारों में लाभकारी है, केंसर में हितकारी है ।

 16.  टमाटर:
        कोलेस्टरॉल कम करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के स्वास्थ्य के लिये उपकारी है, केंसर से बचाव करता है,  हृदय की सुरक्षा   ।
17.  पानी:
        गुर्दे की पथरी नाशक है,  वजन  घटाने में सहायक है,  केंसर के विरुद्ध लडता है,  त्वचा के चमक बढाता है ।
18.  अखरोट:
        मूड उन्नत करन में सहायक है,  मेमोरी  पावर बढाता है, केंसर से लड सकता है,  हृदय रोगों से बचाव करता है,  कोलेस्टरोल घटाने मं मददगार है।
19.  तरबूज:
        स्ट्रोक रोकने में उपयोगी है, प्रोस्टेट के स्वास्थ्य के लिये हितकारी है, रक्तचाप घटाता है,  वजन कम करने में सहायक है ।
20.  अंकुरित गेहूं:
        बडी आंत के केंसर से लडता है, कब्ज प्रतिकारक है, स्ट्रोक से रक्षा करता है,  कोलेस्टरोल कम करता है,  पाचन सुधारता है।
21.  चावल:
        किडनी स्टोन में हितकारी है,  डायबीटीज में लाभदायक है, स्ट्रोक से बचाव करता है, केंसर से लडता है,  हृदय की सुरक्षा करता है ।
22.  आलू बुखारा:
        हृदय रोगों से बचाव करता है,  बुढापा जल्द आने से रोकता है, याददाश्त बढाता है, कोलेस्टरोल घटाता है, कब्ज प्रतिकारक है।
23.  पाईनएपल:
        अतिसार (दस्त) रोकता है,  वार्ट्स (मस्से)  ठीक करता है,  सर्दी,ठंड से बचाव करता है, अस्थिक्षरण रोकता है ।  पाचन सुधारता है ।

24.  जौ, जई:
        कोलेस्टरोल घटाता है, केंसर से लडता है,  डायबिटीज में उपकारी है, कब्ज प्रतिकारक्  है,  त्वचा पर शाईनिंग लाता है।
25.  अंजीर:
        रक्तचाप नियंत्रित करता है, स्ट्रोक्स से बचाता है,  कोलेस्टरोल कम करता है,  केंसर से लडता है, वजन घटाने में सहायक है।
26.  शकरकंद:
        आंखों की रोशनी बढाता है, मूड उन्नत करता है,  हड्डिया बलवान बनाता है,  केंसर से लडता है ।




एक श्रेष्ठ ऊर्जा संवाहक - कोलेस्ट्रम


              स्तनधारी जीवों में माँ के पहले दूध को कोलस्ट्रम कहते हैं । कोलस्ट्रम को जीवन का पहला 'सुपर फ़ूड' भी कहा जाता है । हम सब जानते हैं कि माँ का पहला दूध बच्चे के लिए कितना जरुरी होता है । यह जीवन भर उस बच्चे को रोगों से लड़ने की ताकत देता है, और  उसके शारीरिक और मानसिक विकास की पहली सीढ़ी होता है ।

           शायद यह किसी चमत्कार से कम नहीं की एक जीव का कोलस्ट्रम अन्य प्रजाति के जीव भी ग्रहण कर सकते हैं ।  भारत में सालों से गाय से प्राप्त किये कोलस्ट्रम को ग्रहण किया जाता रहा है । गाय के कोलस्ट्रम को सभी जीव ग्रहण कर सकते हैं ।  इसे गौ पियूष भी कहा जाता है ।  गौ पियूष की संरचना मानव कोलस्ट्रम के सर्वाधिक करीब है ।  

            कोलस्ट्रम में यह सब पाए जाते हैं :- सभी जरुरी फैट्स, सभी जरुरी एमिनो एसिड्स, ८० से ज्यादा विकास के लिए जरुरी तत्व,  ९० से ज्यादा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तत्व.

           हमारे देश में उपलब्ध वेस्टिज कोलस्ट्रम गौ पियूष  बछड़े के जन्म के ६ घंटे के भीतर इकट्टा किया जाता है ।  इसके कुछ फायदे :-

            यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है ।

          रोगप्रतिरोधक क्षमता : कैंसर, डायबिटीज, एलर्जी, इंफेक्शन्स, ऑटो इम्यून रोग, त्वचा के रोग और बढ़ती उम्र के लक्षण यह सभी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण हो सकते हैं ।  जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है, वह इन रोगों से मुक्त रहते हैं । कोलोस्ट्रम रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपलब्ध आहार पूरकों में सर्वश्रेष्ठ श्रेणी में आता है । 

            ज्यादातर सुक्ष्म जीवों पर अब एंटीबायोटिक्स का असर नहीं होता है । समय के साथ इन जीवाणुओं ने उपलब्ध एंटीबायोटिक्स के खिलाफ रेजिस्टेंस डेवेलोप कर लिया है ।  ऐसी स्थिति में कोलोस्ट्रम शरीर को प्राकृतिक रूप से सशक्त बनाता है ।  कई शोधों में कोलोस्ट्रम को वैक्सीन से ३ गुना ज्यादा प्रभावी पाया गया है ।  कुछ समय पहले स्वाइन फ्लू के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी कोलेस्ट्रम के इस्तेमाल की ख़बरों को आपने सुना होगा ।

          गाय से प्राप्त कोलोस्ट्रम इकलौता ऐसा पदार्थ है जो सूक्ष्म जीवी वायरस को भी समाप्त कर सकता है । 

            यह दांतों और हड्डियों की सेहत में बहुत लाभकारी है ।

           खिलाडियों और बॉडी बिल्डिंग में रूचि रखने वालों के लिए इससे अच्छा आहार पूरक नहीं हो सकता । इसे स्टेरॉइड्स से ज्यादा कारगर पाया गया है ।  यह मांसपेशियों के विकास में सहायक है और खेलों में होने वाली छोटी-मोटी चोटों का तेजी से समाधान कर देता है । धावकों और खिलाडियों द्वारा विश्वभर में इसका इस्तेमाल किया जाता है । यह उत्तकों की मरम्मत करता है, फैट को बर्न करता है, मेटाबोलिज्म को बढ़ता है और इसके साथ ही यह शारीरिक ताकत को बढाने का एक अभूतपूर्व स्त्रोत है।   (ऑस्ट्रेलियान शोध ) 

          एंटी एजिंग :- हमारा शरीर एक उम्र तक ही  'ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन' का उत्पादन करता है । बढ़ती उम्र के साथ इसका उत्पादन कम होता जाता है ।  यह हार्मोन एक एंटी एजिंग हार्मोन है ।  कोलोस्ट्रम प्राकृतिक तरीके से  'ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन'  के उत्पादन को बनाए रखता है ।

             नीचे शारीरिक रोगों की वह सूचि दी गई है, जिनमे कोलोस्ट्रम उपयोगी सिद्ध हुआ है  :- 

            कैंसर, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर लेवल, बोन डेंसिटी, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, शारीरिक क्षमता,  फ्लू की रोकथाम, हृदय की सेहत, लिकी गट सिंड्रोम,  जोड़ों का दर्द, मोटापा कम करना, आर्थराइटिस, अस्थमा, एच आई वी, अलसर, वायरल इन्फेक्शन, आँतों से जुडी समस्याओं आदि ।

            अतिरिक्त आहार पूरक के रुप में इसे लेने और इसकी मदद से अपनी शारीरिक कमजोरी व उपर वर्णित इन सभी रोगों से बचाव की ईच्छा रखने वाले सभी पाठक उपर वर्णित वेस्टीज कोलेस्ट्रम केप्सूल के रुप में इसे खरीदकर अपनी इन शारीरिक कमजोरी व रोगमुक्ति की दिशा में सकारात्मक पहल कर सकते हैं । अधिक आसान उपलब्धि के लिये ब्लाग लेखक - सुशील बाकलीवाल से मोबाईल संपर्क नंबर +91 91799 10646 पर भी सम्पर्क कर सकते हैं ।

 

फ्रीज़ किए गए नींबू के आश्चर्यजनक परिणाम


            सबसे पहले नींबू को धोकर फ्रीज़र में रखिए । ८ से १० घंटे बाद वह बर्फ़ जैसा ठंडा तथा कड़ा हो जाएगा । अब उपयोग मे लाने के लिए उसे कद्दूकस कर लें ।

            इसे आप जो भी खाएँ उस पर डाल कर इसे खा सकते हैं ।

            इससे खाद्य पदार्थ में एक अलग ही टेस्ट आऐगा ।

            नीबू के रस में विटामिन सी होता है। ये आप जानते हैं

            आइये देखें इसके और क्या-क्या फायदे हैं ।

            नीबू के छिलके में ५ से १० गुना अधिक विटामिन सी होता है और वही हम फेंक देते हैं ।

            नींबू के छिलके में शरीर कॆ सभी विषेले द्रव्यों को बाहर निकालने कि क्षमता होती है ।

            नींबू का छिलका कैंसर का नाश करता है । इसका छिलका कैमोथेरेपी से १०,००० गुना ज्यादा प्रभावी है ।

            यह बैक्टेरियल इन्फेक्शन, फंगस आदि पर भी प्रभावी है ।

            नींबू का रस विशेषत: छिलका,  रक्तदाब तथा मानसिक दबाव को नियंत्रित करता है ।

            नींबू का छिलका १२ से ज्यादा प्रकार के कैंसर में पूर्ण प्रभावी है और वो भी बिना किसी साईड इफेक्ट के । 

            इसलिये आप अच्छे पके हुए तथा स्वच्छ नींबू फ्रीज़र में रखें और कद्दूकस कर प्रतिदिन अपने आहार के साथ प्रयोग करें ।    
                         
-डॉ विकास बाबा आमटे
आनंदवन, वरोरा, महाराष्ट्र


रविवार, 12 जून 2016

कामशक्ति वर्द्धक योग -


            पिछले कुछ समय में कुछ जानकारी इस ब्लॉग पर इसके नियमित पाठकों ने प्रतिस्पर्धा व तनावों से बढते जीवनक्रम में यौनेच्छा में कमी और उसके कारण संतानोत्पत्ति के मार्ग में आ रही बाधाओं को दूर कर सकने योग्य जानकारी व्यक्तिगत अथवा ब्लॉग माध्यम से जानने की ईच्छा जाहिर करते हुए हमारे ई-मेल पर मांगी है । चूंकि यह स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों का ब्लॉग है और ऐसी जानकारी भी स्वास्थ्य के एक अनिवार्य स्तंभ के रुप में ही आती है, अतः इस पोस्ट के माध्यम से हम अपने पास उपलब्ध संबंधित जानकारी को इस माध्यम पर प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं । उम्मीद है कि ऐसे सभी पाठक जो इससे मिलती-जुलती समस्याओं की गिरफ्त में रहे हैं वे इसके द्वारा लाभ लेते हुए स्वयं को अथवा अपने निकटतम परिजन को समस्यामुक्त करवा सकने का प्रयास कर सकेंगे ।

            वैसे तो गुणवान संतान और कामसुख की कामना से वाजीकरण हेतु प्रयुक्त आयुर्वेदिक नुस्खों का प्रयोग कुशल चिकित्सक के निर्देशन में किया जाना ही उपयुक्त होता है । किंतु कुछ जानी-पहचानी आयुर्वेदिक औषधियां जिनके प्रयोग से शरीर को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान हुए बगैर न सिर्फ वाजीकारक बल्कि अन्य प्रकार के स्वास्थ्यलाभ भी प्राप्त होते हैं उनका उल्लेख हम यहाँ करने का प्रयास कर रहे हैं ।  व्यवहारिक तौर पर भी ये औषधियां वाजीकारक (शरीर को अश्वशक्ति प्रदान करने वाली) होने के साथ ही शरीर में मेधा, ओज, बल को बढाते हुए तनाव को कम कर सकने का गुण स्वयं में संजोये रखती हैं ।

            काम की प्रबल और सम्मोहक शक्ति को देखकर ही इसे देवता भी कहा गया है । आज की व्यस्ततम जीवनशैली, तनावभरी दिनचर्या और भौतिक सुख सुविधायें जुटाने की लालसा ने इस पवित्र कर्म के मूल में निहित भाव एवं उद्देश्य को समाप्त कर दिया है । काम आज दाम्पत्य जीवन की औपचारिकता भर रह गया है, इन्ही कारणों से यौन संबंधों को लेकर असंतुष्ट युगलों की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है, ऐसी स्थिति में आयुर्वेद एवं आयुर्वेदिक औषधियां मददगार हो सकती है जिनका प्रयोग वैद्यकीय निरीक्षण में अथवा प्रायोगिक तौर पर अल्प मात्रा से शुरु होते हुए नियंत्रित अनुपात में होना चाहिए-

            1.  असगंध, विधारा, शतावर, सफ़ेद मूसली, तालमखाना बीज व  कौंच बीज प्रत्येक 50-50 ग्राम की मात्रा में लेकर दरदरा कर कपडे से छान लें तथा इसमे 350 ग्राम मिश्री भी पीसकर मिला लें, इस नुस्खे को 5-10 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम ठन्डे दूध से लें, लगातार एक माह तक लेने से यौन सामर्थ्य में पर्याप्त वृद्धि अवश्य होगी ।

          2.  दालचीनी, अकरकरा, मुनक्का और श्वेतगुंजा को एक साथ पीसकर इन्द्रिय पर लेप करें तथा मिलाप के समय कपडे से इसे पोछ दें, यह योग इन्द्रियों में रक्त के संचरण को बढाकर स्तंभन व उत्तेजना दोनों ही स्थितियों को अधिक बेहतर बनाता है ।

            3. शुद्ध शिलाजीत 500 मिलीग्राम की मात्रा में ठन्डे दूध में घोलकर सुबह शाम पीने से भी लाभ मिलता है ।

             4. यदि किसी पुरुष को शीघ्रपतन की शिकायत हो तो धाय के फूल, मुलेठी, नागकेशर व बबूलफली इनको बराबर मात्रा में लेकर इसमें आधी मात्रा में मिश्री मिलाकर, इस योग को 5-5 ग्राम की मात्रा में लगातार एक माह तक सेवन करने पर शीघ्रपतन की लज्जाजनक स्थिति से छुटकारा पाने में पर्याप्त लाभ मिलता है ।

           5.  कामोत्तेजना को बढाने के लिए कौंचबीज चूर्ण, सफ़ेद मूसली, तालमखाना व अश्वगंधा चूर्ण को बराबर मात्रा में तैयार कर 10-10 ग्राम की मात्रा में ठन्डे दूध से सेवन करने पर शरीरबल में पर्याप्त वृद्धि का लाभ मिलता है ।

            ये चंद ऐसे नुस्खें हैं, जिनका प्रयोग यौनशक्ति, ऊर्जा एवं पुरुषार्थ को बढाने में सदैव मददगार सबित होता है । 

            मनुष्य के मस्तिष्क में सदैव दो तरह की बातें चलती रहती है, एक सकारात्मक तो दूसरी नकारात्मक । नकारात्मक सोच व्यक्ति के मन-मस्तिष्क पर हमेशा बुरा असर डालती हैं, जिसके कारण उसके उत्साह में कमी आती है । वहीं सकारात्मक सोच किसी भी कठिन कार्य को करने में उसे साहस प्रदान करती है, जिसके कारण उस व्यक्ति के मन-मस्तिष्क पर कोई प्रतिकूल प्रभाव प्रायः नहीं पड़ता ।

            हालांकि यदि अनुभवी बुजुर्गों के ज्ञान और आयुर्विज्ञान के अनुसार अपनी सेक्सुल पॉवर को बढ़ाने की बजाये
आप अपने को मानसिक रूप से तैयार कर अपनी शारीरिक ताकत के विकास की ओर ध्यान दें तो वैसे ही आपकी सेक्सुअल पॉवर अपने आप भी बढ़ जाएगी ।

            शारीरिक ताकत बढ़ाने के लिए आप नियमित रूप से लोकी, आंवला और एलोविरा जूस का सेवेन करें जो न सिर्फ आपकी इस ताकत को बल्कि आपके सर्वांग स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के श्रेष्ठ माध्यम साबित होंगे । 

            वैसे अकेला लौकी का जूस भी आपकी सेक्सुअल पॉवर को बढ़ाने में आपकी मदद करेगा, और उस पर यदि आप सामान्य शारीरिक कसरत यदि सप्ताह में चार-पांच दिन भी करते रह पाये तो यह स्थिति भी आपके लिये सोने पे सुहागे का काम करेगी ।
  


गुरुवार, 2 जून 2016

सावधान... होटल की रोटी में घी नहीं, सूअर की चर्बी...!

 होटल की घी चुपडी रोटी...?  
            आप ये जानकर चौंक जाएंगे कि कई होटलों में जो रोटी  आपको  परोसी जाती है, उस पर लगा घी, घी नहीं बल्कि सूअर की चर्बी है । जी हां, सूअर की चर्बी में एसेंस मिलाकर बनाए गए इस घी से पका खाना आपको खिलाया जा रहा है ।

             एसेंस डालने के बाद आप पहचान नहीं सकते कि आखिर क्या खा रहे हैं । इसी का फायदा उठाकर होटल वाले अपनी जेब भर रहे हैं और बदले में आपको दे रहे हैं पेट की तमाम बीमारियों का उपहार ।

            इन्दौर  व इससे लगी सीमाओं में ऐसे करीब 80 पशुपालन केंद्र हैं, जहां सूअर पाले जाते हैं । ये ही शहर के होटलों में इनकी चर्बी और मांस की सप्लाई करते हैं । केवल इंदौर ही नहीं, आसपास के तमाम शहरों जैसे उज्जैन, रतलाम, नागदा, धार, देवास, की होटलों में भी यही चर्बी पहुंचाई जा रही है ।

            इंदौर सूअर पालक संघ के अध्यक्ष विमल डागर स्वीकारते हैं कि कई होटलों में सुअर की चर्बी पहुंचाई जाती है । इसमें मिलाया जाने वाला एसेंस सियागंज में बड़ी आसानी से मिल जाता है । उन्होंने बताया कि इस प्रकार बनाए गए नकली घी का स्वाद और सुगंध बिल्कुल असली जैसी होती है ।

ऐसे निकालते हैं चर्बी...
            सूअर एक ऐसा प्राणी है जो एक बार में 12 या अधिक बच्चों को जन्म देता है । इन्हें पालने वाले एक निश्चित उम्र के बाद सूअर के अंडकोषों को बड़ी बेरहमी से काट देते हैं । इसके बाद इनके पेट में लगातार चर्बी बनती जाती है । कुछ दिनों बाद या तो वह दम तोड़ देता है या फिर उसे मार दिया जाता है । फिर उसकी चर्बी निकाली जाती है । इस तरह के सूअर से 20 किलो तक चर्बी निकल जाती है । अमूमन 5 हजार रुपए की कीमत वाला एक सूअर मरने के बाद 50 हजार रुपए तक दे जाता है । इसके अन्य अंग भी बेच दिए जाते हैं ।

एक होटल पर की थी कार्रवाई...
            करीब तीन साल पहले सरवटे बस स्टैंड क्षेत्र की एक नामी होटल पर नगर निगम के खाद्य विभाग ने छापा मारा था । यहां से 250 किलो चर्बी जब्त की गई थी । इस होटल के संचालक के राजनीतिक गुरु ने अपनी कृपा बरसाई और बाद में फिर उस पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई ।

बड़े नुकसान हैं इस तरह का घी खाने से...
            डॉक्टरों का कहना है कि यदि आपने एक महीने में आठ से दस बार भी होटल का ऐसा घी खाया तो, आप कुछ ही वर्षों में अल्सर, अपेंडिक्स, आंतों का सड़ना या एक दूसरे में फंस जाना, पाचन क्रिया का पूरी तरह डैमेज हो जाना जैसी गंभीर बीमारियों के शिकार बन सकते हैं । वेटरनरी सर्जन डॉ. सी. के. रत्नावत के अनुसार इससे होने वाले नुकसान यहीं तक नहीं थमते, बल्कि पैरालेटिक अटैक और कई तरह के इंफेक्शन भी हो सकते हैं । यह इसके खाने वालों को नींद न आने की बीमारी भी दे सकता है ।

क्या कहते हैं जिम्मेदार...
            सूअर की चर्बी का व्यवसाय बहुत फैला है । सूअर का हर अंग बिकता है । इंदौर में 80 से अधिक सूअर पालक हैं, जिनके पास डेढ़ लाख से अधिक सूअर हैं । इन्हें निर्यात भी किया जाता है ।

हमारे पास कोई अधिकार नहीं
            तीन साल पहले तक हम होटलों में इस तरह का पदार्थ बिकने के मामले में कार्रवाई करते थे लेकिन अब ये कलेक्टोरेट के खाद्य विभाग की जिम्मेदारी है । तीन साल पहले सरवटे बस स्टैंड की होटलों में सघन अभियान चलाया था और बड़ी मात्रा में चर्बी पकड़ी थी ।
स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम.

            अब यह तो आपको व हमें ही सोचना है कि इन स्थितियों में हमें अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिये कैसे अपना बचाव सोचना चाहिये क्योंकि यदि मुनाफाखोरी की यह स्थिति होटलों तक पहुँच गई है तो शादी-ब्याह के पंडाल में भी ऐसा भोजन शंका के दायरे में तो आ ही जाता है ।

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