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शुक्रवार, 24 जून 2011

उपाय : निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) से बचाव के...


          शरीर में रक्त की कमी हो जाने पर अधिकांश स्त्री-पुरुष निम्न रक्तचाप के शिकार हो जाते हैं । शारीरिक निर्बलता की स्थिति में अत्यधिक मानसिक श्रम व भोजन में पौष्टिक खाद्य पदार्थों की कमी से प्रायः यह स्थिति उत्पन्न हो जाती है ।
          निम्न रक्तचाप की स्थिति में रोगी प्रायः घबराहट व थकावट सी महसूस करता है, जब-तब आंखों के आगे अंधेरा सा छा जाता है, स्मरण शक्ति क्षीण हो जाती है, सिर चकराने लगता है और रोगी को लगता है कि वह लडखडाकर गिर पडेगा ।

इससे बचाव के लिये-

          50 ग्राम देशी चने व 10 ग्राम किशमिश को रात्रि में 200 ग्राम पानी में चीनी के बर्तन या कांच के गिलास में गलाकर रख दें व सुबह उन चनों को किशमिश के साथ अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाएँ व उस जल को भी पी लें । यदि देशी चने न मिल पावें तो सिर्फ किशमिश ही रात्रि को गलाकर सुबह चबा-चबाकर खा लें । इस विधि से कुछ ही सप्ताह में रक्तचाप सामान्य हो सकता है ।

सहायक उपचार-

          रात्रि के समय बादाम की 3-4 गिरी पानी में गला दें व प्रातः उनका छिलका अलग करके 15-20 ग्राम मक्खन-मिश्री के साथ मिलाकर उन बादाम-गिरी को खाने से निम्न रक्तचार नष्ट होता है ।

          प्रतिदिन आंवले या सेब के मुरब्बे का सेवन निम्न रक्तचाप में बहुत उपयोगी होता है ।
 
          आँवले के 2 ग्राम रस में 10 ग्राम मधु (शहद) मिलाकर कुछ दिन प्रातःकाल सेवन करने से निम्न रक्तचाप दूर करने में मदद मिलती है ।

          रात्रि में 2-3 छुहारे (खारक) दूध में उबालकर पीने या खजूर खाकर दूध पीते रहने से निम्न रक्तचाप में सुधार होता है ।
 
खानपान से सम्बन्धित उपचार-

          अदरक के बारीक कटे हुए टुकडों में नींबू का रस व सेंधा नमक मिलाकर किसी कांच के मर्तबान में रख लें । भोजन के पूर्व व उसके अलावा भी थोडी-थोडी मात्रा में दिन में कई बार इस अदरक को खाते रहने से यह रोग दूर रहता होता है ।
 
          200 ग्राम (तक्र) मट्ठे मे नमक, भुना हुआ जीरा व थोडी सी भुनी हुई हींग मिलाकर प्रतिदिन पीते रहने से इस समस्या के निदान में पर्याप्त मदद मिलती है ।
 
          खीरा ककडी, मूली, गाजर व टमाटर का सलाद खाते रहने से निम्न रक्तचाप के रोगी को बहुत लाभ होता है ।
          200 ग्राम टमाटर के रस में थोडी सी कालीमिर्च व नमक मिलाकर पीना लाभदायक होता है । उच्च रक्तचाप में जहाँ नमक के सेवन से रोगी को हानि होती है वहीं निम्न रक्तचाप के रोगियों को नमक के सेवन से लाभ होता है ।
          गाजर के 200 ग्राम रस में पालक का 50 ग्राम रस मिलाकर पीना भी निम्न रक्तचाप के रोगियों के लिये लाभदायक रहता है ।
          निम्न रक्तचाप के रोग में उपचार व बचाव के ये कुछ दादी-नानी के जमाने के नुस्खे हैं जिनमें से हम अपनी सुविधा के मुताबिक खान-पान व उपचार विधि का चुनाव कर रोगी का रोग स्थायी रुप से दूर करने का सफल प्रयास कर सकते हैं ।

सौजन्य : दादी-नानी के घरेलू नुस्खे से साभार...


        हमारे खाद्यान्न में तले हुए व्यंजन, मिठाईयां, निरन्तर चलन में बढते फास्ट-फूड, शराब-सिगरेट, तम्बाकू के सेवन के साथ ही वायुमंडल में व्याप्त घातक जहरीले रसायनों के कारण हमारे शरीर की रक्त नलिकाओं में ठोस चिकनाई व कोलेस्ट्रॉल की मात्रा सामान्यतः बढती जाती है, जो रक्त परिभ्रमण की अनवरत चलने वाली प्रक्रिया के द्वारा ह्दय तक जाकर फिल्टर नहीं हो पाती और धीरे-धीरे वहाँ जमा होते रहकर उन्हें संकरा करते हुए दिल की सामान्य धडकनों को अनियमित करना प्रारम्भ कर देती है जिसके कारण हम सांस लेने में दिक्कत, कमजोरी, चक्कर आना, तेज पसीना, बैचेनी व पेट से उपर के भाग में कहीं भी और प्रायः सीने या छाती में बांयी ओर दर्द का अहसास करते हैं और यही स्थिति निरन्तर बढते क्रम में होते रहने के बाद आगे जीवित रहने के लिये डॉक्टर बेहद खर्चीली एंजियोप्लास्टी और कभी-कभी जीवन के लिये खतरनाक बाय-पास सर्जरी का अंतिम विकल्प हमारे अथवा हमारे परिजनों के समक्ष रखते हैं जिसका दुष्परिणाम पूरे परिवार के लिये कभी-कभी जिंदगी भर की संचित बचत को उपचार में खर्च कर देने, बडा कर्ज लेने और किस्मत यदि खराब हो तो इसके बाद भी हमारे प्रिय परिजन को सदा-सर्वदा के लिये खो देने के रुप में हमारे सामने आता है ।
    इस स्थिति से बचाव के लिये समय रहते क्या कुछ किया जा सकता है ?  निःसंदेह हाँ... 
    अलसी के गुणों से हम अपरिचित नहीं हैं । मानव शरीर के लिये इसका तेल और भी अधिक गुणों का भंडार स्वयं में संजोकर रखता है किंतु उसमें भी घानी की अशुद्धियां, वसा की मौजूदगी और वातावरण के अच्छे-बुरे कारकों का प्रभाव मौजूद रहता ही है । इन अशुद्धियों को दूर करते हुए शरीर के लिये उच्चतम परिष्कृत पद्दतियों से निर्मित 'फ्लेक्स ऑईल जेल केप्सूल' जिसमें ओमेगा 6, ओमेगा 9, अनिवार्य फेटी एसिड, फाईबर, प्रोटीन, जिंक, मेग्निशीयन, विटामिन व 60% तक शुद्ध ओमेगा 3 मौजूद रहता है । ये सभी मित्र घटक हमारे शरीर की रक्त नलिकाओं में मौजूद सभी प्रकार की अशुद्धियों की सफाई करने का कार्य अत्यंत सुचारु रुप से करने में सक्षम होते हैं ।
    यदि हम स्वयं इसका परीक्षण करके देखें तो थर्मोकोल (जो कभी में नष्ट नहीं होता व यदि इसे जलाया भी जावे तो और भी घातक रासायनिक प्रक्रिया के द्वारा वायुमंडल में व्याप्त होकर हमारे शरीर के लिये अधिक नुकसानदायक साबित होता है) इसकी किसी भी शीट का एक चने के बराबर छोटा टुकडा लेकर व इस फ्लेक्स ऑईल जेल केप्सूल के एक केप्सूल को सुई की नोक से पंचर करके इसमें मौजूद उच्चतम गुणवत्ता के तेल को अपनी हथेली अथवा किसी प्लेट में निकालकर उसमें फाईबर के इस छोटे से टुकडे को डाल दें तो हम देखेंगे कि बमुश्किल 4-5 मिनिट में उस केप्सूल में मौजूद शुद्ध परिष्कृत जेल तेल में वह फाईबर का टुकडा गायब हो जाता है ।
    जब इसी फ्लेक्स ऑईल केप्सूल को हम नियमित रुप से अपने आहार में शामिल कर लेते हैं तो इसी प्रकार इसके शक्तिशाली घटक हमारे शरीर की रक्त-नलिकाओं में जमा सारा बे़ड कोलेस्ट्राल व अन्य अशुद्धियों को साफ करते हुए उन अवशिष्ट पदार्थों को मल-मूत्र के माध्यम से आसानी से शरीर से बाहर निकाल देते है और हम इन्हीं खान-पान व वातावरण में निरोगावस्था में अपना सामान्य जीवन जीते रह सकते हैं ।

   
          यदि उपरोक्त समस्याओं से ग्रस्त कोई व्यक्ति इस फ्लेक्स ऑईल जेल केप्सूल को 2 या 3 केप्सूल आवश्यकतानुसार प्रतिदिन चार माह (120 दिन) तक नियमित रुप से ले तो जहाँ वह अपनी शारीरिक समस्याओं से मुक्त हो सकता है वहीं यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति 2 केप्सूल प्रतिदिन 2 से 3 माह (60 से 90 दिन) लगातार ले तो वह अगले एक वर्ष तक रक्त नलिकाओं की किसी भी समस्या से स्वयं को मुक्त रख सकता है ।
       90 केप्सूल का 515/- रु. मूल्य का यह केप्सूल पैक यदि आपके क्षेत्र में उपलब्ध हो तो आप इन्हें अपने आसपास से खरीदकर अपने दैनिक आहार में शामिल कर आपके अमूल्य ह्दय की न सिर्फ आज बल्कि आने वाले लम्बे समय तक सुरक्षा बनाये रख सकते हैं और यदि यह आपके क्षेत्र में उपलब्ध न हो पावे तो मात्र 65/- रु. पेकिंग व कोरियर खर्च अतिरिक्त रुप से वहन करते हुए 580/- रु. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की 'इन्दौर साधना नगर ब्रांच' का उल्लेख करते हुए सेविंग A/c No. 53014770506 में सुशील कुमार बाकलीवाल के नाम से जमा करवाकर व मोबाईल नंबर +91 91799 10646 पर हमें Call अथवा WhatsApp मेसेज द्वारा अपना नाम व पूरा पता भेजते हुए घर बैठे प्राप्त कर अपने व अपने परिजनों के लिये इसका लाभ आवश्यक रुप से ले सकते हैं ।
    अनुरोध- यदि आपके क्षेत्र में ये केप्सूल उपलब्ध हों तब भी आप इन्हें खरीदने से पूर्व यदि इसके उपलब्धि स्थल की प्रमाणित जानकारी हमें भेजेंगे तो हम आपको यह भी बता पावेंगे कि उस स्थिति में आप इस पर 5%  से 10% तक अतिरिक्त बचत कैसे कर सकते हैं ।

शुक्रवार, 17 जून 2011

हाई ब्लड-प्रेशर (उच्च रक्तचाप) से बचाव के कुछ सरल उपाय.(2)

          उच्च रक्तचाप के कारण और इससे बचाव के लिये वैद्य ठा. बनवीरसिंह 'चातक' (आयुर्वेद रत्न) द्वारा प्रस्तुत उपाय हमने इससे पहले के आलेख में आपकी जानकारी के लिये प्रस्तुत किये थे । उनके द्वारा प्रदर्शित उपाय के अलावा भी कुछ और उपाय जो थोडे सरल भी लगते हैं उनका भी उल्लेख अब आपकी जानकारी के लिये यहाँ प्रस्तुत है-
 
उच्च रक्तचाप के लक्षण-
          वर्तमान परिवेश में विभिन्न कारणों से तनावग्रस्त जीवनशैली के चलते प्रायः 40 के आसपास की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते कई लोग इस समस्या की गिरफ्त में आ जाते हैं । इस बीमारी में जहाँ रोगी के रक्त का दबाव 140/80 से अधिक हो जाता है वहीं रोगी का सिर चकराने लगता है । आँखों के आगे अंधेरा छाने लगता है और रोगी घबराहट महसूस करता है । कई बार सिरदर्द से बैचेनी बढती जाती है, नींद गायब सी हो जाती है और कभी-कभी कानों में तरह-तरह की अनावश्यक सी आवाजें सुनाई देती हैं । उच्च रक्तचाप की चिकित्सा में यदि लापरवाही की जावे तो वृक्क (गुर्दों) को विशेष हानि पहुँच सकती है । इससे बचाव के लिये निम्न उपाय जो प्रभावित रोगियों द्वारा किये जा सकते है, उनका विवरण निम्नानुसार प्रस्तुत है-
                  

दिल का दौरा महसूस होते ही रोगी यदि लहसुन की चार कलियां तुरन्त चबा ले तो हार्टफैल की स्थिति को भी इस तरीके से रोका जा सकता है । दौरा समाप्त होने के बाद नित्य कुछ दिन तक लहसुन की दो कलियां दूध में उबालकर लेते रहें । नंगे पैर चलने वालों को रक्तचाप की शिकायत प्रायः नहीं होती ।

          आंवला ताजा या सूखा आयुपर्यंत खाते रहने से अचानक हृदयगति रुकने की संभावना नहीं रहती और न ही उच्च रक्तचाप का रोग सम्बन्धित व्यक्ति को हो पाता है । रोगी व्यक्त को सुबह-शाम आंवले का मुरब्बा (एक-एक आंवले के रुप में) खाते रहना चाहिये । यदि किसी को मधुमेह (शुगर) की शिकायत हो तो उसे यह आंवला धोकर खाते रहना चाहिये ।

           उच्च रक्तचाप में त्रिफला चूर्ण के सेवन से भी पर्याप्त लाभ मिलता है । हरड, बहेडा व आंवला के समान अनुपात में मिश्रीत चूर्ण की 10 ग्राम के करीब मात्रा को रात्रि में एक गिलास जल में डालकर रख दें व सुबह उस चूर्ण को मसलकर व छानकर उसमें थोडी मिश्री मिलाकर पीते रहने से उच्च रक्तचाप नियंत्रण में रहता है । त्रिफला का ये मिश्रण कब्ज भी दूर करता है जिससे उच्च रक्तचाप के रोगी को विशेष लाभ मिलता है ।

          अत्यधिक बढे हुए रक्तचाप के रोगियों को यदि आक के फूलों की माला पहनाई जावे तो रक्तचाप नियंत्रण के लिये विशेष उपयोगी मानी जाती है इसके अतिरिक्त ऐसे रोगियों को पंचमुखी रुद्राक्ष की माला भी स्थाई रुप से पहनाई जा सकती है ।

सहायक उपचार...
          20 ग्राम प्याज के रस में करीब 10 ग्राम शहद मिलाकर प्रतिदिन पीने से उच्च रक्तचाप के रोगियों को बहुत लाभ मिलता है ।

           सर्पगंधा वनौषधि की जड के चूर्ण को प्रतिदिन 2 ग्राम मात्रा में दूध या जल के साथ सेवन करने से उच्च रक्तचाप कम होता है । अनिद्रा की समस्या दूर होकर रोगी को गहरी नींद भी आती है । यदि इसमें 1 रत्ती (=120 मिलीग्राम) शुद्ध शिलाजीत भी मिलाकर इसे दूध के साथ लिया जा सके तो रोगी को इससे विशेष लाभ होता है ।
 
          मैथीदाने का चूर्ण सुबह-शाम 3-3 ग्राम की मात्रा (चाय का 1 चम्मच = 5 ग्राम) में जल के साथ लेते रहने से उच्च रक्तचाप शांत होता है ।
 
          आंवला, सर्पगंधा व गिलोय का चूर्ण सममात्रा में बनाकर प्रतिदिन 3-3 ग्राम मात्रा में जल के साथ लेते रहने से उच्च रक्तचाप नियंत्रित रहता है ।
 
          अशोक के वृक्ष की छाल 20 ग्राम मात्रा में लेकर व उसे अधकूट कर उसका काढा बनाकर (दो गिलास पानी में इसे डालकर आंच पर इतना उबालें कि पानी की यह मात्रा आधा गिलास रह जावे) पश्चात् इसे छानकर व थोडी सी मिश्री मिलाकर  कुछ दिन पीने से भी उच्च रक्तचाप दूर हो सकता है ।

कुछ मौसमी उपाय भी...
          प्रतिदिन मूली को काटकर व उसमें नींबू का रस मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है । मूली में नमक न मिलावें ।

          गाजर का 200 ग्राम रस प्रतिदिन पीते रहने से रोगी को लाभ मिलता है । इससे उसकी घबराहट व बैचेनी भी दूर होती है । यदि गाजर के इस रस में 10 ग्राम शुद्ध शहद भी मिला लिया जावे तो इसके गुणों में विशेष वृद्धि हो जाती है ।

          अंगूर का सेवन भी रक्तचाप नियंत्रण में मददगार साबित होता है । 

          आलू का सेवन जहाँ कुछ चिकित्सक इस रोग में रोक देते हैं वहीं कुछ की धारणा के मुताबिक जल में नमक डालकर उबले हुए आलू का सेवन रोगी कर सकते हैं । अलबत्ता इसमें अलग से नमक न मिलावें ।
  
          उपरोक्त प्रस्तुत उपायों में रोगी की तासीर के अनुकूल व मौसम के मुताबिक उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए आप अपने परिजनों सहित स्वयं को न सिर्फ इस रोग से मुक्त रख सकते हैं बल्कि पहले से रोग रहने की स्थिति में अनुकूलता के मुताबिक रोगी का यथासम्भव सुरक्षित रुप से उपचार कर स्थिति को अनियंत्रित होने से रोक सकते हैं । इसके अतिरिक्त...

          उच्च रक्तचाप के सभी रोगियों को प्रतिदिन सूर्योदय के समय भ्रमण के लिये किसी पार्क में जाकर एक घंटे शुद्ध वायु के वातावरण में प्रतिदिन बैठने व इसी अवधि में ओस पडी हरी घास पर कुछ समय नंगे पैर
नियमित चलने से पर्याप्त लाभ मिलता है ।
 
संबंधित समस्या समाधान हेतु यह भी देखें- 
 


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