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रविवार, 30 अक्तूबर 2011

प्रथम वर्ष के समापन पर...

 
          आज 30 अक्टूबर को पिछले वर्ष 2010 में इस ब्लागजगत से इसी ब्लाग के माध्यम से विधिवत जुडने की शुरुआत हुई थी । बाद में विषय को अलग-अलग रखने के प्रयास में दो अन्य ब्लाग जिन्दगी के रंग और नजरिया मेरे द्वारा और बनाये गये । शुरु में ऐसा भी लगा कि यह ब्लाग बुरी तरह से पिछड रहा है और पाठकों का ऐसी स्वास्थ्योपयोगी जानकारी में कोई विशेष रुझान देखने में नहीं आता इसके प्रमाण रुप में मासिक आंकडे मेरे सामने दिख रहे थे-

          दिसम्बर-जनवरी के माह में जहाँ इसके बाद प्रारम्भ होने वाले ब्लाग नजरिया पर 41 फालोअर्स के साथ 2345 पाठक आये और जिन्दगी के रंग में 10 फालोअर्स के साथ 1207 पाठक आये वहीं इस ब्लाग पर मात्र 5 फालोअर्स के साथ कुल 483 पाठक ही अपनी उपस्थिति दर्ज करवा पाये । बाद के क्वार्टर में मार्च माह के अंत तक यही संख्या जहाँ नजरिया ब्लाग पर 95 फालोअर्स के साथ 7865 पाठकों तक और जिन्दगी के रंग में 37 फालोअर्स के साथ 3312 पाठकों तक जा पहुँची तब भी इस स्वास्थ्य-सुख ब्लाग में यह संख्या मात्र 24 फालोअर्स के साथ 2139 पाठकों तक ही पहुँच पाई और संख्याओं का यही अन्तर इन ब्लाग्स पर प्राप्त टिप्पणियों की संख्या में भी दिखाई दिया । लेकिन...

          इसके बाद जो तस्वीर बदली तो इस ब्लाग के पाठक दिन-ब-दिन दूसरे दोनों ब्लाग की तुलना में इस तेजी से आगे बढना प्रारम्भ हुए कि आज यह संख्या नजरिया ब्लाग पर बेशक 297 फालोअर्स के साथ 22783 पाठकों की व जिन्दगी के रंग ब्लाग पर 56 फालोअर्स के साश 7953 पाठकों की दिखाई दे रही है किन्तु इस ब्लाग पर फालोअर्स भले ही अभी तक 69 दिख रहे हों पर पाठक संख्या में यही ब्लाग सबसे आगे आकर 27422 पाठकों तक पहुँच चुका है । वह भी तब जबकि नजरिया ब्लाग पर कुल पोस्ट 77 और जिन्दगी के रंग ब्लाग पर कुल पोस्ट 61 प्रसारित हुई है और इस ब्लाग पर अभी तक कुल पोस्ट संख्या 32 के पार भी नहीं पहुँच सकी है ।

          निःसंदेह उन्नति के ग्राफ पर ये कोई फख्र करने योग्य आंकडे भले ही नहीं हों किन्तु मेरी वर्तमान कार्य-शैली मं पाठकों की यह आमदरफ्त भी मेरे लिये पर्याप्त संतोषप्रद हैं और इस रुप में आप सभी से जो जुडाव बना हुआ है वह आगे भी आपके ऐसे ही सहयोग से चलता रह सकेगा यही आशा है ।

          अपने सभी पाठकों, समर्थकों व इस ब्लाग की विशेष चयनित पोस्टों को चर्चा के माध्यम से अधिक पाठकों तक पहुँचा सकने वाले स्नेही साथियों के साथ ही सभी टिप्पणीकर्ताओं के प्रति अनेकों धन्यवाद सहित...

शनिवार, 1 अक्तूबर 2011

मुनाफे का खेल - संधि सुधा तेल.



          इन दिनों आप अपने टी. वी. के विभिन्न चैनलों पर प्रातः 7 से 8 के अतिरिक्त अन्य समय में भी चित्र मीडिया की लोकप्रिय हस्तियों- जैकी श्राफ, रोहिणी हट्टंगडी, गूफी पेन्टल, एस. एम. जहीर व पुराने जमाने की सुप्रसिद्ध फिल्मों के कलाकार विश्वजीत, अनिल धवन, बीना व अन्य अनेकों जानी-मानी हस्तियों के साथ ही कुछ देशी-विदेशी पीडित व चिकित्सक सहित अन्य बीस-तीस व्यक्तियों की उपस्थिति में कमर, पीठ व घुटने सहित शरीर के सभी जोडों के दर्द को दूर करने में कारगर बताये जा रहे एक दर्द निवारक संधि सुधा तेल का विज्ञापन अवश्य देख रहे होंगे । हिमालय की प्रसिद्ध जडी-बूटियों के नाम गिनवाते हुए 5,000/- रु. मूल्य के इस महत्वपूर्ण तेल की छोटी-छोटी तीन शीशीयों का पैक मात्र 2,950/- रु. + 150/- रु. वी. पी. शुल्क सहित 3,100/- रु. में इसे बेचने का अभियान इस विज्ञापन के द्वारा निरन्तर चल रहा है ।

          महज 30 वर्ष के आसपास की उम्र के कोरियर कम्पनी के एक डाकवाहक कर्मचारी की समस्या का निजात भी उसी कर्मचारी के मुखारविन्द से होते पूरे अभिनय के साथ आप इसमें देख सकते हैं । सर्वप्रथम तो यही बात समझ में नहीं आती है कि महज 4-5 हजार रु. मासिक का न्यूनतम वेतन प्राप्त कर पत्नी-बच्चों का पालन-पोषण करने वाला कोई कर्मचारी इतनी मंहगी कीमत के तेल का प्रयोग कैसे कर पाया होगा वह भी तब जबकि अपने उपर के बीस-पच्चीस हजार के कर्ज का भी वह उल्लेख करता नजर आ रहा हो । यदि इस तेल को प्रयोग कर चुका कोई भी वास्तविक पीडित स्वयं यदि यह प्रमाणित करे कि एक बार के 2-5 दिनों के कोर्स के बाद वह सदा के लिये समस्या मुक्त हो गया तब तो इस तेल के विज्ञापन में बताई जा रही कीमत मान्य समझी जा सकती है किन्तु यदि हर बार आवश्यकता के समय इस तेल को लगाते रहना अनिवार्य लगता रहे तो फिर सौ-दो सौ रुपये मूल्य के किसी भी अन्य दर्द निवारक तेल से अधिक विशेष इस तेल को कैसे माना जा सकता है ?
 
          जोडों का दर्द मानव जीवन में ऐसी एक आम समस्या है जिसका सामना उठने-बैठने व सोने के गलत तरीकों के कारण हममें से हर किसी को प्रायः कभी न कभी बल्कि कुछ लोगों को लगातार करना ही पडता है और 40-45 वर्ष की उम्र के बाद तो यह समस्या स्थायी रुप से मानव समुदाय में देखने को मिलती ही रहती है ऐसी स्थिति में इस दर्द से बचाव हेतु अत्यन्त गुणकारी व राहत दिलाने वाले तेल को आप स्वयं अपने घर में बनाकर आवश्यकतानुसार प्रयुक्त कर सकते हैं । इस गुणकारी व राहतप्रदाता तेल को बनाने की विधि इस प्रकार है-
 
          सामग्री- 1 लीटर सरसों का तेल, 250 ग्राम छिले हुए लहसुन की कलियां, 100 ग्राम अजवायन और एक 500 ml  की लाल रंग की कांच की खाली शीशी.
 
          विधि- सरसों के इस तेल को धीमी आंच पर गरम करने के लिये रखकर तेल गर्म होते समय ही इसमें लहसुन की ये छिली हुई कलियां और अजवायन डाल दें और इस तेल को धीमी आंच पर ही गर्म होते रहने दें । जब यह तेल इतना गर्म हो जावे कि इसमें मौजूद लहसुन की ये कलियां जलकर बिल्कुल काली पड जावें तब आंच बन्द कर दें व ठंडा हो जाने पर इस तेल को छानकर  लकडी के पटिये पर कांच की लाल शीशी रखकर व उसमें इसे भरकर  सुरक्षित रख दें व जले हुए लहसुन व अजवायन का बगदा फेंक दें । दूसरे दिन धूप निकलने पर सुबह 6 से शाम 6 बजे तक कांच की लाल शीशी में मौजूद इस तेल को लकडी के पटिये सहित धूप में रख आवें । दिन भर इसे धूप में रखा रहने दें व शाम होते ही पटिये सहित इस तेल को उठाकर वापस घर में रख लें । रात में तेल को खुले आसमान के नीचे न छोडें और तेल को घर से धूप में व धूप से घर में रखने के दौरान स्वयं भी नंगे पैर न रहें । दूसरे शब्दों में भूमि के अर्थिंग से इस तेल को पूरी तरह से बचाकर रखें । लगातार 7 दिनों तक इसी प्रकार इस तेल को दिन में धूप में रखते रहें व रात्रि में घर में रख लें । इसके पश्चातृ आप इस तेल को अपनी सुविधा अनुसार कांच या प्लास्टिक की छोटी व सफेद शीशी में भी भरकर काम में ले सकते हैं ।
 
          यह ध्यान दें कि इस प्रोसेस में आपका एक लीटर तेल कुछ आंच के साथ और कुछ उस बगदे के साथ मिलकर आधे से भी कम हो जावेगा । किन्तु आपके लिये यह बना हुआ तेल तेज से तेज जोडों के दर्द को भी दूर कर सकने में रामबाण साबित हो सकेगा । यदि आपमें से किसी ने इस विदेशी कंपनी द्वारा लंबे मुनाफे के गणित के साथ इन लोकप्रिय किन्तु अब नाममात्र की व्यस्तता वाली इन हस्तियों को साथ में लेकर जि संधि सुधा तेल की बमुश्किल 500 मि. ली. की मात्रा में लगभग 3,100/- रु. में बेचे जा रहे इस तेल का प्रयोग यदि कभी किया होगा तो आप इस तरीके से बनाये गये सरसों के इस तेल को भी गुणवत्ता में इस संधि सुधा तेल से कम नहीं पाएंगे ।

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