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शनिवार, 30 अप्रैल 2011

आपने पूछा है...? (1)

       इसी ब्लाग की 29 अप्रेल 2011 की पोस्ट : हठीला दुष्ट रोग सायटिका (गृद्धसी) की टिप्पणी पर- 

श्री राज भाटियाजी का प्रश्न-

       बहुत सुंदर जानकारी, मेरी बीबी की कलाई मे पिछले १५,२० दिनो से भयंकर दर्द चल रहा हे, जो हड्डी मे नही, हाथ के अंगुठे के पीछे जहां कलाई शुरु होती हे वहां हे, डा० को दिखा दिया, इलाज चल रहा हे, लेकिन आराम नही आया, डा० का कहना हे कि एक महीना लगेगा, आप कुछ बताये?

उत्तर-

सम्माननीय श्री राज भाटियाजी सा.,

        आपके प्रश्न के सन्दर्भ में फिलहाल जो उपाय मुझे समझ में आ रहा है उसके मुताबिक योग की छोटी सी क्रिया का यदि भाभीजी दिन में लगभग 3 बार अभ्यास करें तो उन्हें अधिक राहत मिल सकती है । वीडियो उपलब्ध नहीं है और मुझे पोस्ट पर उसे लगाना अभी आता भी नहीं है इसलिये लिखकर ही बताने का प्रयास कर रहा हूँ-

        1. दुख रही कलाई की मुट्ठी बन्द करके बार-बार अंगूठे को खोलें व बन्द करें, फिर इसी अंगूठे को गोल घुमावें दांए से बांई ओर व बांए से दांई ओर समान मात्रा में क्लाकवाइज व एंटीक्लाकवाइज  (लगभग 10 से 40 बार तक प्रत्येक बार) सुबह, दोपहर फिर रात्रि में.

        2. कोहनी के नीचे तह किया हुआ टौलिया रखकर टेबल पर आरामदायक स्थिति में कोहनी टिकाकर या कोहनी के नीचे दूसरी हथेली का सहारा देकर कलाई के जोड से हथेली उपर व नीचे बार-बार करें, फिर हथेली की मुट्ठी बांधकर उपर नीचे करें, फिर मुट्ठी बंधी हुई अवस्था में गोल वृत्ताकार में घुमाएँ, दांए से बांई ओर व बांए से दांई ओर समान मात्रा में क्लाकवाइज व एंटीक्लाकवाइज (लगभग 10 से 40 बार तक प्रत्येक बार) सुबह, दोपहर फिर रात्रि में । इन दोनों अभ्यासों की शुरुआत कम मात्रा से करते हुए धीरे-धीरे बढावें ।

        इस प्रक्रिया से जो मूमेंट भाभीजी की कलाई व अंगूठे के जोड के पीछे उन्हें मिलेगा उससे सम्बन्धित नस में हो रही किसी भी प्रकार की रक्त पूर्ति की बाधा दूर हो सकने में मदद मिलेगी व स्थाई रुप से कलाई बिना दर्द के अपने स्वाभाविक स्थिति में आ पावेगी । तब तक-

        3. यदि आपके उधर महानारायण तेल मिल सके तो उसे लाकर दर्द वाले स्थान पर हल्के हाथ से उसे आहिस्ता आहिस्ता मसाज रुप में लगावे, जोर लगाकर मसलना नहीं है । यदि महानारायण तेल उपलब्ध न हो सके तो 250 ग्राम सरसों के तेल में 50ग्राम छिली हुई लहसुन की कलियां डालकर आंच पर तब तक उसे गर्म करें जब तक की लहसुन की ये कलियां जलकर काली न पड जावें । पश्चात् तेल को आंच से उतारकर ठंडा होने पर उसे छानकर इस तेल का महानारायण तेल जैसा प्रयोग करें । (यह तेल बाद में भी जोडों के या अंदरुनी शारीरिक दर्द में काम आता रहेगा)

        4. तेज दर्द की स्थिति में न्यूनतम मात्रा में काम्बिफ्लेम या इस जैसी दर्द निवारक गोली लेने में भी परहेज न करें ।

        उम्मीद है कि दो दिन बाद से ही सुधार दिखते हुए लगभग एक सप्ताह के अभ्यास में भाभीजी को कलाई के इस दर्द से स्थाई आराम मिल सकेगा ।   

शुभकामनाओं सहित...

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

हठीला दुष्ट रोग : सायटिका (गृद्धसी)

        शरीर में जब कूल्हे से लगाकर एडी तक दर्द की इतनी तेज लहर उठती है जिसे व्यक्ति सहन नहीं कर पाता (और जहाँ हो जिस स्थिति में हो बैठना तब मजबूरी बन जाता हो) लगता है जैसे पैर फट जाएगा । जांघ और पिंडली के पिछले हिस्से में कूल्हे से नीचे तक एक नस होती है इसमें दर्द होने की स्थिति ही सायटिका कहलाती है । प्राय: प्रभावित व्यक्ति बांए पैर में कमर से लेकर एड़ी तक एक नस में बहुत ही तेज दर्द की उठती सी लहर जैसे बिजली चमकी हो ऐसा महसूस करता है । सामान्य धारणा के मुताबिक आधुनिक एलोपेथी चिकित्सा में इसका कोई सरल उपचार नहीं दिखता जबकि इस रोग से पीडित व्यक्ति ही इसकी भयावहता को महसूस कर पाता है । आयुर्वेद में इस रोग के उपचार हेतु उपलब्ध जानकारी निम्नानुसार है-

  निर्गुण्डी                     हरसिंगार का वृक्ष          हरसिंगार के फूल

        1. हरसिंगार का वृक्ष जिसे शैफाली, पारिजात या परजाता भी कहते हैं और जिसमें छोटे सफेद फूल जिनके बीच में केशरिया छींटे दिखाई देते हैं (और बहुतायद से ये फूल वर्षा ऋतु में दिखाई देते हैं) इसके ताजे 50 पत्ते और निर्गुण्डी के ताजे 50 पत्ते लाकर एक लीटर पानी में उबालें । जब पानी 750 मि. ली. रह जावे तब उतारकर व छानकर इसमें एक ग्राम केसर मिलाकर इसे बाटल में भरलें । यह पानी सुबह-शाम पौन कप मात्रा में दो सप्ताह तक पिएं और इसके साथ योगराज गुग्गल व वातविध्वंसक वटी 1-1 गोली दोनों समय लें । आवश्यकतानुसार इस उपचार को 40 से 45 दिनों तक करलें ।

अन्य उपचार-   
 
       2. एरण्ड के बीजों की पोटली बनालें व इसे तवे पर गर्म करके जहाँ दर्द हो वहाँ सेंकने से दर्द दूर होता है ।

        3. एक गिलास दूध तपेली में डालकर एक कप पानी डाल दें और इसमें लहसुन की 6-7 कलियां काटकर डाल दें । फिर इसे इतना उबालें कि यह आधा रह जाए फिर उतारकर ठण्डा करके पी लें । यह सायटिका की उत्तम दवा मानी जाती है ।
 
        4. सायटिका के दर्द को दूर करने के लिये आधा कप गोमूत्र में डेढ कप केस्टर आईल (अरण्डी का तेल) मिलाकर सोते समय एक माह पीने से यह दुष्ट रोग चला जाता है ।
 
        5. निर्गुण्डी के 100 ग्राम बीज साफ करके कूट-पीसकर बराबर मात्रा की 10 पुडिया बना लें । सूर्योदय से पहले आटे या रवे का हलवा बनाएँ और उसमें शुद्ध घी व गुड का प्रयोग करें, वेजीटेबल घी व शक्कर का नहीं । जितना हलवा खा सकें उतनी मात्रा में हलवा लेकर एक पुडिया का चूर्ण उसमें मिलाकर हलवा खा लें और फिर सो जाएँ । इसे खाकर पानी न पिएँ सिर्फ कुल्ला करके मुँह साफ करलें । दस पुडिया दस दिन में इस विधि से सेवन करने पर सायटिका, जोडों का दर्द, कमर व घुटनों का दर्द होना बन्द हो जाता है । इस अवधि में पेट साफ रखें व कब्ज न होने दें ।
 
        6. गवारपाठे के लड्डू- सायटिका या किसी भी वात रोग को दूर करने के लिये ग्वारपाठे के लड्डू का सेवन करना बहुत लाभकारी होता है ।
 
लड्डू बनाने की विधि-  
         गेहूँ का मोटा दरदरा आटा 1 किलो, असगन्ध, शतावर, दारु हल्दी, आंबा हल्दी, विदारीकन्द, सफेद मूसली सब 50-50 ग्राम लेकर कूट पीसकर मिलालें । ग्वारपाठे का गूदा  250 ग्राम के करीब निकाललें व गूदे में सभी 6 दवाई और आटा मिलाकर अच्छी तरह मसलें । अब इसमें 250ग्राम घी डालकर अच्छी तरह से मिलालें । जरा सा गर्म पानी डालकर मुट्ठे बनालें व घी में तलकर बारीक कूटकर मोटी छन्नी से छानकर घी कढाई में डाल दें और हिला चलाकर छोडी देर तक सेकें ताकि पानी का कुछ अंश यदि रह गया हो तो जल जाए । अब डेढ किलो शक्कर की चाशनी बनालें । मुट्ठों की कुटी हुई सारी सामग्री को मोटे चल्ने से छानकर इसमें आवश्यक मात्रा में घी डालकर चाशनी में डाल दें । जब जमने लगे तब 50-50 ग्राम वजन के लड्डू बनालें । इच्छा के अनुसार बादाम, पिश्ता, घी में तला गोंद सब 50-50 ग्राम, केशर 2 ग्राम और छोटी इलायची 10 ग्राम डालकर लड्डू बनालें । सुबह व शाम 1-1 लड्डू खाकर उपर से मीठा कुनकुना गर्म दूध पी लें । इसके बाद 3 घंटे तक कुछ खाना पीना न करें । 45 दिन तक नियमित रुप से यह लड्डू खाने से सायटिका (गृद्धसी) सहित अन्य सभी वात व्याधियां (विशेषतः जोडों के दर्द से सम्बन्धित) दूर हो जाती हैं ।

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

मंगलकामनाएँ....




विश्व बंधुत्व की मंगलकामनाओं के साथ-

देश व दुनिया के सभी धर्मावलंबी पाठकों को

महावीर जयन्ति पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ...




सोमवार, 11 अप्रैल 2011

रोग की जड : खांसी


          
            हम और हमारे परिजन खांसी की गिरफ्त में अक्सर आते रहते हैं ।  किसी को धूल के प्रदूषण या किसी एलर्जी के कारण खांसी हो जाती है तो कई बार ठण्डा खाने-पीने से या अधिक मात्रा में बच्चों के द्वारा टाफियां खाने व कोल्ड ड्रिंक पीने से भी खांसी होते देखी जा सकती है । लम्बे समय तक बनी रहने वाली खांसी शरीर के अन्दर उपज रहे किसी बडे रोग की संकेतक भी हो सकती है । किन्तु यहाँ हम सामान्य तौर पर किसी भी कारण से होने वाली खांसी के असरदार घरेलू उपचार के बारे में बात कर रहे हैं-

          10 ग्राम फिटकरी लें व गर्म तवे पर उसे रख दें । थोडी देर खदबदाने के बाद वह फिटकरी ठंडी होकर बैठ जावेगी । फिर उसी फिटकरी को चाकू जैसी किसी नोकदार वस्तु से उस गर्म तवे पर पलट दें । थोडी बहुत इस स्थिति में भी वह फिटकरी खदबदाते दिखेगी व बैठ जावेगी । यह शोधित फिटकरी कहलाती है । इस फिटकरी को बेलन की मदद से बिल्कुल बारीक पीसलें और इसमें 100 ग्राम शक्कर का बुरा मिलाकर इसे एकजान करके इसकी बराबर वजन की 15 पुडिया बना लें ।

          अब यदि खांसी कफ वाली महसूस हो रही हो तो एक गिलास कुनकुने पानी के साथ एक पुडिया सुबह और एक पुडिया शाम को ले लें, और यदि सूखी खांसी महसूस हो रही हो तो कुनकुने दूध के साथ ऐसे ही एक पुडिया सुबह और एक पुडिया शाम को ले लें ।

          सामान्य तौर पर कैसी भी खांसी हो इस उपचार से दो दिन में ठीक हो जावेगी ।

          इसके अलावा वो कारण जो आपको इस खांसी के लिये जिम्मेदार लगता हो जैसे धूल की एलर्जी, बहुत ठण्डा या मीठी टाफियां खाना अथवा धूम्रपान इनसे उपचार के दौरान पूरी तरह से बचने का प्रयास करें और यदि 5-6 दिन लगातार यह दवा लेने के बाद भी आपको सुधार होता न दिखे तो फिर किसी विशेषज्ञ डाक्टर को अवश्य दिखावें ।

बुधवार, 6 अप्रैल 2011

काले घने बाल

      इसी ब्लाग की मेरी पिछली पोस्ट "युवावय की चिंता - बालों का झडना (धीमा गंजापन)" की टिप्पणी में श्री योगेन्द्रजी पाल ने पूछा था कि यदि बालों को काला बनाये रखने का कोई तरीका हो तो बताईये । अतः मेरे पास उपलब्ध जानकारी जिससे असमय सफेद हो रहे बालों को नेचरल काला बनाये रखा जा सकता है को मैं इस पोस्ट में पहले प्रकाशित कर रहा हूँ-

बालों को स्वाभाविक काला (नेचरल ब्लेक) बनाये रखने के लिये-
 
           सामग्री : शिकाकाई, आंवला, रीठा, भृंगराज, ब्राह्मी, मैथीदाना, तिल का शुद्ध तेल सब 100-100 ग्राम और कपूर काचरी 50 ग्राम ।
 
           निर्माण विधि : तेल अलग रखकर शेष सभी द्रव्यों को अलग-अलग कूट पीसकर चूर्ण करके मिलालें और तीन बार छानकर लोहे की कडाही में रखकर तिल का तेल तथा 1500 ग्राम पानी डालकर गर्म करके उबालें । जब पानी आधा रह जावे और काले रंग का हो जावे तब उतार लें । ठण्डा हो जाने पर छान लें और द्रव्यों का बुरादा फेंक दें व छना हुआ यह पानी बाटल में भरलें ।

          प्रयोग विधि : स्नान करने के बाद बालों को अच्छी तरह से पोंछकर थोडी देर बालों को हवा लगने दें जिससे कि बाल पूरी तरह सूख जावें और उनमें नमी न रहे फिर बाटल से यह मिश्रण हथेली पर लेकर बालों पर लगाकर अंगुलियों के पोरों से पूरे सिर के बालों की जडों में यह तेल पानी लगाएँ और बालों को हवा लगने दें । यदि आप बालों को चिकना नहीं रखना चाहते तो आपको यह तेल-पानी इसलिये रुचिकर लगेगा कि इससे बाल पर्याप्त पोषण मिलने के बाद भी रुखे ही दिखेंगे और जिन्हे बालों को चिकना व चमकदार देखने की चाहत हो वे इस प्रयोग के बाद अपना मनपसन्द तेल बालों में लगा सकते हैं ।

 
          वैसे शुद्ध नारियल तेल या ब्राह्मी आंवला तेल अथवा भृंगराज तेल ही बालों के लिये बेहतर हैं । अतः इनके अलावा अन्य कोई भी तेल सिर में नहीं लगाना चाहिये । विशेष यह ध्यान रखें कि इस प्रयोग के चलते समय शेम्पू या मेंहदी का प्रयोग बालों पर न करें । 


वैकल्पिक उपचार- यदि उपरोक्त से हटकर भी आप कोई उपाय तलाशना चाहें तो
 
          1. देशी गाय का ताजा गौमूत्र कपडे की आठ तह करके छानकर एक कप मात्रा में सुबह खाली पेट व एक कप मात्रा में शाम को भोजन से एक घंटे पहले सेवन करें व इसके साथ कासीस भस्म 2 रत्ती व लौह भस्म 1 रत्ती एक चम्मच त्रिफला चूर्ण और थोडे से शहद में मिलाकर सुबह शाम 6 महिने तक नियमित सेवन करें । इसके इस विधि से नियमित सेवन करने से असमय सफेद होने वाले बाल जड से काले होना प्रारम्भ हो जाते हैं ।

          2. मेंहदी, नीम और बेर की पत्तियां, पोदीना और अमरबेल । इन सबको समान मात्रा में लेकर पानी से धो साफ कर पानी के छिंटे मारते हुए सिल पर या मिक्सर में पीसकर लुगदी बनालें । लोहे की कडाही में काले तिल या नारियल का तेल डालकर यह लुगदी भी उसमें डाल दें और इस मिश्रण को आंच पर चढाकर इतना गर्म करें कि लुगदी काली पड जावे और तेल से झाग उठने लगे । अब कडाही आंच से उतारकर किसी सुरक्षित स्थान पर ढककर तीन दिनों तक सुरक्षित रखें व चौथे दिन तेल को कपडे से छानकर कांच की बोतल में सुरक्षित भर लें । यह तेल रात को सोते समय कटोरी में लेकर दोनों हाथ की उंगलियां इस तेल में डुबाकर बालों की जडों में लगाते हुए 15-20 मिनिट तक मालिश करें । इस प्रयोग से बाल जड से काले पैदा होने लगते हैं, सिर में ठण्डक बनी रहती है और गहरी नींद भी इससे आती है  याने अनिद्रा रोग यदि हो तो उसका भी उपचार इस विधि से होता चलता है । 

          इस तेल का प्रयोग करते समय सिर के लिये किसी भी प्रकार के तेल, साबुन या शेम्पू का प्रयोग सख्ती से बंद रखें । बालों को धोने के लिये मुल्तानी मिट्टी या खेत की मिट्टी पानी में गलाकर कपडे से छान लें और इस छने हुए पानी से बालों को मसलकर साफ करते हुए फिर साफ पानी से बालों को धोकर सुखालें । बाल गीले न रखकर पूरी तरह बाल सूखने पर ही यही तेल बालों में लगावें ।

       3. मेंहदी में ग्वारपाठे का गूदा या रस मिलाकर बालों पर 1 घण्टे लगाए रखकर नहाते रहने से भी असमय की बालों की सफेदी के उपचार की बात कुछ जानकार वैद्य करते हैं ।
          उपरोक्त विधियां उन जरुरतमंद लोगों के लिये प्रस्तुत हैं जिनके बाल युवावय में ही सफेद हो रहे हैं । पिछले लेख में प्रस्तुत कारणों से बचते हुए इनमें से कोई भी प्रयोग आप अपनी सुविधानुसार आजमा सकते हैं । लेकिन धीरज और निरन्तरता पहली आवश्यकता भी समझें । सिर्फ महिने 20 दिन में किसी चमत्कार की अपेक्षा न करें ।



  

रविवार, 3 अप्रैल 2011

युवावय की चिंता - बालों का झडना ( धीमा गंजापन )



          45-50 की उम्र पार करने तक बालों का झडना, उडना या सफेद होना सामान्य स्थिति होती है जिसमें पुरुषों में आगे से पीछे की तरफ गंजापन आना और स्त्रियों में बालों का घनापन कम होने लगता है । किन्तु यही समस्या यदि 20-30 वर्ष की युवा उम्र में ही सामने आने लगे तो प्रभावित व्यक्ति का चिन्तित होना स्वाभाविक हो जाता है । चिंता के इसी दौर में लोग बिना सोचे विचारे जल्द से जल्द इस समस्या से मुक्ति पा लेने की चाह में कई बार समस्या और बढा लेते हैं । युवावय में बालों के झडने की समस्या सामने आने पर व उपचार का असर न दिखने पर प्रभावित व्यक्ति के व्यवहार में ये परिवर्तन भी देखे जा सकते हैं-

          व्यक्ति हमेशा टोपी लगाए या अन्य किसी तरीके से सिर को ढकने लगे ।

          आत्मविश्वास में कमी होने से सिर झुकाकर या नजरें मिलाए बगैर बात करने का प्रयास करते दिखे ।

          हमेशा चिंतित, उदास व चिडचिडा रहते हुए अकेले में बार-बार कांच में अपने बालों को देखता दिखे ।

          उसकी नींद उचट जाए, पढाई में मन नहीं लगे और किसी भी कार्य को वह उत्साहपूर्वक नहीं कर पाए ।

          और बाल कम न हो जाएँ इस डर के मारे लंबे समय तक वह बालों को धोना, उनमें तेल लगाना व कंघी करने से बचने लगे ।
 

          इस समस्या के समाधान हेतु सबसे पहले
इस समस्या से प्रभावित लोगों को निम्न नियमों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना अत्यन्त आवश्यक होता है,  अन्यथा इनके लिये कोई भी उपचार कारगर नहीं हो सकता- 

          1. देर रात तक जागना और सुबह देर तक सोये रहना इस समस्या का मुख्य कारण है अतः सबसे पहले जल्दी सोकर सुबह जल्दी जागने की दिनचर्या अनिवार्य रुप से बनाना आवश्यक समझें ।

          2. महिलाएं प्रायः इस सोच से अपने बाल काट लिया करती हैं कि काटने से बाल अधिक बढेंगे जबकि यह एक गलत धारणा है । अतः महिलाएँ इस सोच से अपने बाल कभी न काटें ।

          3. अपना कंघा व तौलिया हमेशा अलग रखें, दूसरे का कंघा व टावेल कभी भी प्रयोग में न लें ।

          4. बालों को कभी भी किसी बाजारी या इश्तहारी शेम्पू से न धोयें ।

          5. हमेशा एक ही प्रकार का तेल प्रयोग करें । तेल बदल-बदल कर नहीं । नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर लगाने से बाल स्वस्थ व चमकीले बने रह सकते हैं ।

          6. दोनों वक्त सुबह-शाम या रात को सोने से पहले शौच क्रिया अवश्य करें जिससे पेट साफ रहे और कब्ज न रहने पावे । किसी भी स्थिति में तनाव से बचें ।

          7. भोजन के साथ सलाद के रुप में मूली, गाजर, हरी ककडी, पके टमाटर, पालक, पत्ता गोभी आदि कोई भी हरी पत्तेदार सब्जी का सलाद काली मिर्च व सेंधा नमक बुरककर बिना चूके प्रतिदिन कम से कम एक बार तो अधिकतम मात्रा में अवश्य खावें ।
उपचार-
          हमदर्द कम्पनी की जवारिश जालीनूश 6 ग्राम और कुश्ता कुर्स खुबशुल हदीद 2 गोली दोनों मिलाकर सुबह खाली पेट लें ।

          प्रतिदिन सोने से पहले चाय के दो चम्मच (लगभग 8-10 ग्राम मात्रा में) त्रिफला चूर्ण गर्म मीठे दूध के साथ लें ।

          स्नान के समय बालों में कोई साबुन या शेम्पू न लगावें । आंवला, रीठा और शिकाकाई का चूर्ण दो-तीन घण्टे पानी में भिगोकर छानलें और बालों में घण्टे भर लगा ऱखकर स्नान करते समय धो डालें ।

          सोते समय बालों की जडों में भृंगराज केश तेल लगाकर 20-25 मिनिट तक मालिश करें । भृंगराज चूर्ण 1-1 चम्मच सुबह, दोपहर व शाम को भोजन के एक घंटे बाद पानी के साथ फांक लें । यह चू्र्ण बना हुआ बाजार में मिलता है । यदि घर पर बनाना पडे तो इसका फार्मूला यह है-

          काला भांगरा 50 ग्राम, सूखा आंवला 25 ग्राम, काले तिल 25 ग्राम और मिश्री 50 ग्राम । इसमें तिल अलग करके शेष तीनों को कूट-पीसकर बारीक चूर्ण करलें और फिर चारों द्रव्यों को मिलाकर रखलें । यही भृंगराज चूर्ण है । इसे कम से कम 6 माह तक प्रयोग करें । बालों को झडने से रोकने के लिये यह अत्यन्त परीक्षित व गुणकारी नुस्खा है ।




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